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36 गांवों में सिर्फ तीन घंटे विद्युत आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Sun, 06 Sep 2015 10:56 PM IST
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पावर कॉर्पोरेशन की लापरवाह कार्यशैली से ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को अघोषित बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है। आए दिन तकनीकी खराबी के नाम पर विद्युत आपूर्ति ठप कर दी जाती है। भीषण कटौती का यह आलम है, कि करीब 36 गांवों को 24 घंटे में तीन घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इस दौरान भी ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है।
बाड़ी, अलादादपुर, मुरहाडीह, गनीपुर, फिरोजपुर, मढ़िया, सहोली समेत 36 गांवों में सुचारु विद्युत आपूर्ति नहीं की जा रही है। रोस्टर के अनुसार विद्युत आपूर्ति न होने से लोग परेशान हैं। क्षेत्र के छोटे उद्योग धंधों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। उपभोक्ता नफीस सिद्दीकी, राजेश कुमार, विजय रावत ने बताया कि इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति का रोस्टर रात 12:30 से सुबह 10 बजे तक का निर्धारित है, लेकिन जर्जर विद्युत लाइन व उपकरणों की खराबी की वजह से आपूर्ति में आए दिन बाधा आती रहती है। उपभोक्ता नौशाद, अजीज व दर्शन लाल के मुताबिक कस्बा बाड़ी में करीब एक हजार घरेलू व आठ पावर कनेक्शन हैं। ज्यादातर बिल टाउन के हिसाब से आते हैं, जबकि आपूर्ति के लिए ग्रामीण रोस्टर लागू है। इसमें भी तार टूटने, फेस उड़ने, ट्रॉली जलने जैसी समस्याओं का बहाना बनाकर भीषण कटौती की जाती है। रोस्टर तो महज दिखावा बनकर रह गया है। बिजली आने व जाने का कोई समय निश्चित नहीं है। घरों में मौजूद इलेक्ट्रिक उपकरण शोपीस बन गए हैं। अघोषित कटौती से त्रस्त उपभोक्ताओं ने छह घंटे दिन व छह घंटे रात में बिजली आपूर्ति की मांग की है।
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बाड़ी, अलादादपुर, मुरहाडीह, गनीपुर, फिरोजपुर, मढ़िया, सहोली समेत 36 गांवों में सुचारु विद्युत आपूर्ति नहीं की जा रही है। रोस्टर के अनुसार विद्युत आपूर्ति न होने से लोग परेशान हैं। क्षेत्र के छोटे उद्योग धंधों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। उपभोक्ता नफीस सिद्दीकी, राजेश कुमार, विजय रावत ने बताया कि इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति का रोस्टर रात 12:30 से सुबह 10 बजे तक का निर्धारित है, लेकिन जर्जर विद्युत लाइन व उपकरणों की खराबी की वजह से आपूर्ति में आए दिन बाधा आती रहती है। उपभोक्ता नौशाद, अजीज व दर्शन लाल के मुताबिक कस्बा बाड़ी में करीब एक हजार घरेलू व आठ पावर कनेक्शन हैं। ज्यादातर बिल टाउन के हिसाब से आते हैं, जबकि आपूर्ति के लिए ग्रामीण रोस्टर लागू है। इसमें भी तार टूटने, फेस उड़ने, ट्रॉली जलने जैसी समस्याओं का बहाना बनाकर भीषण कटौती की जाती है। रोस्टर तो महज दिखावा बनकर रह गया है। बिजली आने व जाने का कोई समय निश्चित नहीं है। घरों में मौजूद इलेक्ट्रिक उपकरण शोपीस बन गए हैं। अघोषित कटौती से त्रस्त उपभोक्ताओं ने छह घंटे दिन व छह घंटे रात में बिजली आपूर्ति की मांग की है।
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