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Sitapur News: केशव ग्रीन सिटी केस में पुलिस की कार्रवाई पर रोक
Sat, 31 Oct 2026 01:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 31 Oct 2026 01:35 AM IST
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सीतापुर। केशव ग्रीन सिटी जलभराव प्रकरण में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश से मामले में नया मोड़ आ गया है। अदालत ने रामकोट थाने में दर्ज मुकदमे की कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। इससे मुकेश अग्रवाल समेत अन्य नामजद आरोपितों को राहत मिली है।
सितंबर में हुई मूसलाधार बारिश के बाद केशव ग्रीन सिटी में जलभराव को लेकर विवाद गहरा गया था। स्थानीय लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। आरोप लगाया गया था कि नदी की जमीन पर अवैध रूप से कॉलोनी बसाई गई है। मामले की प्रशासनिक जांच के बाद 16 अक्टूबर को रामकोट थाने में मुकेश अग्रवाल समेत सात नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
इस मुकदमे को चुनौती देते हुए श्वेता अग्रवाल व अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को प्रथम दृष्टया विचारणीय माना।
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याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने एफआईआर दर्ज कराने से पहले सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) की राय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि अभियोजन अधिकारी विवेचक पर अपनी राय या निर्णय थोप नहीं सकते। इस कानूनी पहलू पर विचार करते हुए अदालत ने एफआईआर संख्या 0291/2026 और उससे जुड़ी कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।
अदालत ने विपक्षी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। अब अगली सुनवाई में मामले के कानूनी पहलुओं पर आगे विचार होगा।
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सितंबर में हुई मूसलाधार बारिश के बाद केशव ग्रीन सिटी में जलभराव को लेकर विवाद गहरा गया था। स्थानीय लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। आरोप लगाया गया था कि नदी की जमीन पर अवैध रूप से कॉलोनी बसाई गई है। मामले की प्रशासनिक जांच के बाद 16 अक्टूबर को रामकोट थाने में मुकेश अग्रवाल समेत सात नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
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इस मुकदमे को चुनौती देते हुए श्वेता अग्रवाल व अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को प्रथम दृष्टया विचारणीय माना।
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याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने एफआईआर दर्ज कराने से पहले सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) की राय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि अभियोजन अधिकारी विवेचक पर अपनी राय या निर्णय थोप नहीं सकते। इस कानूनी पहलू पर विचार करते हुए अदालत ने एफआईआर संख्या 0291/2026 और उससे जुड़ी कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।
अदालत ने विपक्षी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। अब अगली सुनवाई में मामले के कानूनी पहलुओं पर आगे विचार होगा।