फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Imambada is the example of the finest work lost.

वजूद खो रहा बेहतरीन कारीगरी की मिसाल बना इमामबाड़ा

Fri, 14 Apr 2017 10:52 PM IST
Amarujala Bureau
Amarujala Bureau Updated Fri, 14 Apr 2017 10:52 PM IST
विज्ञापन
Imambada is the example of the finest work lost.
- फोटो : amar ujala

जिले का इतिहास बेमिसाल ऐतिहासिक धरोहर संजोए है। इनमें से एक खैराबाद का ‘इमामबाड़ा’ है। इस इमामबाड़े का निर्माण लखनऊ के प्रसिद्ध इमामबाड़े की तर्ज पर कराया गया था। इसमें एक भूलभुलैया भी है।

विज्ञापन


इस बेशकीमती धरोहर को सहेजकर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। लेकिन पर्यटन स्थल बनाए जाने की बात तो दूर शासन-प्रशासन की अनदेखी से अब यह धरोहर अपना वजूद बचाने की कोशिश में है।
विज्ञापन


बेहतरीन नक्काशी की बेजोड़ मिसाल इस इमामबाडे़ का निर्माण नवाब आसिफुद्दौला ने सन 1838 में कराया गया था। बुजुर्ग बताते हैं कि नवाब साहब ने अपनी शेरवानी व टोपी की बेहतरीन सिलाई से खुश होकर ‘मक्का दर्जी’ के लिए यह इमामबाड़ा बनवाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


दरअसल, नवाब एक शेरवानी सिलवाना चाहते थे। जिस कपड़े की वह शेरवानी सिलवाना चाहते थे, उसमें कपड़ा जरूरत से कुछ कम था। इसके अलावा उसमें एक गुलाब का फूल कढ़ा हुआ था। नवाब साहब की इच्छा थी, कि शेरवानी इस तरह सिली जाए कि गुलाब का फूल दिल के पास आए।

कई दर्जियों को बुलाया गया, लेकिन कम कपड़े और नवाब साहब की ख्वाहिश देख किसी ने हामी नहीं भरी। उन दिनों खैराबाद में मक्का दर्जी बेहतरीन सिलाई के लिए मशहूर थे। नवाब साहब के सेवक मक्का दर्जी को उनके पास लेकर गए।

मक्का दर्जी ने शेरवानी सिलने की हामी भर दी। बताते हैं, कि मक्का दर्जी ने नवाब साहब के मन-मुताबिक शेरवानी सिली और कम कपड़े के बावजूद उसी कपड़े में से एक टोपी भी बना दी। जिससे खुश होकर नवाब ने मक्का दर्जी से ईनाम मांगने को कहा। मक्का दर्जी ने लखनऊ के इमामबाड़े व भूलभुलैया की तर्ज पर एक इमामबाड़ा और भूलभुलैया खैराबाद में बनवाए जाने की इच्छा जताई।

जिसके बाद नवाब आसिफुद्दौला ने यह इमामबाड़ा बनवाया था। अनूठी कलाकारी की झलक पेश करती यह ऐतिहासिक इमारत आज बदहाल है। वहीं उपेक्षा से बदहाल होती जा रही भूलभुलैया को अब बंद कर दिया गया है।

देश में पर्यटन को बढ़ावा देने तथा ऐतिहासिक इमारतों को सहेजने की अलख जगाने के लिए 18 अप्रैल को ‘विश्व धरोहर दिवस’ मनाया जाता है। पर जिले में यह आयोजन बेमानी साबित हो रहा है।


आलम यह है, कि आज खैराबाद का इमामबाड़ा खंडहर में तब्दील होने लगा है। लिहाजा, आने वाली पीढ़ी ‘इमामबाड़े’ का इतिहास भूलती जा रही है। इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज खैराबाद का इमामबाड़ा आज अपना अस्तित्व बचाने की कोशिश में है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed