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इतिहास बनकर रह जाएंगी मीटर गेज ट्रेनें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 14 May 2016 10:33 PM IST
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कमलापुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के चालक को माला पहनाते स्थानीय लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बदस्तूर 130 सालों से सीतापुर-लखनऊ के बीच मुसाफिरों को सुहाना सफर कराने वाली छोटी लाइन की ट्रेनों ने शनिवार को अपने आखिरी सफर तय किए। मीटर गेज की ये ट्रेनें अब सपना बनकर इतिहास में दर्ज होंगी। इन्हें विदाई देने के लिए शनिवार को लोग रेलवे स्टेशन पहुंचे।
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चालक व गार्ड को माला पहनाया। मुंह मीठा कराया। गहमागहमी के साथ हाथ हिलाकर छोटी लाइन की ट्रेनों के आखिरी सफर को अलविदा कहा। इस रूट पर नैनीताल एक्सप्रेस के भी आखिरी सफर के लोग गवाह बने। अब करीब छह तक माह सीतापुर में छुक-छुक नहीं सुनाई पड़ेगी।
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पूर्वोत्तर रेलवे ने सन् 1886 में सीतापुर-लखनऊ के बीच पहली मीटर गेज ट्रेन चलाई। जिसके बाद इस रूट पर हजारों मुसाफिरों के लिए ये ट्रेनें आवागमन का प्रमुख जरिया बन गईं। सस्ती व सुलभ यात्रा के लिए लोग इनका सहारा लेने लगे। आमान परिवर्तन की कवायद शुरू होने के बाद से इस रूट पर ट्रेनों का संचालन बंद करने का मसला पिछले कई वर्षों से मुंह बाएं खड़ा रहा।
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आखिरकार सरकार ने 14 मई 2016 की मध्यरात्रि से सीतापुर-लखनऊ के बीच मीटर गेज ट्रेनों का संचालन बंद करने का एलान कर दिया। अब यहां बड़ी लाइन बिछाई जाएगी। इस रूट पर पिछले 130 सालों से छुक-छुक कर दौड़ रही छोटी लाइन की ट्रेनों ने शनिवार को अपने आखिरी सफर तय किए। मीटर गेज ट्रेनों को विदाई देने को भारी तादाद में लोग स्टेशन पहुंचे। जिसके चलते सीतापुर से लखनऊ के तकरीबन सभी रेलवे स्टेशनों पर गहमागहमी बनी रही।
कमलापुर में छोटी लाइन की ट्रेन को विदाई देने पहुंचे लोग
कमलापुर रेलवे स्टेशन पर युवा और बच्चे छोटी लाइन की ट्रेन को भावपूर्ण विदाई देने के अलावा इनके आखिरी सफर का साक्षी बनने पहुंचे। इस दौरान लोगों ने 52244 डाउन पैसेंजर ट्रेन के चालक व गार्ड को माला पहनाकर मिठाई खिलाई। जिसके बाद इतिहास में दर्ज होने जा रही छोटी लाइन की ट्रेन के साथ फोटो खिंचवाई। ट्रेन के हाॅर्न देते ही लोगों ने हाथ हिलाकर उसे विदाई दी। इस मौके पर अमित मिश्रा, अनुराग, रामचंदर चौधरी, सत्यदेव शुक्ल, अंशू, मधुकृष्ण पांडेय आदि मौजूद थे।
सेल्फी लेने से भी नहीं चूके
कमलापुर रेलवे स्टेशन पर छोटी लाइन की ट्रेन को विदाई देने पहुंचे लोगों में सेल्फी का क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा था। ट्रेन जब तक यहां रुकी, लोग सेल्फी लेकर इस यादगार पल को मोबाइल में कैद करते दिखे।
1986 को चली थी पहली मीटर गेज ट्रेन
पूर्वोत्तर रेलवे का गठन आजादी के बाद 14 अप्रैल 1952 में हुआ। इस रूट पर रेलों का संचालन सबसे पहले रुहेलखंड और कुंमाऊ रेल कंपनी द्वारा किया गया। 15 नवंबर सन् 1986 को लखनऊ से सीतापुर के बीच पहली मीटर गेज ट्रेन चली थी।
ट्रेन से जुड़ी हैं तमाम खट्टी-मीठी यादें
कमलापुर निवासी करन सिंह बख्शी का तालाब के चंद्रभाल गुप्त कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्र हैं। करन ने हाईस्कूल के बाद इसी कॉलेज में एडमिशन लिया था। पिछले छह सालों से वह ट्रेन से ही अप-डाउन करते आ रहे हैं। वह बताते हैं, कि इस लंबे अरसे में ट्रेनों से एक जुड़ाव हो गया है। बहुत सी खट्टी-मीठी यादें जुड़ी हैं। अब लखनऊ में रहकर पढ़ना पड़ेगा।
ट्रेनें बंद होने से रोडवेज बसों पर बढ़ेगा दबाव
छोटी लाइन ट्रेनों का संचालन बंद होने से अब रोडवेज बसों पर यात्रियों का दबाव बढ़ जाएगा। अनुमान के मुताबिक सीतापुर से लखनऊ के बीच छह से आठ हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। यात्रियों को आवागमन में दिक्कतें न उठानी पड़ें, इसके लिए रोडवेज ने कमर कस ली है। अभी तक दूसरे रूटों पर दौड़ रहीं 28 बसों को भी सीतापुर-लखनऊ रूट पर लगाया गया है।