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Sitapur News: कड़ाके की ठंड में बिजली की 25 मेगावाट बढ़ी खपत
Fri, 12 Jan 2024 10:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 12 Jan 2024 10:17 PM IST
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सीतापुर। कड़ाके की ठंड में बिजली की डिमांड बढ़ गई है। एक सप्ताह पहले जहां रोजाना करीब 200 मेगावाट की खपत होती थी। अब यह बढ़कर 225 मेगावाट तक पहुंच गई है। इस दौरान जिले में ठंड सितम ढा रही है।
बर्फीली हवा व धूप न निकलने से न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इसके चलते लोग हीटर व ब्लोअर का प्रयोग कर रहे हैं। इस कारण बिजली की खपत बढ़ती जा रही है। एक सप्ताह पहले जिले में करीब 200 मेगावाट बिजली की खपत होती थी। ठंड बढ़ते ही 225 मेगावाट की जरूरत पड़ रही है। विभाग का कहना है अगर किसान सिंचाई शुरू कर देते हैं तो डिमांड और बढ़ेगी।
सिंचाई के समय करीब 25 मेगावाट में और इजाफा देखने को मिलता है। यह बढ़कर 250 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। वहीं, कुछ शहरी इलाकों में ट्रिपिंग की समस्या भी हो रही है। बिजली विभाग के सूत्रों की मानें तो खपत बढ़ने से ट्रिपिंग नहीं हो रही है। जहां कहीं जर्जर तार या फॉल्ट है, वहां ट्रिपिंग होती है।
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गर्मी से आधी है डिमांड
बिजली की सबसे अधिक खपत मई व जून माह में देखने को मिलती है। इन महीनों में जिले में 400-450 मेगावाट की रोजाना जरूरत पड़ती है। इस समय बिजली की खपत आधी हो रही है। अफसरों का कहना है कि मार्च के बाद खपत में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है।
नहीं है कोई कमी
इस समय बिजली की कुछ डिमांड बढ़ी है। जिले में बिजली की कोई कमी नहीं है। रोस्टर के मुताबिक सभी को आपूर्ति दी जा रही है।
डीसी दीक्षित, अधिशासी अभियंता, विद्युत पारेषण खंड
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बर्फीली हवा व धूप न निकलने से न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इसके चलते लोग हीटर व ब्लोअर का प्रयोग कर रहे हैं। इस कारण बिजली की खपत बढ़ती जा रही है। एक सप्ताह पहले जिले में करीब 200 मेगावाट बिजली की खपत होती थी। ठंड बढ़ते ही 225 मेगावाट की जरूरत पड़ रही है। विभाग का कहना है अगर किसान सिंचाई शुरू कर देते हैं तो डिमांड और बढ़ेगी।
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सिंचाई के समय करीब 25 मेगावाट में और इजाफा देखने को मिलता है। यह बढ़कर 250 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। वहीं, कुछ शहरी इलाकों में ट्रिपिंग की समस्या भी हो रही है। बिजली विभाग के सूत्रों की मानें तो खपत बढ़ने से ट्रिपिंग नहीं हो रही है। जहां कहीं जर्जर तार या फॉल्ट है, वहां ट्रिपिंग होती है।
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गर्मी से आधी है डिमांड
बिजली की सबसे अधिक खपत मई व जून माह में देखने को मिलती है। इन महीनों में जिले में 400-450 मेगावाट की रोजाना जरूरत पड़ती है। इस समय बिजली की खपत आधी हो रही है। अफसरों का कहना है कि मार्च के बाद खपत में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है।
नहीं है कोई कमी
इस समय बिजली की कुछ डिमांड बढ़ी है। जिले में बिजली की कोई कमी नहीं है। रोस्टर के मुताबिक सभी को आपूर्ति दी जा रही है।
डीसी दीक्षित, अधिशासी अभियंता, विद्युत पारेषण खंड