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...तो नहीं हो सकेगा शहर का कायाकल्प

Mon, 09 May 2022 12:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 09 May 2022 12:12 AM IST
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...then the city will not be rejuvenated
एनसीसी चौराहे के पास जर्जर सड़क से निकलते लोग। - संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। शहर में विकास कार्यों का पहिया थम गया है। तीन बार प्रयास के बाद भी नगर पालिका की बोर्ड बैठक नहीं हो सकी है। इससे वित्तीय वर्ष का बजट पास नहीं हो सका है। ऐसे में न तो कोई नई सड़क बनेगी और न ही शहर में साफ-सफाई के लिए वाहन खरीदे जा सकेंगे। पार्कों का सौंदर्यीकरण सहित अन्य कोई भी कार्य नहीं हो पाएंगे। इस दौरान केवल आवश्यक काम ही निपटाए जाएंगे। शहर का विकास न होने से लोगों को दिक्कतों से जूझना पड़ेगा।
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नगर पालिका सीतापुर की बोर्ड बैठक 30 अप्रैल, छह व सात मई को तीन बार बुलाई गई। तीनों बार कोरम के अभाव में बैठक नहीं हो सकी। जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट की यह अहम बैठक होनी है। इस बैठक में चालू वित्तीय वर्ष की आय व खर्च का बजट पास होना है। इस बजट के आधार पर ही पूरे वर्ष विकास कार्य कराए जाएंगे लेकिन सभासद अपनी मांगों पर कार्रवाई न होने से आजिज आकर इस बैठक का लगातार बहिष्कार करते आ रहे हैं।
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सभासद नगर पालिका पर जनहित के कार्यों में रुचि न लेने का आरोप लगा रहे हैं। बैठक नहीं हो पा रही है इससे नए विकास कार्य नहीं हो पाएंगे। शहर में तमाम सड़कें जर्जर हो गईं हैं। सफाई वाहनों की कमी के चलते जगह-जगह कूड़े के ढेर लग रहे हैं। पटरी दुकानदारों को जमीन नहीं मिल पा रही है। पार्कों की हालत बदहाल पड़ी है। सफाई कर्मचारियों का अभाव बना हुआ है। अगर बैठक हो जाए तो इन कार्यों को गति मिल सकेगी। जिससे शहर के बाशिंदों को सुविधाएं मुहैया हो सकेंगी। लेकिन अब केवल आवश्यक कार्य ही कराए जाएंगे। इसकी खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ेगा।
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जलभराव सहित कई दिक्कतों से जूझेंगे लोग
शहर में जलभराव बड़ी समस्या है। जून माह में मानसून आते ही बरसात शुरू हो जाएगी। इस दौरान जलनिकासी के लिए नाला-नालियों की जरूरत पड़ेगी, जो नहीं बन सकेंगे। प्रमुख मार्गों से लेकर गली मोहल्लों के संपर्क मार्ग बदहाल पड़े है। गड्ढों के बीच से होकर लोग आवागमन कर रहे हैं। शहर में तमाम पार्क ऐसे पड़े हुए हैं, जिनको संवारने की जरूरत है। वह नहीं बन पाएंगे। चालू वित्तीय वर्ष में नए कूड़ाघर बनाने की प्लानिंग थी। यह भी लटक गए है। आउटसोर्सिंग पर सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति फंस गई है।
रैंकिंग पर पड़ेगा असर
प्रत्येक साल नगर पालिका का स्वच्छता सर्वेक्षण होता है। इस सर्वेक्षण के आधार पर ही नगर पालिका की पूरे भारत में रैंकिंग तय होती है। इस सर्वेक्षण में सफाई, शौचालय सहित तमाम सुविधाओं को परखा जाता है। अगर बैठक नहीं होगी तो नए डस्टबिन, सफाई मशीनें नहीं खरीदी जा सकेंगी। प्रकाश व्यवस्था के लिए लाइटों की खरीद नहीं हो पाएगी। इसका असर सीधे नगर पालिका की रैंकिंग पर पड़ेगा। शहर की रैंकिंग सुधरने की बजाए और बिगड़ सकती है।

सभासदों की मांगें हमारे अधिकार क्षेत्र से बाहर
ईओ वैभव त्रिपाठी का कहना है नाराज सभासदों से वार्ता हुई है। सभासद स्वकर प्रणाली में लागू सर्किल रेट का विरोध कर रहे हैं। सर्किल रेट का गजट 2018 में हो चुका है। सभासद इस गजट को रद्द करने की बात कह रहे है, जो हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। करीब चार साल बीत जाने के बाद अब गजट का विरोध हो रहा है। फिर भी बोर्ड बैठक करवाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। सभासदों की सभी समस्याएं दूर करने की कोशिश हो रही हैं। जब तब बोर्ड बैठक नहीं होगी, तब तक केवल आवश्यक कार्य ही हो पाएंगे।
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