{"_id":"59908fa74f1c1b4a3a8b45a3","slug":"rising-flood-in-ganjar-area","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांजर में बढ़ रहा सैलाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांजर में बढ़ रहा सैलाब
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Aug 2017 11:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेउसा बारिश और बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी से गांजर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इससे घाघरा के जलस्तर में वृद्घि हो रही है। इससे पचीसा टापू पर तीन झोपड़ियां तेज बहाव में बह गई। वहीं नदी की कटान से 132 बीघा जमीन बह गई है। उधर, रविवार को बैराजों से साढ़े चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे यहां के हालात और बिगड़ने के आसार हैं।
विज्ञापन
रेउसा में सबसे भयावह स्थिति पचीसा टापू की है। पहाड़ों पर हो रही बारिश से लगातार जलस्तर बढ़ता जा रहा है। वहीं बहाव भी तेज हो रहा है। शनिवार रात स्वामी दयाल, राजेश व खेलावन की झोपड़ियां बह गई है। 200 के करीब परिवार टापू पर हैं। इनके साथ उनके पालतू मवेशी फंसे हुए हैं। हर कोई मदद का इंतजार कर रहे हैं। वहीं तटीय क्षेत्र में नदी कटान कर रही है।
विज्ञापन
परमेश्वर पुरवा के मैकू, कांशीराम, फौजदार पुरवा के लालाराम, राजाराम, जिन्ना पुरवा के राम बिलास, रामकुमार, छोटे, शंकर, जैतहिया के श्रीकांत,बिल्लर पुरवा के जोखन, दुर्गा पुरवा के रजितराम, अनिल आदि की 132 बीघा खेती योग्य जमीन कटकर नदी में बह गई। क्षेत्र के 400 के करीब गांव इन दिनों बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। अधिकांश परिवारों के पास राशन खत्म हो चुका है।
विज्ञापन
ये परिवार मदद का इंतजार कर रहे हैं। बाढ़ का पानी रेउसा कस्बे से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर बह रहा है। क्षेत्र के सारे रास्ते जलमग्न हो गए हैं। उधर घाघरा, शारदा व बनबसा बैराजों से 447585 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे हाल के दिनों में राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
बाढ़ पीड़ित बीते दो सप्ताह से बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। प्रशासन मदद के दावे कर रहा है, लेकिन अधिकांश परिवारों को मदद नहीं पहुंच सकी है। लोग मदद की राह तकते-तकते थक गए हैं। बावजूद इसके उन्हें मदद नहीं मिल सकी है। अब इन पीड़ितों के सब्र का पैमाना छलक रहा है। पचीसा के बाशिंदों की माने तो बाढ़ आने के बाद से आज तक महज एक बार ही अधिकारी इस टापू पर पहुंचे। मदद का भरोसा जरूर दिया गया था, लेकिन मदद का एक दाना इस टापू पर नहीं पहुंच सका है।