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मरीजों को जल्द मिलेगी डायलिसिस की सुविधा
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सीतापुर। जिला अस्पताल आने वाले गुर्दे के गंभीर मरीजों को अब इलाज की बेहतर सुविधा मिलेगी। उन्हें डायलिसिस के लिए लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा। जिला अस्पताल में ही डायलिसिस की सुविधा का निशुल्क लाभ ले सकेंगे। इसके लिए अस्पताल में भवन बनकर तैयार हो गया है। मशीनों की आपूर्ति शुरू हो गई है। अब मशीनों को स्थापित करने का काम बाकी है। इससे उम्मीद है कि एक से दो माह के अंदर यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
जिला अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि जब गुर्दे खराब होने लगते हैं तो मरीजों को डायलिसिस कराने की जरूरत होती है। जिला अस्पताल में इन मरीजों को इलाज मिल जाता है लेकिन जब इनकी हालत गंभीर होती है तो चिकित्सक उन्हें डायलिसिस कराने की सलाह देते हैं। इसके लिए उन्हें लखनऊ रेफर किया जाता है। कई बार आर्थिक समस्या के चलते मरीज डायलिसिस नहीं करा पाते हैं। अब इन मरीजों को न तो लखनऊ जाना पड़ेगा और न ही उन्हें अपनी आर्थिक समस्या के कारण इलाज कराने में मुसीबत आएगी।
जिला अस्पताल में ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए एक नया भवन बनकर तैयार हो गया है। मशीनों की आपूर्ति शुरू हो गई है। यह यूनिट यहां पर प्राइवेट पार्टनरशिप के पैटर्न पर काम करेगी। इससे मरीजों को आसानी से इसका निशुल्क लाभ मिल सकेगा। इससे उम्मीद की जा रही है कि दो माह के अंदर यह यूनिट शुरू हो जाएगी। इससे रोजाना 10 से 15 गुर्दे के मरीजों को अस्पताल में ही डायलिसिस का लाभ मिलने लगेगा।
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डायलिसिस की क्यों पड़ती जरूरत
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह बताते है कि डायलिसिस एक तरह से शरीर की सफाई होती है। शरीर की गंदगी गुर्दे के जरिए फिल्टर होकर बाहर निकलती है। अगर गुर्दे सही तरीके से काम नहीं करते है तो शरीर में यूरिया बढ़ने लगती है। सूजन आ जाती है। अन्य समस्याएं पैदा हो जाती है। तब मरीजों को डायलिसिस कराने की जरूरत होती है।
इस समय ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अगर यह यूनिट लग जाएगी तो मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी। डॉ. जेएन सिंह का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय दर्द निवारक दवाएं खा रहे है, शराब का अधिक सेवन कर रहे है, मधुमेह की बीमारी से परेशान है। इन बीमारियों में लीवर, गुर्दे व किडनी में समस्या आ जाती है। इससे गुर्दा प्रभावित हो जाता है तो मरीजों को डायलिसिस के अलाव कोई दूसरा उपचार नहीं बचता है।
प्राइवेट में छह हजार तक आता खर्च
चिकित्सकों का कहना है कि डायलिसिस कराने के लिए लखनऊ में प्राइवेट अस्पताल एक बार डायलिसिस का पांच से छह हजार रुपये लेते हैं। ये मरीज की हालत पर निर्भर करता है, उसको कितनी बार डायलिसिस की जरूरत है। कई बार मरीज इतने अधिक गंभीर हो जाते हैं कि उनको जीवन भर डायलिसिस कराने की जरूरत होती है।
जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट जल्द शुरू हो जाएगी। यहां पर मशीनें आनी शुरू हो गई है। यूनिट को जल्द शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. आरके सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि जब गुर्दे खराब होने लगते हैं तो मरीजों को डायलिसिस कराने की जरूरत होती है। जिला अस्पताल में इन मरीजों को इलाज मिल जाता है लेकिन जब इनकी हालत गंभीर होती है तो चिकित्सक उन्हें डायलिसिस कराने की सलाह देते हैं। इसके लिए उन्हें लखनऊ रेफर किया जाता है। कई बार आर्थिक समस्या के चलते मरीज डायलिसिस नहीं करा पाते हैं। अब इन मरीजों को न तो लखनऊ जाना पड़ेगा और न ही उन्हें अपनी आर्थिक समस्या के कारण इलाज कराने में मुसीबत आएगी।
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जिला अस्पताल में ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए एक नया भवन बनकर तैयार हो गया है। मशीनों की आपूर्ति शुरू हो गई है। यह यूनिट यहां पर प्राइवेट पार्टनरशिप के पैटर्न पर काम करेगी। इससे मरीजों को आसानी से इसका निशुल्क लाभ मिल सकेगा। इससे उम्मीद की जा रही है कि दो माह के अंदर यह यूनिट शुरू हो जाएगी। इससे रोजाना 10 से 15 गुर्दे के मरीजों को अस्पताल में ही डायलिसिस का लाभ मिलने लगेगा।
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डायलिसिस की क्यों पड़ती जरूरत
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह बताते है कि डायलिसिस एक तरह से शरीर की सफाई होती है। शरीर की गंदगी गुर्दे के जरिए फिल्टर होकर बाहर निकलती है। अगर गुर्दे सही तरीके से काम नहीं करते है तो शरीर में यूरिया बढ़ने लगती है। सूजन आ जाती है। अन्य समस्याएं पैदा हो जाती है। तब मरीजों को डायलिसिस कराने की जरूरत होती है।
इस समय ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अगर यह यूनिट लग जाएगी तो मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी। डॉ. जेएन सिंह का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय दर्द निवारक दवाएं खा रहे है, शराब का अधिक सेवन कर रहे है, मधुमेह की बीमारी से परेशान है। इन बीमारियों में लीवर, गुर्दे व किडनी में समस्या आ जाती है। इससे गुर्दा प्रभावित हो जाता है तो मरीजों को डायलिसिस के अलाव कोई दूसरा उपचार नहीं बचता है।
प्राइवेट में छह हजार तक आता खर्च
चिकित्सकों का कहना है कि डायलिसिस कराने के लिए लखनऊ में प्राइवेट अस्पताल एक बार डायलिसिस का पांच से छह हजार रुपये लेते हैं। ये मरीज की हालत पर निर्भर करता है, उसको कितनी बार डायलिसिस की जरूरत है। कई बार मरीज इतने अधिक गंभीर हो जाते हैं कि उनको जीवन भर डायलिसिस कराने की जरूरत होती है।
जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट जल्द शुरू हो जाएगी। यहां पर मशीनें आनी शुरू हो गई है। यूनिट को जल्द शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. आरके सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल