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इटौंजा सड़क हादसा: एक झटके में बिखर गई गृहस्थी... बच्चे बेहाल, मम्मी कहां गईं, उन्हें बुलाओ, तभी खाना खाएंगे
Thu, 29 Sep 2022 02:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अटरिया (सीतापुर)
संवाद न्यूज एजेंसी, अटरिया (सीतापुर)
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2022 02:36 PM IST
सार
इटौंजा में हुआ दर्दनाक हादसा न भरने वाले जख्म दे गया है। कई परिवार उजड़ गए हैं। हादसे में आठ परिवारों ने अपनों को खो दिया।
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टिकौली में बच्चों के साथ खड़े पिता रामखेलावन।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
रामखेलावन की तो जैसे दुनिया ही उजड़ गई। उसकी समझ में नहीं आ रहा कि एक झटके में बिखर गई गृहस्थी को कैसे संभालें। रामखेलावन ने बताया कि दिन तो किसी तरह कट जाता है, रात में बच्चे मां के बारे में सवाल करते हैं। मम्मी कहां गई, उन्हें बुलाओ तभी खाना खाएंगे। बिलखते बच्चों के इन सवालों और जिद का उसके पास कोई जवाब नहीं होता।
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इटौंजा के गद्दिनपुरवा में सोमवार को हुए हादसे में टिकौली की आठ महिलाएं और दो बच्चियों की जान चली गई। हादसे में आठ परिवारों ने अपनों को खो दिया। किसी की मां, किसी की पत्नी तो किसी की बहन बिछड़ गई। बड़े तो किसी तरह खुद को संभाल रहे हैं लेकिन बच्चों को समझाना व दिलासा देना मुश्किल है।
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रामखेलावन और चुन्नीलाल के परिवार में बच्चे मम्मी को यादकर बिलखना शुरू करते हैं। उन्हें चुप कराना दुश्वार हो जाता है। रामखेलावन ने पत्नी सुनीला को खोया है। एक पैर से दिव्यांग रामखेलावन की गृहस्थी को सुनीला ही संभालती थी। खेती-किसानी में भी सुनीला पति का हाथ बंटाती थी।
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दिव्यांग रामखेलावन के जीवन में सुनीला सिर्फ उसकी पत्नी भर नहीं एक मजबूत सहारा थी। मकान भले कच्चा है, लेकिन उसमें रामखेलावन के तीन बच्चों समेत पांच लोग हंसी खुशी जीवन बिता रहे थे। अंतिम संस्कार के अगले दिन बुधवार को अमर उजाला टीम टिकौली गांव पहुंची तो अपने घर के सामने दिव्यांग रामखेलावन गुमसुम बैठा था। पास ही उसकी बड़ी बेटी पारुल (12), बेटा विजय (8) तथा सबसे छोटी बेटी रितु (4) बैठी थी।
कब तक झूठ बोलकर बच्चों को बहलाएंगे
आंसुओं के सैलाब को आंखों में समेटे रामखेलावन बोले कि आज रात बच्चों को कैसे बहलाऊंगा, कब तक झूठ बोलकर उन्हें दिलासा देता रहूंगा। यह कहकर रामखेलावन की आवाज भर्राने लगी और आंखों में आंसू डबडबा आए। इसके बाद उससे कुछ भी बात करने की हिम्मत नहीं पड़ी।
बस इतना समझ आया कि किसी का दर्द महसूस तो किया जा सकता है, लेकिन चाहकर भी बांटा नहीं जा सकता। इसके बाद हम चुन्नीलाल के दरवाजे पर पहुंचे। वहां प्रधान अखिलेश कुमार के अलावा चार-पांच अन्य लोग बैठे थे। हादसे की चर्चा के बीच लोग चुन्नीलाल को दिलासा दे रहे थे। चुन्नीलाल ने अपनी पत्नी व बेटी को खो दिया। अब परिवार में बेटा अर्पित (12) तथा आशुतोष (8) की जिम्मेदारी उसे ही संभालनी है। चुन्नीलाल ने बताया कि बच्चे रात में उठकर मां के लिए रोने लगते हैं। उन्हें बहलाना मुश्किल हो जाता है।
लेखपाल को दिया गया खाता नंबर
हादसे में जाल गंवाने वालों के परिवार को मुख्यमंत्री ने चार लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया था। सोमवार सुबह हादसे के बाद देर शाम शव गांव पहुंचे थे। मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद बुधवार को प्रधान अखिलेश ने सभी मृतकों के परिवारों के मुखिया का बैंक खाता नंबर और आधार कार्ड लेकर लेखपाल को दिया है, जिससे पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद दिलाई जा सके।
हालातों का जायजा लेते रहे पुलिसकर्मी
मंगलवार को अंतिम संस्कार के बाद टिकौली गांव में तैनात पुलिस तथा पीएसी बल हटा लिया गया था। समय-समय पर कुछ पुलिस कर्मी गांव जाकर हालातों का जायजा ले रहे। बुधवार को भी पुलिस कर्मियों ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों का हाल जाना। ग्रामीणों के मुताबिक पुलिस कर्मियों की लगातार आवाजाही बनी हुई है।
सामान्य होने लगी लोगों की दिनचर्या
मंगलवार को टिकौली में नौ शवों का अंतिम संस्कार किए जाने तक समूचा गांव गमगीन था। जिन परिवारों में गमी हो गई थी, उनके दुख में शामिल पड़ोसियों तक के घरों में चूल्हे नहीं जले थे। बुधवार को ग्रामीणों की दिनचर्या सामान्य होने लगी। कई ग्रामीण जरूरी कामकाज निपटाते नजर आए। एक मकान का निर्माण कार्य चल रहा था। हादसे के बाद काम ठप था। बुधवार को निर्माण कार्य में मजदूर लगे दिखाई दिए। कुछ ग्रामीण बाजार जाने के लिए भी निकले थे।