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Sitapur News: कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान-दान कर कमाया पुण्य
Fri, 15 Nov 2024 09:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 15 Nov 2024 09:16 PM IST
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घाट पर स्नान करते श्रद्धालु।
सीतापुर। कार्तिक पूर्णिमा पर शुक्रवार को नैमिष के चक्रतीर्थ, सरोवरों व नदी के घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद पुरोहितों को दान देकर पुण्य कमाया। इस दौरान कई स्थानों पर लगे मेलों में भीड़ उमड़ी।
नैमिषारण्य में कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान व दान के लिए बृहस्पतिवार रात से ही श्रद्धालुओं का रेला पहुंचने लगा था। शुक्रवार भोर से लोगों का नैमिषारण्य चक्रतीर्थ व गोमती नदी के राजघाट पर स्नान का दौर शुरू हो गया। मान्यता है कि इस दिन यदि कोई मनुष्य गंगा, यमुना व गोमती जैसी पवित्र नदियों में स्नान करता है और भगवान का ध्यान करता है तो उसे सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे व जय गोमती मैया के उद्घोष के साथ पवित्र जल में डुबकी लगाई। स्नान के बाद चक्रतीर्थ व नदी के घाट पर बैठे पुरोहितों को यथाशक्ति अन्नदान किया। दक्षिणा दी। महिलाओं ने तुलसी माता का पूजन किया और दीप जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
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शास्त्रों के अनुसार वर्ष में कुल 12 पूर्णिमा होती हैं लेकिन कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है, इस दिन भगवान लक्ष्मी व नारायण पूजन करने से विशेष फल प्राप्त होता है। स्नान-दान के बाद श्रद्धालुओं ने मां ललिता देवी, बाबा भूतेश्वर नाथ, हनुमान गढ़ी, व्यास गद्दी, कालीपीठ, सूत गद्दी बालाजी मंदिर, देवपुरी, देवदेवेश्वर समेत अन्य देव स्थलों पर दर्शन पूजन किया।
लहरपुर के प्रसिद्ध सूर्यकुंड मंदिर प्रांगण स्थित पवित्र सरोवर में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर कामेश्वर नाथ मंदिर में पूजा अर्चना की। महिलाओं ने जगह-जगह हवन-पूजन कर सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान भंडारों का भी आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर प्रांगण में मेले का भी आयोजन किया गया।
खैराबाद के पौराणिक तीर्थ भुइयां ताली में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। पुरोहितों को दान देने के बाद मां भुइयां ताली के साथ मां बगलामुखी की पूजा अर्चना कर श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद मांगा। यहां मेले का आयोजन भी किया गया। महंत बजरंग मुनि ने बताया कि मेला तीन दिन तक चलेगा। दूरदराज से आए श्रद्धालुओं के लिए विश्राम की व्यवस्था की गई है। रात में भजन-कीर्तन का आयोजन होगा।
धन्नाग मेले का शुभारंभ, सज गईं दुकानें
अटरिया क्षेत्र के प्राचीन धन्नाग तीर्थ पर प्रतिवर्ष की भांति कार्तिक पूर्णिमा के दिन से मेले का शुभारंभ हुआ। अतिथियों ने मेला परिसर में परिक्रमा करने के बाद पूजन व आरती की। धन्नाग तीर्थ का संबंध द्वापर युग से है। मान्यता के अनुसार पांडवों ने माता कुंती के साथ यहां कुछ समय बिताया था। यहां के सरोवर में पांडव स्नान करते थे। अब यही सरोवर कल्याणी नदी का उद्गम स्थल है। धन्नाग तीर्थ उत्थान समिति के रामखेलावन शुक्ल बताते हैं कि इस तीर्थ को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग बेहद पुरानी है।
मेले में लोगों ने खूब की खरीदारी
मिश्रिख (सीतापुर)। कार्तिक पूर्णिमा पर हर साल की तरह इस बार भी मेला मैदान पर मेला लगा। सीताकुंड तीर्थ पर भगवान शेषनाथ व नर्मदेश्वर महादेव मंदिर के साथ ही गौरी मंदिर में श्रद्धालु दिनभर दर्शन पूजन करते रहे। दधीचि कुंड तीर्थ पर सुबह से ही श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचने लगे। स्नान के बाद पुरोहितों को दान दक्षिणा दी। मेले में लोगों ने रेडीमेड कपड़े, ऊनी कपड़े व साड़ियां खरीदीं।
