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अग्निकांड में जलीं किताबें: पढ़ लिखकर डॉक्टर बनना चाहती है सावित्री, पूर्व सीएम अखिलेश ने ली जिम्मेदारी
Mon, 06 Apr 2026 07:57 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, सीतापुर
अमर उजाला नेटवर्क, सीतापुर
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Mon, 06 Apr 2026 07:57 PM IST
सार
अपने जले हुए घर में स्कूल का बस्ता और किताबें खो देने वाली आठ साल की सावित्री पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती है। पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी ली है।
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आठ साल की मासूम सावित्री।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
सीतापुर जिले के सदरपुर के सरैंया चलांकापुर गांव में शनिवार को हुए भीषण अग्निकांड में कई परिवारों की खुशियां जलकर राख हो गई थीं।उसी में सरैंया गांव निवासी हरिश्चंद्र की 8 वर्षीया पुत्री सावित्री का पूरा बस्ता आग में स्वाहा हो गया था। अगले दिन सुबह जब लोग अपने घरों का जला अधजला सामान निकाल रहे थे इसी बीच सावित्री भी अपने जले हुए बस्ते से अधजली किताब पर पेंसिल से होमवर्क करने लगी।
उस अबोध को क्या पता कि उसके घर की गृहस्थी जल गई है।इसी बीच घर के पास मौजूद किसी व्यक्ति ने उसका फोटो खींचकर फेसबुक पर अपलोड कर दिया। जिसे देखकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बच्ची की आगे की पूरी पढ़ाई का जिम्मा अपने ऊपर लेते हुए टिप्पणी की थी।
आज संवाद न्यूज एजेंसी की टीम सावित्री के घर पहुंची। सावित्री ने बताया कि वह गांव के प्राइमरी स्कूल में कक्षा 4 की छात्रा है। वह रोज पढ़ने जाती थी और खूब मेहनत से पढ़ाई करती थी लेकिन उसकी किताबें जल गईं। हालांकि उसे नई किताबें मिल गई हैं। उसने बताया कि मैं पढ़ लिख कर डाक्टर बनना चाहती हूं।
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लड़के लड़की में भेद नहीं करता हूँ: हरिश्चंद्र
सावित्री के पिता हरिश्चन्द्र व माता संगीता ने बताया कि वह बहुत गरीब हैं। उनके पास मात्र 15 बिसुवा जमीन है जिससे वह मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। हरिश्चंद्र के परिवार में सावित्री के अलावा एक 4 वर्ष की बेटी सीमा व 3 वर्ष का एक बेटा दिपांशु है। हरिश्चंद्र कहते हैं कि मैं लड़का और लड़की में भेद नहीं करना चाहता था। इसलिए मैं गरीब होने के बावजूद अपनी बेटी सावित्री को पढ़ा-लिखा कर अफसर बनाना चाहता हूं। इस समय परिवार में गमी है और चूल्हा भी नष्ट हो चुका है इसलिए अभी भोजन घर में नहीं बन पा रहा है। फिलहाल गांव, पास पड़ोस के संभ्रांत लोगों व ग्राम प्रधान द्वारा भोजन की व्यवस्था की जा रही है। सरकार तथा अन्य प्रतिनिधियों द्वारा भी राशन उपलब्ध कराया गया है।
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उस अबोध को क्या पता कि उसके घर की गृहस्थी जल गई है।इसी बीच घर के पास मौजूद किसी व्यक्ति ने उसका फोटो खींचकर फेसबुक पर अपलोड कर दिया। जिसे देखकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बच्ची की आगे की पूरी पढ़ाई का जिम्मा अपने ऊपर लेते हुए टिप्पणी की थी।
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आज संवाद न्यूज एजेंसी की टीम सावित्री के घर पहुंची। सावित्री ने बताया कि वह गांव के प्राइमरी स्कूल में कक्षा 4 की छात्रा है। वह रोज पढ़ने जाती थी और खूब मेहनत से पढ़ाई करती थी लेकिन उसकी किताबें जल गईं। हालांकि उसे नई किताबें मिल गई हैं। उसने बताया कि मैं पढ़ लिख कर डाक्टर बनना चाहती हूं।
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लड़के लड़की में भेद नहीं करता हूँ: हरिश्चंद्र
सावित्री के पिता हरिश्चन्द्र व माता संगीता ने बताया कि वह बहुत गरीब हैं। उनके पास मात्र 15 बिसुवा जमीन है जिससे वह मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। हरिश्चंद्र के परिवार में सावित्री के अलावा एक 4 वर्ष की बेटी सीमा व 3 वर्ष का एक बेटा दिपांशु है। हरिश्चंद्र कहते हैं कि मैं लड़का और लड़की में भेद नहीं करना चाहता था। इसलिए मैं गरीब होने के बावजूद अपनी बेटी सावित्री को पढ़ा-लिखा कर अफसर बनाना चाहता हूं। इस समय परिवार में गमी है और चूल्हा भी नष्ट हो चुका है इसलिए अभी भोजन घर में नहीं बन पा रहा है। फिलहाल गांव, पास पड़ोस के संभ्रांत लोगों व ग्राम प्रधान द्वारा भोजन की व्यवस्था की जा रही है। सरकार तथा अन्य प्रतिनिधियों द्वारा भी राशन उपलब्ध कराया गया है।
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