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Sitapur News: सात सहकारी समितियों पर ताले, खाद और धान खरीद ठप
Tue, 27 Oct 2026 12:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Tue, 27 Oct 2026 12:49 AM IST
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सकरन। साधन सहकारी समितियों के सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सकरन की सात साधन सहकारी समितियां बंद होने से न तो किसानों को खाद-बीज मिल पा रहा है और न ही धान की सरकारी खरीद हो रही है। ऐसे में किसान बाजारों में कम कीमत पर धान बेचने और निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर हैं।
विकासखंड सकरन में पलौली, दुगाना, काजीपुर, उमरा खुर्द, क्योटाना, सांडा, अंदू नसीरपुर और महाराज नगर स्थित समितियों के माध्यम से किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराया जाता है। इन्हीं समितियों पर धान क्रय केंद्र भी बनाए गए हैं। जिलाधिकारी ने 12 अक्तूबर से धान खरीद शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सचिवों की हड़ताल के चलते समितियों पर खरीद शुरू नहीं हो सकी है।
समितियों के सचिव दो साल से बकाया मानदेय के भुगतान की मांग को लेकर लखनऊ के ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। हड़ताल के कारण समितियों का संचालन बंद है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। सरकारी केंद्रों पर धान नहीं बिकने से किसान बाजारों में करीब 1400 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान बेच रहे हैं। साधन सहकारी समिति सांडा के सचिव आशुतोष पांडेय ने बताया कि जब तक बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक समितियों का संचालन बंद रहेगा।
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किसानों को हो रहा दोहरा नुकसान
किसान रामपाल ने बताया कि सरकार ने इस वर्ष धान का समर्थन मूल्य 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन समितियों पर खरीद नहीं होने के कारण किसानों को बाजार में कम कीमत पर अपनी उपज बेचना पड़ रही है। किसान संतोष कुमार ने बताया कि कम दाम पर धान बेचने के साथ ही समितियां बंद होने से सरसों और मसूर की बुआई के लिए निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदने के कारण दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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विकासखंड सकरन में पलौली, दुगाना, काजीपुर, उमरा खुर्द, क्योटाना, सांडा, अंदू नसीरपुर और महाराज नगर स्थित समितियों के माध्यम से किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराया जाता है। इन्हीं समितियों पर धान क्रय केंद्र भी बनाए गए हैं। जिलाधिकारी ने 12 अक्तूबर से धान खरीद शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सचिवों की हड़ताल के चलते समितियों पर खरीद शुरू नहीं हो सकी है।
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समितियों के सचिव दो साल से बकाया मानदेय के भुगतान की मांग को लेकर लखनऊ के ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। हड़ताल के कारण समितियों का संचालन बंद है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। सरकारी केंद्रों पर धान नहीं बिकने से किसान बाजारों में करीब 1400 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान बेच रहे हैं। साधन सहकारी समिति सांडा के सचिव आशुतोष पांडेय ने बताया कि जब तक बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक समितियों का संचालन बंद रहेगा।
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किसानों को हो रहा दोहरा नुकसान
किसान रामपाल ने बताया कि सरकार ने इस वर्ष धान का समर्थन मूल्य 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन समितियों पर खरीद नहीं होने के कारण किसानों को बाजार में कम कीमत पर अपनी उपज बेचना पड़ रही है। किसान संतोष कुमार ने बताया कि कम दाम पर धान बेचने के साथ ही समितियां बंद होने से सरसों और मसूर की बुआई के लिए निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदने के कारण दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है।