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सीतापुर-बालामऊ रूट पर जल्द दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक ट्रेनें
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सीतापुर। जिला मुख्यालय से लखनऊ व लखीमपुर तक रेल विद्युतीकरण का काम पूरा होने के बाद अब सीतापुर से वाया बालामऊ और उन्नाव तक करीब 170 किलोमीटर के लंबे ट्रैक पर जल्द ही इलेक्ट्रिक ट्रेनें दौड़ने की उम्मीद बढ़ गई है। इस रेल ट्रैक पर चल रहा विद्युतीकरण का काम अंतिम चरण में है। फरवरी के पहले सप्ताह में इस ट्रैक पर सीआरएस होने की उम्मीद जताई जा रही है। सीआरएस मुकम्मल होने के बाद विद्युत रेल चलने लगेगी।
दरअसल सीतापुर से बालामऊ व बालामऊ से उन्नाव तक रेल ट्रैक के विद्युतीकरण का काम काफी समय से चल रहा था। अब यह काम तकरीबन पूरा हो गया है। रेलवे इलेक्ट्रीफिकेशन के एक जिम्मेदार अधिकारी मुक्तेश्वर मल्ल ने बताया कि सीतापुर से बालामऊ व बालामऊ से उन्नाव के करीब 170 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाने के लिए इलेक्ट्रीफिकेशन का काम काफी समय से चल रहा था।
उनका कहना है कि कार्य पूरा होते ही इस रूट पर सीआरएस यानी विद्युत ट्रेन संचालक का ट्रायल होगा। ट्रायल के बाद इस रूट पर भी इलेक्ट्रिक ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। उनका कहना है कि इस रूट पर इलेक्ट्रीफिकेशन का कार्य पूरा होने वाला है। उसके बाद फरवरी माह की शुरुआत में सीआरएस होना है।
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रेल संरक्षा आयुक्त के निरीक्षण को देखते हुए रेलवे ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सीआरएस होने के बाद इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाई जाएंगी। तैयारियों के मुताबिक माना जा रहा है कि फरवरी माह के अंत तक इस रूट पर विद्युत ट्रेन दौड़ाई जा सकती है।
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दरअसल सीतापुर से बालामऊ व बालामऊ से उन्नाव तक रेल ट्रैक के विद्युतीकरण का काम काफी समय से चल रहा था। अब यह काम तकरीबन पूरा हो गया है। रेलवे इलेक्ट्रीफिकेशन के एक जिम्मेदार अधिकारी मुक्तेश्वर मल्ल ने बताया कि सीतापुर से बालामऊ व बालामऊ से उन्नाव के करीब 170 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाने के लिए इलेक्ट्रीफिकेशन का काम काफी समय से चल रहा था।
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उनका कहना है कि कार्य पूरा होते ही इस रूट पर सीआरएस यानी विद्युत ट्रेन संचालक का ट्रायल होगा। ट्रायल के बाद इस रूट पर भी इलेक्ट्रिक ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। उनका कहना है कि इस रूट पर इलेक्ट्रीफिकेशन का कार्य पूरा होने वाला है। उसके बाद फरवरी माह की शुरुआत में सीआरएस होना है।
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रेल संरक्षा आयुक्त के निरीक्षण को देखते हुए रेलवे ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सीआरएस होने के बाद इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाई जाएंगी। तैयारियों के मुताबिक माना जा रहा है कि फरवरी माह के अंत तक इस रूट पर विद्युत ट्रेन दौड़ाई जा सकती है।