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नैमिषारण्य में कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान व दान के लिए बृहस्पतिवार रात से ही श्रद्धालुओं का रेला पहुंचने लगा था। शुक्रवार भोर से लोगों का नैमिषारण्य चक्रतीर्थ व गोमती नदी के राजघाट पर स्नान का दौर शुरू हो गया। मान्यता है कि इस दिन यदि कोई मनुष्य गंगा, यमुना व गोमती जैसी पवित्र नदियों में स्नान करता है और भगवान का ध्यान करता है तो उसे सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
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श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे व जय गोमती मैया के उद्घोष के साथ पवित्र जल में डुबकी लगाई। स्नान के बाद चक्रतीर्थ व नदी के घाट पर बैठे पुरोहितों को यथाशक्ति अन्नदान किया। दक्षिणा दी। महिलाओं ने तुलसी माता का पूजन किया और दीप जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
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शास्त्रों के अनुसार वर्ष में कुल 12 पूर्णिमा होती हैं लेकिन कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है, इस दिन भगवान लक्ष्मी व नारायण पूजन करने से विशेष फल प्राप्त होता है। स्नान-दान के बाद श्रद्धालुओं ने मां ललिता देवी, बाबा भूतेश्वर नाथ, हनुमान गढ़ी, व्यास गद्दी, कालीपीठ, सूत गद्दी बालाजी मंदिर, देवपुरी, देवदेवेश्वर समेत अन्य देव स्थलों पर दर्शन पूजन किया।
लहरपुर के प्रसिद्ध सूर्यकुंड मंदिर प्रांगण स्थित पवित्र सरोवर में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर कामेश्वर नाथ मंदिर में पूजा अर्चना की। महिलाओं ने जगह-जगह हवन-पूजन कर सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान भंडारों का भी आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर प्रांगण में मेले का भी आयोजन किया गया।
खैराबाद के पौराणिक तीर्थ भुइयां ताली में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। पुरोहितों को दान देने के बाद मां भुइयां ताली के साथ मां बगलामुखी की पूजा अर्चना कर श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद मांगा। यहां मेले का आयोजन भी किया गया। महंत बजरंग मुनि ने बताया कि मेला तीन दिन तक चलेगा। दूरदराज से आए श्रद्धालुओं के लिए विश्राम की व्यवस्था की गई है। रात में भजन-कीर्तन का आयोजन होगा।
धन्नाग मेले का शुभारंभ, सज गईं दुकानें
अटरिया क्षेत्र के प्राचीन धन्नाग तीर्थ पर प्रतिवर्ष की भांति कार्तिक पूर्णिमा के दिन से मेले का शुभारंभ हुआ। अतिथियों ने मेला परिसर में परिक्रमा करने के बाद पूजन व आरती की। धन्नाग तीर्थ का संबंध द्वापर युग से है। मान्यता के अनुसार पांडवों ने माता कुंती के साथ यहां कुछ समय बिताया था। यहां के सरोवर में पांडव स्नान करते थे। अब यही सरोवर कल्याणी नदी का उद्गम स्थल है। धन्नाग तीर्थ उत्थान समिति के रामखेलावन शुक्ल बताते हैं कि इस तीर्थ को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग बेहद पुरानी है।
मेले में लोगों ने खूब की खरीदारी
मिश्रिख (सीतापुर)। कार्तिक पूर्णिमा पर हर साल की तरह इस बार भी मेला मैदान पर मेला लगा। सीताकुंड तीर्थ पर भगवान शेषनाथ व नर्मदेश्वर महादेव मंदिर के साथ ही गौरी मंदिर में श्रद्धालु दिनभर दर्शन पूजन करते रहे। दधीचि कुंड तीर्थ पर सुबह से ही श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचने लगे। स्नान के बाद पुरोहितों को दान दक्षिणा दी। मेले में लोगों ने रेडीमेड कपड़े, ऊनी कपड़े व साड़ियां खरीदीं।