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Sitapur News: मौसम की मार से किसान परेशान, लागत हुई दोगुनी
Mon, 02 Jun 2025 12:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 02 Jun 2025 12:33 AM IST
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इमलिया सुल्तानपुर (सीतापुर)। तेज धूप और भीषण गर्मी ने सब्जी उत्पादक किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में हर तीसरे दिन सिंचाई के बावजूद टमाटर, बैंगन, लौकी, भिंडी, पालक जैसी फसलें झुलस रही हैं। अत्यधिक गर्मी और नहरों में पानी की कमी से फसलों पर बुरा असर पड़ रहा है। इससे किसानों की लागत दोगुनी हो गई है।
गर्मी का असर केवल सब्जियों तक सीमित नहीं है। गन्ने की फसल पर भी गर्म हवाओं का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। गन्ने में सोंढी रोग फैलने लगा है, जिससे नई पत्तियां सूखने लगी हैं। किसानों को कीटनाशकों का सहारा लेना पड़ रहा है। यदि जल्द मानसून नहीं आया तो फसलों का चौपट होना तय है। पिछले कई दिनों से जिले में भीषण गर्मी पड़ रही है। नौतपा की तपिश ने हालात और भी बिगाड़ दिए हैं। नहरों से नियमित जलापूर्ति न होने से किसान ट्यूबवेल के भरोसे सिंचाई कर रहे हैं, जिससे बिजली और डीजल की खपत बढ़ गई है।
तेज धूप से टमाटर की फसल नष्ट
सुबह से शाम तक चल रही चिलचिलाती धूप और गर्म हवा ने टमाटर की फसल पूरी तरह चौपट कर दी है। बैंगन, लौकी, तोरई, भिंडी, पालक और हरी मिर्च की फसलें भी प्रभावित हैं। पहले प्रति बीघा छह हजार की लागत आती थी, जो अब बढ़कर 12 हजार रुपये तक पहुंच गई है। कीटनाशकों का खर्च और मजदूरों की कमी से स्थिति और गंभीर हो गई है। बारिश ही अब एकमात्र राहत है।
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रामकिशोर मौर्य, सब्जी उत्पादक किसान
गन्ने की फसल पर दस हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च
गर्मी के कारण गन्ने की फसल में सोंढी रोग फैलने की संभावना बढ़ गई है, जो नई पत्तियाँ खा जाता है। खेत में नमी बनाए रखने के लिए बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। साथ ही कीटनाशकों का भी प्रयोग जरूरी हो गया है। तेज धूप की वजह से मजदूर ज्यादा देर काम नहीं कर पा रहे, जिससे प्रति एकड़ लगभग 10 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च आ रहा है।
रोहित सिंह, गन्ना किसान
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गर्मी का असर केवल सब्जियों तक सीमित नहीं है। गन्ने की फसल पर भी गर्म हवाओं का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। गन्ने में सोंढी रोग फैलने लगा है, जिससे नई पत्तियां सूखने लगी हैं। किसानों को कीटनाशकों का सहारा लेना पड़ रहा है। यदि जल्द मानसून नहीं आया तो फसलों का चौपट होना तय है। पिछले कई दिनों से जिले में भीषण गर्मी पड़ रही है। नौतपा की तपिश ने हालात और भी बिगाड़ दिए हैं। नहरों से नियमित जलापूर्ति न होने से किसान ट्यूबवेल के भरोसे सिंचाई कर रहे हैं, जिससे बिजली और डीजल की खपत बढ़ गई है।
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तेज धूप से टमाटर की फसल नष्ट
सुबह से शाम तक चल रही चिलचिलाती धूप और गर्म हवा ने टमाटर की फसल पूरी तरह चौपट कर दी है। बैंगन, लौकी, तोरई, भिंडी, पालक और हरी मिर्च की फसलें भी प्रभावित हैं। पहले प्रति बीघा छह हजार की लागत आती थी, जो अब बढ़कर 12 हजार रुपये तक पहुंच गई है। कीटनाशकों का खर्च और मजदूरों की कमी से स्थिति और गंभीर हो गई है। बारिश ही अब एकमात्र राहत है।
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रामकिशोर मौर्य, सब्जी उत्पादक किसान
गन्ने की फसल पर दस हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च
गर्मी के कारण गन्ने की फसल में सोंढी रोग फैलने की संभावना बढ़ गई है, जो नई पत्तियाँ खा जाता है। खेत में नमी बनाए रखने के लिए बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। साथ ही कीटनाशकों का भी प्रयोग जरूरी हो गया है। तेज धूप की वजह से मजदूर ज्यादा देर काम नहीं कर पा रहे, जिससे प्रति एकड़ लगभग 10 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च आ रहा है।
रोहित सिंह, गन्ना किसान