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Sitapur News: विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा डॉ. रामबख्श का योगदान
Sun, 12 Apr 2026 12:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 12 Apr 2026 12:00 AM IST
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बायो गैस प्लांट के साथ डॉ. राम बख्श सिंह (फाइल फोटो)
इमलिया सुल्तानपुर। बायोगैस व ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले सीतापुर के दिवंगत डॉ. रामबख्श सिंह के योगदान को अब विद्यार्थी पुस्तकों में भी पढ़ेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा नौ की विज्ञान की नई पुस्तक में उनके योगदान को शामिल किया है।
डॉ. रामबख्श सिंह के पुत्र राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में एलपीजी की किल्लत और अन्य ऊर्जा चुनौतियाें का समाधान वर्षों पहले उनके पिता ने दे दिया था। पिता का जुड़ाव सीतापुर व लखनऊ से खास रहा है। उन्होंने बायोगैस व नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान करके वर्ष 1957 में देश को पहले बायोगैस प्लांट की सौगात दी थी। वर्ष 1970 के ऊर्जा संकट के समय भी वैकल्पिक व स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता को वैश्विक स्तर पर अनुभव किया गया था। डॉ. सिंह ने उस समय बायोगैस जैसी स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा के विकास पर कार्य कर एक ऐसा मार्ग प्रस्तुत किया, जो आज भी ऊर्जा आत्मनिर्भरता, ग्रामीण सशक्तीकरण व पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोगी है।
राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि डॉ. सिंह के योगदान को कोर्स में शामिल कराने में सांसद दिग्विजय सिंह, धौरहरा सांसद आनंद भदौरिया व सीतापुर सांसद राकेश राठौर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
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डॉ. रामबख्श सिंह के पुत्र राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में एलपीजी की किल्लत और अन्य ऊर्जा चुनौतियाें का समाधान वर्षों पहले उनके पिता ने दे दिया था। पिता का जुड़ाव सीतापुर व लखनऊ से खास रहा है। उन्होंने बायोगैस व नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान करके वर्ष 1957 में देश को पहले बायोगैस प्लांट की सौगात दी थी। वर्ष 1970 के ऊर्जा संकट के समय भी वैकल्पिक व स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता को वैश्विक स्तर पर अनुभव किया गया था। डॉ. सिंह ने उस समय बायोगैस जैसी स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा के विकास पर कार्य कर एक ऐसा मार्ग प्रस्तुत किया, जो आज भी ऊर्जा आत्मनिर्भरता, ग्रामीण सशक्तीकरण व पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोगी है।
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राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि डॉ. सिंह के योगदान को कोर्स में शामिल कराने में सांसद दिग्विजय सिंह, धौरहरा सांसद आनंद भदौरिया व सीतापुर सांसद राकेश राठौर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
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