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ऑनलाइन टैक्स जमा करना दूर की कौड़ी

Thu, 23 Jun 2022 12:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jun 2022 12:12 AM IST
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house Tax
सीतापुर। सरकार के तमाम प्रयास भी सीतापुर नगर पालिका को हाईटेक नहीं कर पा रहे है। अफसर व कर्मचारी इसमें रोड़ा बने हुए है। शहर के प्रत्येक मकान स्वामी को यूनिक आईडी देने की व्यवस्था फेल होती नजर आ रही है। करीब छह माह की कवायद के बाद महज एक हजार मकानों का ही सत्यापन हो सका है। जबकि अन्य 30 हजार मकान स्वामियों का सत्यापन न होने से वह यूनिक आईडी का इंतजार कर रहे है। इसकी वजह से वह मैनुअल तरीके से टैक्स जमा करने के लिए नगर पालिका के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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नगर पालिका सीतापुर के बाशिंदें अभी तक नगर पालिका जाकर ही अपना टैक्स जमा कर रहे है। इस पर नगर पालिका ने ऑनलाइन टैक्स जमा करने की कवायद शुरू की थी। एक कंपनी की तरफ से पूरे शहर के मकानों का सर्वे कराया गया था। इस सर्वे को कंपनी ने ऑनलाइन फीड कर दिया। नगर पालिका इस सर्वे का सत्यापन करेगी। उसके बाद हाउस व जलकर टैक्स का निर्धारण हो सकेगा। फिर मकान मालिक को यूनिक आईडी आवंटित कर दी जाएगी।
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इस आईडी के आधार पर ही ऑनलाइन टैक्स जमा करने की सुविधा मिलेगी। यह पूरी कवायद शहर में जल्द पूरी होती नहीं दिख रही है। करीब छह माह बीत जाने के बाद अभी तक महज एक हजार मकानों का ही सत्यापन हो सका है। 30 हजार मकान स्वामियों का सत्यापन लटका हुआ है। इसकी वजह से यह अपना टैक्स ऑनलाइन नहीं जमा कर पा रहे है। वह नगर पालिका की भागदौड़ करके ही टैक्स जमा करते है।
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नगर पालिका सीतापुर में हैं 31 हजार मकान
नगर पालिका सीतापुर में पहले 24 हजार मकान थे। इनसे प्रति वर्ष करीब 2.90 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता था। अब जब नगर पालिका का दायरा बढ़ा तो नये सिरे से सर्वे किया गया है, जिसमें 31 हजार मकान सामने आए है। इनसे करीब 38 करोड़ प्रति वर्ष राजस्व आने की उम्मीद है। जब मकानों के सत्यापन नहीं हो पा रहे है तो प्रक्रिया भी बाधित चल रही है।
इसकी वजह से एक तो मकान मालिक परेशान हैं वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर यह प्रक्रिया पूरी हो जाए तो काफी हद तक नगर पालिका की आय की स्थिति सुधर सकती है।
बजट न मिलने से दिक्कत
नगर पालिका प्रशासन के मुताबिक अब शासन की तरफ से बजट मिलने से पहले यह जानकारी ली जाती है कि पहले से चल रही योजनाओं की क्या प्रगति है। कितना राजस्व प्राप्त हो रहा है। उसी आधार पर अन्य योजनाओं का बजट मिलता है। जब मकानों के सत्यापन नहीं हो पा रहे है तो इससे राजस्व का नुकसान हो रहा है। जिसकी वजह से विकास कार्यों के लिए भरपूर बजट नहीं मिल पा रहा है।

मनमाने लगाए है रेट
स्वकर प्रणाली लागू होने के बाद शहर के तमाम लोगों के मनमाने तरीके से टैक्स का निर्धारण कर दिया गया है। किसी के घर में तीन कमरे तो पांच कमरे फीड कर दिए गए है। रोजाना तमाम लोग नगर पालिका पहुंच रहे है, वह अपने टैक्स के बारे में जानकारी करते है तो पहले से कई गुना टैक्स मिलता है। इसको सुधरवाने के लिए वह भागदौड़ कर रहे है। बाशिंदों का कहना है कि अगर यूनिक आईडी बना दी जाए तो आसानी से अपने घर का टैक्स जान सकते है। लेकिन नगर पालिका में यह सुविधा न मिलने से बार-बार दौड़कर यहां पर आना पड़ रहा है।
स्वकर प्रणाली लागू हो गई है। ऑनलाइन टैक्स जमा करने के लिए एक काउंटर बनाया गया है। मकानों के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है।
- वैभव त्रिपाठी, ईओ
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