फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Shashank Trivedi from Maholi managed to improve his winning record

महोली से शशांक त्रिवेदी अपनी जीत के रिकॉर्ड को बेहतर बनाने में रहे कामयाब

Fri, 11 Mar 2022 11:47 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 11:47 PM IST
विज्ञापन
Shashank Trivedi from Maholi managed to improve his winning record
सीतापुर। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले सीतापुर ने आठ सीटों पर फगवा लहराया। भाजपा के चार विधायकों ने दोबारा जीत हासिल करके अपनी खुशी दोगुनी कर ली लेकिन तीन विधायक अपना पिछला रिकार्ड दोहराने में नाकामयाब रहे। विधानसभा पहुंच जरूर गए लेकिन जीत के फासले को बढ़ाने के बजाय गिराते ही चले गए। यह गिरावट मिश्रिख, हरगांव व सेवता विधानसभा क्षेत्र में दिखाई दी। केवल महोली सीट पर पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार जीत के अंतर में काफी बढ़ोतरी हुई।
विज्ञापन

जिले में भाजपा के चार विधायक 2022 के चुनाव में दोबारा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गए हैं। मिश्रिख विधानसभा सीट से विधायक रामकृष्ण भार्गव ने 2017 में 20672 मतों से अपनी जीत सुनिश्चित की थी। इस बार उम्मीद की जा रही थी कि वह लंबे अंतर से चुनाव जीतेंगे लेकिन इनकी जीत का अंतर काफी कम हुआ है। इस बार 11465 मतों से ही अपनी जीत हासिल कर सके। यानि 9207 मतों का अंतर इनकी जीत में साफ दिखाई दिया।
विज्ञापन

इसी तरह हरगांव से विधायक सुरेश राही ने 2017 में रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी। 44995 वोटों से बसपा के रामहेत भारती को पटकनी दी थी। इस बार सुरेश राही 38160 मतों से ही जीत दर्ज कर सके। इनकी जीत के फासले में 6835 वोट कम पड़ गए। इसके अलावा सेवता से ज्ञान तिवारी ने 2017 में 43659 मतों से जीत दर्ज की थी। इस बार के चुनाव में इनका ग्राफ करीब 50 फीसद नीचे गिर गया। इस बार वह 20281 मतों से ही जीत दर्ज कर सके। इस बार 23378 वोट कम मिले।
विज्ञापन
विज्ञापन

अगर महोली विधानसभा सीट की बात की जाए तो यहां 2017 में शशांक त्रिवेदी ने महज 3717 मतों से ही अपना चुनाव जीता था। इस बार शशांक ने अपनी जीत के अंतर को काफी बढ़ा दिया है। इस बार वह 12172 मतों से चुनाव जीतकर विधानसभा की दहलीज पहुंच गए हैं। यानि 8455 अधिक मतों से इस बार जीत दर्ज की है।
राजनीतिक पंडितों का कहना है इस बार बसपा शुरुआत से ही कमजोर दिखाई दे रही थी। जब चुनाव चल रहे थे तो सपा व भाजपा की तरफ से कई चुनावी रैलियां हुईं लेकिन बसपा की तरफ से मायावती का कोई चुनावी दौरा जिले में नहीं हुआ। इससे बसपा को कमजोर समझा जा रहा था। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि बसपा का कुछ वोट बैंक भाजपा को ट्रांसफर हो रहा है।

इससे भाजपा की जीत में पिछली बार के मुकाबले इस बार बढ़ोतरी होगी लेकिन जब नतीजे आए तो जीत तो मिली लेकिन विधायक नया रिकॉर्ड तो दूर पुराने रिकार्ड पर भी कायम नहीं रह पाए। सपा जिले की सभी नौ सीटों पर दमदारी से चुनाव लड़ती हुई दिखाई दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed