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सामूहिक परिवार के खात्मे से बढ़ रहा डिप्रेशन

Fri, 07 Apr 2017 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 07 Apr 2017 12:00 AM IST
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 the end of joint faimily is cause of depression
demo pic - फोटो : अमर उजाला

सीतापुर। अस्पताल सरकारी हो या प्राइवेट, आजकल हर दस मरीज पर दो पेसेंट डिप्रेशन (मानसिक तनाव) के शिकार होकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक अस्पतालों में करीब 20 प्रतिशत ऐसे मरीज आते हैं जो खुद को डिप्रेशन का शिकार बताते हैं।

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शायद यही वजह है कि 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम ‘डिप्रेशन’ ही रखी गई है। जीवन शैली में मामूली बदलाव लाकर लोग इस बीमारी से बच सकते हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि समय से भोजन करें, पर्याप्त नींद लें, वहीं हो सके तो सामूहिक परिवार में रहें। इस मामूली बदलाव से ड्रिपेशन से बचा जा सकता है।
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जिला अस्पताल के डॉक्टर पंकज अवस्थी कहते है कि भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख पाते। यदि लोग ज्वाइंट फैमिली (सामूहिक परिवार) में रहें। तब वे अपने समस्याओं को एक दूसरे से शेयर कर सकते हैं। एकल फैमिली में तमाम समस्याओं को आदमी अकेला ही झेलता रहता है और तनाव में आ जाता है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एन नथानी के मुताबिक बच्चों का शरीर नाजुक होता है, इसलिए उन्हें देखभाल की काफी जरूरत है। लोगों की अनदेखी और मामूली लापरवाही बच्चों को बीमार कर देती है। मामूली बुखार, खांसी, दाने निकलने पर तत्काल निकट के अस्पताल जाएं और चिकित्सक की सलाह पर इलाज करें।


जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके गौतम कहते हैं कि किसी भी बीमारी की अनदेखी न करें। यदि बिना बुखार खांसी लगातार आ रही है तो तत्काल जिला अस्पताल में जांच कराएं। ये टीबी के लक्षण भी हो सकते हैं। इसके अलावा बदलते मौसम के साथ कभी डेंगू, कभी स्वाइन फ्लू, कभी दिमागी बुखार शरीर पर हावी हो जाता है।

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