फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Sisaya market fallen in ghagra river

सिसैया बाजार घाघरा में समाया

Wed, 20 Jul 2016 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 20 Jul 2016 10:54 PM IST
विज्ञापन
Sisaya market fallen in ghagra river
घाघरा नदी से कटान

जिले के गांजर इलाके में घाघरा का रौद्र रूप बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार को घाघरा नदी ने सिसैया बाजार गांव को निगल लिया, जिससे सिसैया बाजार का अस्तित्व समाप्त हो गया है। हालत ये है कि अधिकांश घर घाघरा नदी की कटान में चले गए हैं। जो बचे हैं उन घरों को खुद गृहस्वामी तोड़कर मलबा ढो रहे हैं।

विज्ञापन


उधर, शारदा व घाघरा बैराज से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे हालात और बिगड़ने के आसार हैैं। बीते एक सप्ताह से लोग बाढ़ का दंश झेल रहे हैं, लेकिन उनकी मदद के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। प्रशासन सरकारी नाव चलाने का दावा कर रहा है, लेकिन पूरे क्षेत्र में कहीं भी सरकारी मदद नजर नहीं आ रही है।
विज्ञापन


हर तरफ बर्बादी का मंजर नजर आ रहा है। पीड़ित मदद की बाट जोह रहे हैं, लेकिन मदद नहीं मिल रही है। मंगलवार की रात घाघरा नदी ने सिसैया बाजार में तेजी से कटान शुरू कर दिया। इससे जगमोहन, शिवराम, शिवनाथ, राम नरेश, संतोष, रामानंद, रामचंद्र, विनोद, रमेश, पेशकार, रमजान, लल्लन, अली अहमद, नूरमा, अशरफ, मोहर्रम अली, हसमत आदि के घर कटकर नदी में बह गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


कटान से दहशतजदा रामाधार, रजेंद्र आदि ने खुद ही घरों को तोड़कर सामान सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया। बुधवार को घाघरा नदी के किनारे बसे सिसैया बाजार का अस्तित्व समाप्त हो गया। उधर, चंद्रभाल पुरवा में मंदिर व समाधि कटकर नदी में समा गई।

निर्मल पुरवा, गोड़ियन पुरवा, रामलाल पुरवा के ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर प्रशासन की मदद नहीं मिल रही है। जो भी नावें चल रही हैं, वे नावें निजी हैं या फिर किराया देना पड़ रहा है। रेउसा क्षेत्र से लेकर रामपुर मथुरा क्षेत्र तक 92 गांव बाढ की चपेट में हैं। लोगों को खाने व पेयजल की दिक्कतें हो रही हैं।

दोपहर के वक्त जलस्तर में मामूली गिरावट देखने को मिली, मगर शाम होते ही जलस्तर में तेजी से इजाफा होने लगा। इस पूरे क्षेत्र में बिजली व्यवस्था व शिक्षा व्यवस्था ठप्प है। हर तरफ त्राहि-त्राहि मची है। कोई पुरसाहाल नहीं है। क्षेत्र केे नागरिकों की मानें तो क्षेत्र के लेखपाल भी प्राइवेट नावों पर ही निर्भर हैं।


बाढ़ग्रस्त किसी भी गांव में अभी तक सरकारी महकमे का कोई भी कर्मचारी व अधिकारी नहीं पहुंचा है। सबसे दयनीय स्थिति कोनी गांव की है, जो कटान व बाढ़ के कारण अलग-थलग पड गया है। उधर, शारदा व घाघरा बैराज से 264428 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे हालात और भी बिगड़ने के आसार हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed