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पांच संस्कृत विद्यालयों में नहीं कोई शिक्षक
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सीतापुर में श्री जवाहर सिंह संस्कृत महाविद्यालय कमलापुर। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। जिले में देव वाणी अपने अंतिम पायदान पर सांसें गिन रही है। शासन-प्रशासन की बेरुखी के कारण जिले में पांच संस्कृत कॉलेज केवल कागजों पर ही सीमित होकर रह गए हैं। इन कॉलेजों में न तो शिक्षक हैं, न ही विद्यार्थी। बचे आठ कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है। हालात इतने खराब हैं कि स्वीकृत 42 में महज सात ही शिक्षक कार्यरत हैं। इन शिक्षकों पर ही जिले में संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने का जिम्मा है।
संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए जिले में 13 अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत कॉलेज संचालित हैं। इन कॉलेज में प्रधानाचार्य व शिक्षक के पद स्वीकृत हैं। इन कॉलेजों में शिक्षक समय के साथ सेवानिवृत्त होते गए। प्रदेश की सरकारों ने इन कॉलेजों की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। इसकी वजह से यहां पर कोई नई भर्ती नहीं हो सकी।
जब इन कॉलेजों से शिक्षक धीरे-धीरे सेवानिवृत्त के बाद गायब होने लगे तो विद्यार्थियों ने भी इनकी तरफ से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया। अब ये कॉलेज अपनी पहचान बचाने के लिए अंतिम सांसें गिन रहे हैं। इन कॉलेजों के भवन जर्जर हो चुके हैं। शिक्षकों की भारी कमी हैं। यानी केवल कागजों पर ही ये कॉलेज चल रहे हैं। पांच कॉलेज तो ऐसे हैं, जहां पर एक भी शिक्षक नहीं है, न ही कोई विद्यार्थी बचे है।
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आठ कॉलेजों में इस समय पढ़ाई हो रही है। वहां पर भी एक या दो शिक्षकों के सहारे पढ़ाई कराई जा रही है। ऐसे में जिले के विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा की पढ़ाई करने के पर्याप्त संसाधन नहीं मिल रहे हैं। इस वजह से विद्यार्थी भी अब इस भाषा से मुंह मोड़ रहे हैं। पूरे जिले के 13 कॉलेजों में 42 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें केवल सात ही शिक्षक कार्यरत हैं। 13 प्रधानाचार्यों में सिर्फ एक ही प्रधानाचार्य की सेवाएं मिल रही हैं। 13 कॉलेजों में पांच महाविद्यालय भी शामिल हैं, जिनमें इंटर के बाद की पढ़ाई होती है।
यह है विद्यालयवार स्थिति
विद्यालय विद्यार्थी शिक्षक
वेद व्यास संस्कृत महाविद्यालय नैमिषारण्य 123 3
अनंत श्री वासुदेव संस्कृत महाविद्यालय नैमिष 248 1
श्री जवाहर सिंह संस्कृत महाविद्यालय कमलापुर 0 0
श्री मोहनदास गुरूकुल संस्कृत महाविद्यालय गोपालघाट 10 0
सरस्वती आदर्श संस्कृत महाविद्यालय खैराबाद 5 0
श्रीमती गंगा देवी त्रिपाठी, संस्कृत विद्यालय इंद्रौली 61 1
श्रीराम संस्कृत विद्यालय सरोसा 50 1
श्री ललिता देवी ऋषिकुल विद्यालय नैमिष 51 0
श्री राजेंद्रपुरी संस्कृत विद्यालय चकदहा 57 2
सनातन धर्म संस्कृत विद्यालय बिसवां 0 0
श्री केनयूनियन संस्कृत विद्यालय हरगांव तीर्थ 0 0
श्री जनता संस्कृत विद्यालय धनपुरिया 0 0
श्री बागीश्वर संस्कृत विद्यालय बगचन चतुरैया 0 0
संस्कृत महाविद्यालयों के भवन भी जर्जर
संस्कृत कॉलेजों की दशा दिन प्रतिदिन खराब ही होती जा रही है। इन विद्यालयों में एक तो स्टाफ नहीं बचा है। वहीं, इनकी बिल्डिंग भी जर्जर हो गई है। डीआईओएस की रिपोर्ट के मुताबिक जवाहर सिंह महाविद्यालय के दो कमरे जर्जर है। मोहनदास गुरूकुल विद्यालय के सभी दो कमरे जर्जर हो चुके है।
सरस्वती आदर्श संस्कृत महाविद्यालय खैराबाद के सभी चार कमरे पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। श्रीमती गंगादेवी त्रिपाठी संस्कृत विद्यालय के सभी तीन कमरे जर्जर है। रामलाल विद्यालय सरोसा, सनातन धर्म संस्कृत विद्यालय बिसवां, केन यूनियन संस्कृत विद्यालय हरगांव तीर्थ व जनता विद्यालय व बागीश्वर संस्कृत विद्यालयों के पूरे भवन जर्जर हो गए हैं।
आजादी के पहले से संचालित है श्री जवाहर महाविद्यालय
जिले में संस्कृत की अलख आजादी के पहले से जलाई जा रही है। जिले में विद्यालयों के स्थापना काल की बात की जाए तो सबसे पुराना कॉलेज श्री जवाहर सिंह संस्कृत महाविद्यालय है। यह 1902 से संचालित है। उसके बाद दूसरे नंबर पर श्री वेद व्यास संस्कृत महाविद्यालय नैमिषारण्य है। यह 1904 से चल रहा है।
इसके बाद अनंत श्री वासुदेव 1972, श्री मोहनदास गुरूकुल 1965, सरस्वती आदर्श संस्कृत महाविद्यालय 1960, गंगादेवी त्रिपाठी इंद्रौली 1976, श्रीरामलाल संस्कृत विद्यालय सरोसा 1950, श्री ललिता देवी ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय नैमिष 1975, राजेंद्र पुरी विद्यालय 1956, सनातन धर्म बिसवां 1964, केन यूनियन हरगांव तीर्थ 1975, जनता संस्कृत विद्यालय धनपुरिया 1962 व बागीश्वर विद्यालय बगचन चतुरैया 1950 से जिले में चल रहे हैं।
बेहतर पढ़ाई का हो रहा है प्रयास
शासन के निर्देश पर चार विद्यालयों में हाल ही में अस्थाई तरीके से चार शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। मौजूदा संसाधनों से बेहतर तरीके से पढ़ाई कराने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. देवी सहाय तिवारी, डीआईओएस
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संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए जिले में 13 अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत कॉलेज संचालित हैं। इन कॉलेज में प्रधानाचार्य व शिक्षक के पद स्वीकृत हैं। इन कॉलेजों में शिक्षक समय के साथ सेवानिवृत्त होते गए। प्रदेश की सरकारों ने इन कॉलेजों की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। इसकी वजह से यहां पर कोई नई भर्ती नहीं हो सकी।
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जब इन कॉलेजों से शिक्षक धीरे-धीरे सेवानिवृत्त के बाद गायब होने लगे तो विद्यार्थियों ने भी इनकी तरफ से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया। अब ये कॉलेज अपनी पहचान बचाने के लिए अंतिम सांसें गिन रहे हैं। इन कॉलेजों के भवन जर्जर हो चुके हैं। शिक्षकों की भारी कमी हैं। यानी केवल कागजों पर ही ये कॉलेज चल रहे हैं। पांच कॉलेज तो ऐसे हैं, जहां पर एक भी शिक्षक नहीं है, न ही कोई विद्यार्थी बचे है।
