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उफनाने लगीं नदियां, मुहाने पर 50 घर
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रेउसा (सीतापुर)। तराई इलाके में नदियों का जलस्तर ग्रामीणों की धड़कने बढ़ाने लगा है। लगातार दूसरे दिन 1.42 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नदियों ने कटान करना शुरू कर दिया है। फौजदारपुरवा गांव कटान से सबसे अधिक प्रभावित है। यहां के करीब 50 घर नदी के मुहाने पर आ गए हैं। गांव पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
बीते मार्च में इस गांव से दो किलोमीटर दूर बहने वाली नदी अब गांव से महज 10 मीटर की दूरी पर बह रही है। ग्रामीण दिन-रात जागकर नदी के जलस्तर पर टकटकी लगाए हैं। बाढ़ से बचाव के लिए हो रहा निर्माण कार्य भी जलस्तर बढ़ने से ठप हो गया है। तराई इलाके में शारदा व सरयू नदी बहती हैं। पहाड़ों पर हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
तहसीलदार ने बताया कि बुधवार को लखीमपुर के बैराज से 1.42 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसकी वजह से नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने से सबसे अधिक फौजपुरवा गांव प्रभावित हुआ है। फौजदारपुरवा गांव नदी के मुहाने पर आ गया है। 50 घरों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है।
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फौजदारपुरवा के भिखारीलाल, विजय प्रताप, दिलीप कुमार, राजू व सोहन का कहना है कि बीते मार्च में नदी गांव से करीब दो किलोमीटर दूर बहती थी। अब नदी गांव से 10 मीटर की दूरी पर आ गई है। जलस्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है। अगर इसी रफ्तार से पानी बढ़ेगा तो जल्द ही गांव कटान की चपेट में आ जाएगा। इससे गांव के लोगों में बाढ़ का खौफ उत्पन्न हो गया है।
सोहन, सोबरन लाल, अनुग्रह प्रसाद व अनिल कुमार का कहना है कि हम लोग दो दिन से रात में सोए नहीं है। पूरे परिवार की रखवाली करते हैं। पता नहीं कब जलस्तर बढ़ जाए और हम लोग पानी की चपेट में आ जाएं। अब तो रात में भी निकलना बहुत ही मुश्किल हो रहा है। यहां पर चल रहे स्टड के निर्माण कार्य ठप हो गए है। ग्रामीण लक्ष्मी नारायन व लालाराम का कहना है कि स्टड निर्माण कार्य बंद हो गया है, ऐसे में बाढ़ को अब कोई रोक नहीं सकता। बचाव के इंतजाम नाकाफी है। इससे गांव के लोग दहशत में है।
80 फीसदी निर्माण कार्य के दावे हवा हवाई
तराई इलाके में उफनाती नदियों ने लोगों के माथे पर चिंता लकीरें खींच दी है। नदियों ने कटान शुरू कर दी है। इससे तराई क्षेत्रों में बर्बादी दिखने लगी है। बाढ़ का दशकों से दंश झेल रहे लोग इस बार भी दहशत में है। विडंबना है कि जिस घर को बनाने में लोग पूरी जिंदगी लगा देते हैं, उसी घर को अब अपने हाथों से तोड़ने को मजबूर हैं।
हैंडपंप, पेड़, धार्मिक स्थल सब नदी के मुहाने पर हैं। 80 फीसदी निर्माण कार्य के दावे फेल नजर आ रहे हैं। न तो कहीं कोई बाढ़ चौकी दिखाई दे रही है, न ही नावें पानी में तैर रही हैं। हर तरफ बेबसी छाई है। गांवों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है पर जिम्मेदार इसे केवल जलस्तर बढ़ने की बात कहकर लोगों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।
नदियों में बैराजों से 1.42 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलस्तर बढ़ा है लेकिन बाढ़ जैसे हालात नहीं है। बराबर नजर बनाए हुए हैं। लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। वे भी सभी पहलुओं की रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
- अभिचल प्रताप सिंह, तहसीलदार, बिसवां
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बीते मार्च में इस गांव से दो किलोमीटर दूर बहने वाली नदी अब गांव से महज 10 मीटर की दूरी पर बह रही है। ग्रामीण दिन-रात जागकर नदी के जलस्तर पर टकटकी लगाए हैं। बाढ़ से बचाव के लिए हो रहा निर्माण कार्य भी जलस्तर बढ़ने से ठप हो गया है। तराई इलाके में शारदा व सरयू नदी बहती हैं। पहाड़ों पर हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
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तहसीलदार ने बताया कि बुधवार को लखीमपुर के बैराज से 1.42 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसकी वजह से नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने से सबसे अधिक फौजपुरवा गांव प्रभावित हुआ है। फौजदारपुरवा गांव नदी के मुहाने पर आ गया है। 50 घरों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है।
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फौजदारपुरवा के भिखारीलाल, विजय प्रताप, दिलीप कुमार, राजू व सोहन का कहना है कि बीते मार्च में नदी गांव से करीब दो किलोमीटर दूर बहती थी। अब नदी गांव से 10 मीटर की दूरी पर आ गई है। जलस्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है। अगर इसी रफ्तार से पानी बढ़ेगा तो जल्द ही गांव कटान की चपेट में आ जाएगा। इससे गांव के लोगों में बाढ़ का खौफ उत्पन्न हो गया है।
सोहन, सोबरन लाल, अनुग्रह प्रसाद व अनिल कुमार का कहना है कि हम लोग दो दिन से रात में सोए नहीं है। पूरे परिवार की रखवाली करते हैं। पता नहीं कब जलस्तर बढ़ जाए और हम लोग पानी की चपेट में आ जाएं। अब तो रात में भी निकलना बहुत ही मुश्किल हो रहा है। यहां पर चल रहे स्टड के निर्माण कार्य ठप हो गए है। ग्रामीण लक्ष्मी नारायन व लालाराम का कहना है कि स्टड निर्माण कार्य बंद हो गया है, ऐसे में बाढ़ को अब कोई रोक नहीं सकता। बचाव के इंतजाम नाकाफी है। इससे गांव के लोग दहशत में है।
80 फीसदी निर्माण कार्य के दावे हवा हवाई
तराई इलाके में उफनाती नदियों ने लोगों के माथे पर चिंता लकीरें खींच दी है। नदियों ने कटान शुरू कर दी है। इससे तराई क्षेत्रों में बर्बादी दिखने लगी है। बाढ़ का दशकों से दंश झेल रहे लोग इस बार भी दहशत में है। विडंबना है कि जिस घर को बनाने में लोग पूरी जिंदगी लगा देते हैं, उसी घर को अब अपने हाथों से तोड़ने को मजबूर हैं।
हैंडपंप, पेड़, धार्मिक स्थल सब नदी के मुहाने पर हैं। 80 फीसदी निर्माण कार्य के दावे फेल नजर आ रहे हैं। न तो कहीं कोई बाढ़ चौकी दिखाई दे रही है, न ही नावें पानी में तैर रही हैं। हर तरफ बेबसी छाई है। गांवों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है पर जिम्मेदार इसे केवल जलस्तर बढ़ने की बात कहकर लोगों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।
नदियों में बैराजों से 1.42 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलस्तर बढ़ा है लेकिन बाढ़ जैसे हालात नहीं है। बराबर नजर बनाए हुए हैं। लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। वे भी सभी पहलुओं की रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
- अभिचल प्रताप सिंह, तहसीलदार, बिसवां