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घाघरा के साथ शारदा भी उफान पर

Tue, 31 Jul 2018 01:07 AM IST
Updated Tue, 31 Jul 2018 01:07 AM IST
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घाघरा के साथ शारदा भी उफान पर
पूर्व विधायक समेत कई किसानों के खेत कटकर नदी की धारा में समाए
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रेउसा/ सीतापुर। जिले के गांजरी इलाके घाघरा के साथ अब शारदा नदी भी उफनाने लगी है। रविवार की रात एक झोपड़ी कटकर शारदा नदी में बह गई है। कटान इस कदर हो रही है कि पूर्व विधायक किशोरीलाल समेत कई किसानों के खेत कटकर बह गए हैं।

वहीं घाघरा नदी की बाढ़ के हालात जस के तस बने हुए हैं। तीन हजार बीघा के करीब खेत जलमग्न हैं, बरसाती नाले उफना रहे हैं और घाघरा की लहरें करीब 20 गांवों के निकट हिलोरे मार रही हैं। नदी का रौद्र रूप देखकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदे सहमे हुए हैं।
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रेउसा में भदम्मरपुरवा शारदा नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां पर शारदा कटान कर रही है। रविवार की रात शारदा गांव के हरीलाल की झोपड़ी को काटकर बहा ले गई। गनीमत यह रही कि रविवार की सुबह ही परिवार झोपड़ी को खाली करके वहां से निकल चुका था।
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जिसकी वजह से कोई जनहानि नहीं होने पाई। पूर्व विधायक किशोरीलाल का खेत म्योड़ी छोलहा के निकट है। शारदा यहां भी तेजी से कटान कर रही है। रात भर में नदी ने पूर्व विधायक का तीन बीघा खेत व अन्य किसानों का करीब आठ बीघा खेत को निगल लिया है।

नदी का कटान अब भी जारी है। इधर घाघरा का भी कहर बरप रहा है। कोनी, परमेश्वर पुरवा, दुर्गा पुरवा आदि गांवों के करीब सात संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की जद में हैं। रास्तों पर नदी का पानी उफना रहा है। क्षेत्र की तीन हजार बीघे से अधिक की खेती जलमग्न हो गई है।

किसानों को फसल देखने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। दुर्गा पुरवा, लोध पुरवा समेत करीब दस गांव ऐसे हैं, जहां बाढ़ का पानी बेहद करीब पहुंच चुका है। उफान मारती नदी का रौद्र रूप देखकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदे काफी सहमे हुए हैं। उनका कहना है कि जिस तरह से नदी उफान मार रही है, उससे किसी भी पल तटीय क्षेत्र के गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।

इधर सोमवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 2,41,756 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे स्थिति और भी बिगड़ने के आसार नजर आ रहे हैं। सोमवार को भी तटीय क्षेत्र के बाशिंदे अपने आशियानों ने के लिए सड़कों पर सुरक्षित ठिकाना तलाशते नजर आए।

पशुओं को नहीं मिल रहा हरा चारा
घाघरा के उफनाने से क्षेत्र के खेत जहां बाढ़ के पानी में समाए हुए हैं। वहीं पशुओं के चारागाह भी बाढ़ की चपेट में हैं। इस वजह से क्षेत्र के गांवों में मौजूद पालतू पशुओं को हरा चारा नसीब नहीं हो रहा है। नतीजा तटीय क्षेत्र के बाशिंदे अपने पशुओं को लेकर चहलारी घाट मार्ग पर आ गए हैं।

यहां से पुल पार कर पशुपालक बहराइच जिले में मौजूद बांध पर पहुंचकर पशुओं को चरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तो पुल पार हरी घास मिल रही है, लेकिन अगर नदी और उफनाई तो वह घास मिलेगी भी या नहीं, इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। कुल मिलाकर इन दिनों चहलारी घाट मार्ग ही क्षेत्र के बाशिंदों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है।


बढ़ा है नदियों का जलस्तर
घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है, बैराजों से लगातार काफी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है, जिसकी वजह से नदी उफान पर हैं। नजर रखी जा रही है, जरूरत पड़ने पर मदद की जाएगी।
-एसबी राय, एसडीएम
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