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Sitapur News: मरी हुई भैंस का इलाज कर आए डॉक्टर साहब
Fri, 18 Jul 2025 11:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 18 Jul 2025 11:51 PM IST
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सीतापुर। पशु चिकित्सा अधिकारी एक मरी हुई भैंस का इलाज करके आ गए। कागजों में हुए इलाज की शिकायत जब अधिकारियों से हुई तो एंबुलेंस ले जाकर मौके पर जांच आख्या लगा दी। खास बात यह रही कि जांच आख्या में भी पीड़ित के हस्ताक्षर नहीं लिए। अब इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय से हुई है। पशुपालन विभाग में हड़कंप मचा है।
महोली के चठिया निवासी अमलेश कुमार की भैंस ने 27 जून को एक बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद भैंस की बच्चेदानी बाहर निकल आई। अमलेश कुमार ने पशु चिकित्सा हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल किया। अमलेश ने बताया कि 27 जून को वह दोपहर 1 बजे से लगातार कॉल करता रहे। दोपहर करीब 3 बजे टेलीकॉलर से बात हो सकी। 1962 एंबुलेंस को अधिकतम एक घंटे में पहुंच जाना चाहिए था। बताया कि लगातार पांच दिन तक प्रयास के बावजूद एक जुलाई तक एंबुलेंस नहीं पहुंची और भैंस की मौत हो गई।
पीड़ित के अनुसार उनकी भैंस की मौत पशुपालन विभाग की लापरवाही और उससे संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी 1962 की चिकित्सा सेवाएं न मिलने के कारण हुई है। बताया कि जब इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई तो आठ जुलाई को एंबुलेंस लेकर चिकित्साधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने एंबुलेंस की फोटो खींचकर फर्जी निस्तारण आख्या लगा दी कि पशु का इलाज चिकित्सक ने कर दिया है। इस आख्या को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने भी प्रमाणित कर दिया। यह भी लिख दिया कि शिकायतकर्ता संतुष्ट हैं। जबकि भैंस की मौत एक जुलाई को ही हो गई थी।
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1962 सेवा से मेरा कोई मतलब नहीं, केस की जानकारी नहीं: सीवीओ
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि 1962 सेवा से मेरा कोई मतलब नहीं रहता है। इस केस की जानकारी भी नहीं है। मैं इस संबंध में कुछ बता नहीं पाऊंगा। यह हाल तब है जबकि पशु चिकित्सक की जांच आख्या को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने स्वयं प्रमाणित किया है।
मंत्री के दावों की विभाग ने उड़ाईं धज्जियां
रविवार को पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री डॉ. धर्मपाल सिंह नैमिषारण्य आए थे। मंत्री ने दावा किया था कि 1962 को हाईटेक किया जा रहा है। यह भी कहा था कि कहीं भी 1962 एंबुलेंस की आवश्यकता होगी तो हर हाल में एक घंटे में सहायता पहुंचेगी। सीतापुर में विभाग उनके दावों की धज्जियां उड़ता नजर आ रहा है।
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महोली के चठिया निवासी अमलेश कुमार की भैंस ने 27 जून को एक बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद भैंस की बच्चेदानी बाहर निकल आई। अमलेश कुमार ने पशु चिकित्सा हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल किया। अमलेश ने बताया कि 27 जून को वह दोपहर 1 बजे से लगातार कॉल करता रहे। दोपहर करीब 3 बजे टेलीकॉलर से बात हो सकी। 1962 एंबुलेंस को अधिकतम एक घंटे में पहुंच जाना चाहिए था। बताया कि लगातार पांच दिन तक प्रयास के बावजूद एक जुलाई तक एंबुलेंस नहीं पहुंची और भैंस की मौत हो गई।
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पीड़ित के अनुसार उनकी भैंस की मौत पशुपालन विभाग की लापरवाही और उससे संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी 1962 की चिकित्सा सेवाएं न मिलने के कारण हुई है। बताया कि जब इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई तो आठ जुलाई को एंबुलेंस लेकर चिकित्साधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने एंबुलेंस की फोटो खींचकर फर्जी निस्तारण आख्या लगा दी कि पशु का इलाज चिकित्सक ने कर दिया है। इस आख्या को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने भी प्रमाणित कर दिया। यह भी लिख दिया कि शिकायतकर्ता संतुष्ट हैं। जबकि भैंस की मौत एक जुलाई को ही हो गई थी।
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1962 सेवा से मेरा कोई मतलब नहीं, केस की जानकारी नहीं: सीवीओ
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि 1962 सेवा से मेरा कोई मतलब नहीं रहता है। इस केस की जानकारी भी नहीं है। मैं इस संबंध में कुछ बता नहीं पाऊंगा। यह हाल तब है जबकि पशु चिकित्सक की जांच आख्या को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने स्वयं प्रमाणित किया है।
मंत्री के दावों की विभाग ने उड़ाईं धज्जियां
रविवार को पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री डॉ. धर्मपाल सिंह नैमिषारण्य आए थे। मंत्री ने दावा किया था कि 1962 को हाईटेक किया जा रहा है। यह भी कहा था कि कहीं भी 1962 एंबुलेंस की आवश्यकता होगी तो हर हाल में एक घंटे में सहायता पहुंचेगी। सीतापुर में विभाग उनके दावों की धज्जियां उड़ता नजर आ रहा है।