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दशानन का दहन होते ही लगे श्रीराम के जयकारे

Sat, 16 Oct 2021 11:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 16 Oct 2021 11:54 PM IST
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Shree Ram's cheers started as soon as Dashanan was burnt
सीतापुर में तरीनपुर मेला मैदान पर धूं-धूंकर जलता रावण का पुतला।- संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। विजयदशमी का पर्व जिले में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। एक ही बाण में दशानन धूं-धूंकर जलने लगा। बुराई पर अच्छाई की जीत होते ही चारों तरफ जय श्रीराम के जयकारे लगने लगे। इस तरह के दृश्य विजयदशमी के दिन पूरे जिले में दिखाई दिए। शहर की सबसे पुरानी तरीनपुर रामलीला में दिन के समय रावण वध का मंचन हुआ। देर शाम यहां पर करीब 35 फिट लंबे रावण का वध किया गया।
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भगवान राम ने जैसे ही बाण छोड़ा तो रावण जलने लगा। इसको देखकर लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। कुछ ही देर में चारों तरफ जमकर आतिशबाजी हुई। खैराबाद संवाद के अनुसार लंकापति रावण श्रीराम के बाणों से घायल होकर जब भूमि पर गिरता हैं तो भूमि डोल उठती है। यह देखकर श्रीराम दो धड़ों में रावण के शरीर को बांट देते हैं।
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इस महासंग्राम में रावण के भाई बलशाली कुम्भकर्ण, इंद्रजीत जैसे योद्धाओं का अंत हुआ। यह प्रसंग खैराबाद के पाठकताल पर चल रही रामलीला में विभिन्न कलाकारों द्वारा दर्शाया गया। शाम के समय रावण को जलाकर सत्य की जीत दिखाई गई।
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महमूदाबाद संवाद के अनुसार श्री संकटा देवी मंदिर के सांस्कृतिक मंच पर श्री खाटू श्याम रासलीला मंडल वृंदावन मथुरा के कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया। भगवान राम ने रावण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया। इस अवसर पर मंदिर समिति की संरक्षिका डॉ. मणि मिश्रा, अध्यक्ष आरके वाजपेयी, जाजता प्रसाद जायसवाल, शिवदास पुरवार, लेखपाल ललित सिंह, प्रदीप शाह मौजूद रहे।
पैंतेपुर स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में रामलीला मंचन के कलाकारों द्वारा रामलीला का आयोजन किया गया, जिसके साथ रावण दहन किया गया। मछरेहटा संवाद के अनुसार कस्बे में प्रसिद्ध दशहरा मेला का आयोजन करीब 250 वर्षों से चला आ रहा है, जिसमें ओम जयश्री सिद्धेश्वर धार्मिक रामलीला निराला पार्टी के कलाकारों द्वारा रामलीला प्रस्तुत की गई। रावण वध के साथ ही विजयदशमी धूमधाम से मनाई गई।
खुशी से झूम उठी राम की सेना
पिसावां संवाद के अनुसार, कस्बे में चल रही रामलीला के आखिरी दिन जय मड़ैया बाबा सेवा समिति के कलाकारों द्वारा मंचन किया गया। इसमें दिखाया कि पाताल का राजा अहिरावण, राम-लक्ष्मण को धोखे से पाताल लोक लेकर चला जाता है। उनकी बलि देने की तैयारी करता है। राम-लक्ष्मण के गायब होने से राम सेना चिंता में डूब जाती है।
महाराज विभीषण उन्हें बताते हैं कि अहिरावण ही राम और लक्ष्मण को पाताल लोक लेकर गया है। हनुमान को उनकी रक्षा के लिए भेजा जाता है। हनुमान पाताल लोक जाते हैं और रावण के भाई अहिरावण का वध कर राम लक्ष्मण को सकुशल वापस लेकर आते हैं। इसके बाद रावण स्वयं युद्ध के लिए मैदान में आता है। विभीषण राम को रावण की मृत्यु का उपाय बताते हैं।
विभीषण के बताने के बाद भगवान राम, रावण का वध कर देते हैं। राम की सेना खुशी से झूमने लगती है। चारों ओर जय श्रीराम का उद्घोष गूंजने लगते है। राम-लक्ष्मण सीता सहित पुष्पक विमान से वापस अयोध्या पहुंचते हैं। रामलीला के अंत में 25 फिट का रावण का दहन किया गया।

सेतु लीला के मंचन ने मोहा मन
लहरपुर संवाद के अनुसार श्रीरामलीला कमेटी के तत्वावधान में श्री रामलीला मैदान पर एतिहासिक सेतु लीला का भव्य सजीव मंचन किया गया। जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु रामलीला मैदान स्थित पक्के तालाब तीर्थ पर मौजूद रहे। इस सेतु पर जैसे ही भगवान श्रीराम अपनी सेना सहित पहुंचे तो सारा वातावरण जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। सेतु को इस अवसर पर भव्य व आकर्षक ढंग से सजाया गया था।
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