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शिक्षकों के लिए मुसीबत बना दूूध देने का फरमान

Fri, 10 Jul 2015 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर Updated Fri, 10 Jul 2015 11:36 PM IST
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नौनिहालों की थाली मंहगाई की मार से गुजर रही है। उस पर दूध को मेन्यू में शामिल करके और भी मुसीबतें बढ़ा दी गई है। कारण यह है कि प्राथमिक विद्यालय में प्रति छात्र 3.59 रुपये कनवर्जन कास्ट दी जाती है। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 5.38 रुपये फिक्स है। इससे नौनिहालों की सब्जी व मसाले खरीदे जाते है। इसी से दूध भी खरीदा जाना है। वह भी 200 मिलीलीटर। इस तरह दूध को शामिल कर लिया गया, लेकिन उसके लिए कनवर्जन कास्ट नहीं बढ़ाई गई। पहले से फिक्स कनवर्जन कास्ट से गुणवत्ता परक भोजन देना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में दूध देने का फरमान शिक्षकों के लिए मुसीबत बना हुआ है।

परिषदीय विद्यालयों में नौनिहालों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत स्कूल में ही पका-पकाया भोजन दिया जाता है। भोजन बनाने के लिए खाद्यान्न व कनर्वजन कास्ट दी जाती है। दिन प्रतिदिन महंगाई बढ़ती जा रही है। सब्जी व दालों के दाम आसमान छू रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि इतने कम बजट से गुणवत्ता पूर्ण भोजन नहीं बन सकता है। शासन का निर्देश है तो मजबूरन खाना बनवाना पड़ता है। बुधवार को कोफ्ता व चावल के साथ अब दूध भी दिया जाना है। इतने कम पैसे में दूध देना मुश्किल है। औसतन इतना दूध करीब आठ रुपये का मिलेगा। उसके बाद कोफ्ता भी बनवाना है। जब तक कनवर्जन कास्ट नहीं बढ़ाई जाती है, तब तक यह संभव नहीं है। ऐसे में शासन ने जिस उद्देश्य से नौनिहालों को दूध देनेे का फैसला किया है, वह पूरा होता नहीं दिख रहा है।
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शासन ने दूध वितरित करने का फरमान सुना दिया है। जबकि दूध के वितरण के लिए न तो गिलास का प्रबंध किया गया है और न ही उसके लिए कोई जग या मग की व्यवस्था की गई है। साथ ही इसकी गुणवत्ता जांचने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में दूध वितरण अधर में लटका हुआ है। विभागीय अधिकारी भी परेशान हैं। उनको समझ में नहीं आ रहा है कि किस आधार पर दूध का वितरण किया जाएगा। वह शासन से अगला निर्देश मिलने की राह ताक रहे हैं।
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विद्यालय में खाना बनवाने की जिम्मेदारी शिक्षक व ग्राम प्रधान की होती है। शासन ने मेन्यू में दूध को शामिल करके अपनी प्राथमिकता गिना दी है। दूध का वितरण न होने पर शिक्षकों पर कठोर कार्रवाई करने की चेतावनी दी जा रही है, लेकिन मौजूदा कास्ट से कैसे दूध का वितरण होगा, इस पर शिक्षक असमंजस में है। वह कार्रवाई के भय से बेसिक शिक्षा अधिकारी से दूध के वितरण से पहले व्यवस्था दुरुस्त करने की गुहार लगा रहे हैं।


प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजकिशोर का कहना है कि मौजूदा कनवर्जन कास्ट से दूध का वितरण कराना संभव नहीं है। शासन को पहले कनवर्जन कास्ट बढ़ानी चाहिए। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रामचंद्र मिश्र व जिला मंत्री मनीष पांडेय का कहना है कि इतने कम पैसे में दूध का इंतजाम करना मुश्किल है। शासन को पहले समस्त व्यवस्थाएं दुरुस्त करनी चाहिए। उसके बाद इसे नागू करें। संगठन के मुरारी लाल श्रीवास्तव का कहना था कि शासन को वितरण से पहले बजट बढ़ाना चाहिए। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर दूध के लिए शिक्षकों पर कार्रवाई की जाती है तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



एमडीएम के जिला समंवयक बृज माेहन सिंह ने बताया कि मौजूदा कनवर्जन कास्ट से ही दूध का वितरण किया जाना है। बर्तन व गिलास खरीदने के लिए कोई बजट नहीं मिला है। इस संबंध में शासन में बैठक होने वाली है। उसी में दूध वितरण पर मंथन किया जाएगा।
-बृजमोहन सिंह, जिला समन्यवक, एमडीएम
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