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आठ कॉलेजों में इस समय पढ़ाई हो रही है। वहां पर भी एक या दो शिक्षकों के सहारे पढ़ाई कराई जा रही है। ऐसे में जिले के विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा की पढ़ाई करने के पर्याप्त संसाधन नहीं मिल रहे हैं। इस वजह से विद्यार्थी भी अब इस भाषा से मुंह मोड़ रहे हैं। पूरे जिले के 13 कॉलेजों में 42 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें केवल सात ही शिक्षक कार्यरत हैं। 13 प्रधानाचार्यों में सिर्फ एक ही प्रधानाचार्य की सेवाएं मिल रही हैं। 13 कॉलेजों में पांच महाविद्यालय भी शामिल हैं, जिनमें इंटर के बाद की पढ़ाई होती है।
यह है विद्यालयवार स्थिति
विद्यालय विद्यार्थी शिक्षक
वेद व्यास संस्कृत महाविद्यालय नैमिषारण्य 123 3
अनंत श्री वासुदेव संस्कृत महाविद्यालय नैमिष 248 1
श्री जवाहर सिंह संस्कृत महाविद्यालय कमलापुर 0 0
श्री मोहनदास गुरूकुल संस्कृत महाविद्यालय गोपालघाट 10 0
सरस्वती आदर्श संस्कृत महाविद्यालय खैराबाद 5 0
श्रीमती गंगा देवी त्रिपाठी, संस्कृत विद्यालय इंद्रौली 61 1
श्रीराम संस्कृत विद्यालय सरोसा 50 1
श्री ललिता देवी ऋषिकुल विद्यालय नैमिष 51 0
श्री राजेंद्रपुरी संस्कृत विद्यालय चकदहा 57 2
सनातन धर्म संस्कृत विद्यालय बिसवां 0 0
श्री केनयूनियन संस्कृत विद्यालय हरगांव तीर्थ 0 0
श्री जनता संस्कृत विद्यालय धनपुरिया 0 0
श्री बागीश्वर संस्कृत विद्यालय बगचन चतुरैया 0 0
संस्कृत महाविद्यालयों के भवन भी जर्जर
संस्कृत कॉलेजों की दशा दिन प्रतिदिन खराब ही होती जा रही है। इन विद्यालयों में एक तो स्टाफ नहीं बचा है। वहीं, इनकी बिल्डिंग भी जर्जर हो गई है। डीआईओएस की रिपोर्ट के मुताबिक जवाहर सिंह महाविद्यालय के दो कमरे जर्जर है। मोहनदास गुरूकुल विद्यालय के सभी दो कमरे जर्जर हो चुके है।
सरस्वती आदर्श संस्कृत महाविद्यालय खैराबाद के सभी चार कमरे पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। श्रीमती गंगादेवी त्रिपाठी संस्कृत विद्यालय के सभी तीन कमरे जर्जर है। रामलाल विद्यालय सरोसा, सनातन धर्म संस्कृत विद्यालय बिसवां, केन यूनियन संस्कृत विद्यालय हरगांव तीर्थ व जनता विद्यालय व बागीश्वर संस्कृत विद्यालयों के पूरे भवन जर्जर हो गए हैं।
आजादी के पहले से संचालित है श्री जवाहर महाविद्यालय
जिले में संस्कृत की अलख आजादी के पहले से जलाई जा रही है। जिले में विद्यालयों के स्थापना काल की बात की जाए तो सबसे पुराना कॉलेज श्री जवाहर सिंह संस्कृत महाविद्यालय है। यह 1902 से संचालित है। उसके बाद दूसरे नंबर पर श्री वेद व्यास संस्कृत महाविद्यालय नैमिषारण्य है। यह 1904 से चल रहा है।
इसके बाद अनंत श्री वासुदेव 1972, श्री मोहनदास गुरूकुल 1965, सरस्वती आदर्श संस्कृत महाविद्यालय 1960, गंगादेवी त्रिपाठी इंद्रौली 1976, श्रीरामलाल संस्कृत विद्यालय सरोसा 1950, श्री ललिता देवी ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय नैमिष 1975, राजेंद्र पुरी विद्यालय 1956, सनातन धर्म बिसवां 1964, केन यूनियन हरगांव तीर्थ 1975, जनता संस्कृत विद्यालय धनपुरिया 1962 व बागीश्वर विद्यालय बगचन चतुरैया 1950 से जिले में चल रहे हैं।
बेहतर पढ़ाई का हो रहा है प्रयास
शासन के निर्देश पर चार विद्यालयों में हाल ही में अस्थाई तरीके से चार शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। मौजूदा संसाधनों से बेहतर तरीके से पढ़ाई कराने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. देवी सहाय तिवारी, डीआईओएस