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पेड़ बनने से पहले ही सूख गये पौधे
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महमूदाबाद में लगाए गए पेड़ रहे सूख और सुरक्षा के लिए नहीं लगाया लोहे का जाल। -संवाद
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले भर में पौधरोपण की जो रस्म अदायगी की गई, वह अगले दिन ही दम तोड़ती नजर आई। अधिकतर पौधे देखरेख की अभाव में पेड़ बनने से पहले ही सूख गए। इनकी सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं दिखे। कागजी लिखा-पढ़ी में जो लक्ष्य दिया गया था उसका 50 प्रतिशत पौधरोपण भी जमीन पर नहीं दिखा।
जिले भर में बीते मंगलवार को वृहद स्तर पर पौधरोपण का अभियान चलाया गया। तहसील, नगर पालिका, वन विभाग, ब्लॉक आदि विभिन्न जगहों पर सरकारी अफसरों व जनप्रतिनिधियों ने पौधरोपण में बढ़ चढ़ कर हिस्सा भी लिया। लेकिन पौधे रोपने के अगले ही दिन उनकी हालत दयनीय दिखी। अधिकतर स्थानों पर सिंचाई के अभाव में पौधे सूख गए। कई स्थानों पर उनको पशु चट कर गए। उनकी सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं दिखे।
कागजों में दवा, हकीकत रही जुदा
जिले भर में मंगलवार को 50.80 लाख पौधे लगाने का दावा किया जा रहा है। हकीकत में अधिकांश स्थानों पर पौधों का रोपण नहीं हो सका। जिन विभागों को लक्ष्य दिए गए थे उन्होंने कुछ पौधे रोपकर कोरम पूरा कर दिया। प्रधानों को पौधरोपण करने के लिए जो पौधे दिए गए थे वह उनके दरवाजे पर ही रखे दिखाई दिए। हरियाली फैलाने का सरकार का सपना अलगे दिन ही टूटता दिखाई दिया। जबकि पौधरोपण की क्या तैयारी है, इसे देखने के लिए अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा ने एक दिन पहले ही तैयारियों का जायजा लिया था।
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प्रधानों के घर रखे दिखे पौधे
रामपुर मथुरा में बीडीओ के निर्देशन में चलाए गए अभियान के तहत 18 हजार 480 पौधे पंचायती विभाग व एक लाख सात हजार 459 पौधे मनरेगा के तहत लगवाने का लक्ष्य मिला था। प्रधानों को भी रोपाई के लिए पौधे दिए गये थे। जिसमें अधिकांश पौधे अब भी प्रधानों के दरवाजों पर रखे हैं। जितने पौधे की रोपाई पूरी होने का दावा किया जा रहा है वास्तव में उतने पौधे जमीन पर नहीं दिखे। सार्वजनिक स्थलों पर रोप गए पौधों की सुरक्षा मानक शून्य होने से उन्हें जानवर चट कर गए।
कागजों पर सिमटा पौधरोपण
महमूदाबाद इलाके में पौधों को लगाने के बाद न उनकी सिंचाई की गई और न जानवरों से उनकी सुरक्षा के लिए ट्रीगार्ड दिखे। हरियाली का दायरा बढ़ाने का लक्ष्य भी दम तोड़ता दिखा। संख्या के सापेक्ष यहां सिर्फ 20 से 30 प्रतिशत ही पौधे लगे पाए गए। कई दिनों से पौधरोपण की तैयारियां की जा रही थी लेकिन यह तैयारियां केवल कागजों पर ही दिखाई दी।
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जिले भर में बीते मंगलवार को वृहद स्तर पर पौधरोपण का अभियान चलाया गया। तहसील, नगर पालिका, वन विभाग, ब्लॉक आदि विभिन्न जगहों पर सरकारी अफसरों व जनप्रतिनिधियों ने पौधरोपण में बढ़ चढ़ कर हिस्सा भी लिया। लेकिन पौधे रोपने के अगले ही दिन उनकी हालत दयनीय दिखी। अधिकतर स्थानों पर सिंचाई के अभाव में पौधे सूख गए। कई स्थानों पर उनको पशु चट कर गए। उनकी सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं दिखे।
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कागजों में दवा, हकीकत रही जुदा
जिले भर में मंगलवार को 50.80 लाख पौधे लगाने का दावा किया जा रहा है। हकीकत में अधिकांश स्थानों पर पौधों का रोपण नहीं हो सका। जिन विभागों को लक्ष्य दिए गए थे उन्होंने कुछ पौधे रोपकर कोरम पूरा कर दिया। प्रधानों को पौधरोपण करने के लिए जो पौधे दिए गए थे वह उनके दरवाजे पर ही रखे दिखाई दिए। हरियाली फैलाने का सरकार का सपना अलगे दिन ही टूटता दिखाई दिया। जबकि पौधरोपण की क्या तैयारी है, इसे देखने के लिए अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा ने एक दिन पहले ही तैयारियों का जायजा लिया था।
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प्रधानों के घर रखे दिखे पौधे
रामपुर मथुरा में बीडीओ के निर्देशन में चलाए गए अभियान के तहत 18 हजार 480 पौधे पंचायती विभाग व एक लाख सात हजार 459 पौधे मनरेगा के तहत लगवाने का लक्ष्य मिला था। प्रधानों को भी रोपाई के लिए पौधे दिए गये थे। जिसमें अधिकांश पौधे अब भी प्रधानों के दरवाजों पर रखे हैं। जितने पौधे की रोपाई पूरी होने का दावा किया जा रहा है वास्तव में उतने पौधे जमीन पर नहीं दिखे। सार्वजनिक स्थलों पर रोप गए पौधों की सुरक्षा मानक शून्य होने से उन्हें जानवर चट कर गए।
कागजों पर सिमटा पौधरोपण
महमूदाबाद इलाके में पौधों को लगाने के बाद न उनकी सिंचाई की गई और न जानवरों से उनकी सुरक्षा के लिए ट्रीगार्ड दिखे। हरियाली का दायरा बढ़ाने का लक्ष्य भी दम तोड़ता दिखा। संख्या के सापेक्ष यहां सिर्फ 20 से 30 प्रतिशत ही पौधे लगे पाए गए। कई दिनों से पौधरोपण की तैयारियां की जा रही थी लेकिन यह तैयारियां केवल कागजों पर ही दिखाई दी।