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कंप्यूटर व लग्जरी वाहन चलाने वाले हाथ थामे है फावड़ा
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सिधौली (सीतापुर)। सूरत की एक प्राइवेट कंपनी में बतौर मैनेजर काम करने वाले रामेश्वर की जिंदगी मे कोरोना बड़ा बदलाव ले आई है। एसी केबिन में कंप्यूटर पर बैठकर लेखाजोखा करने वाले रामेश्वर बेरोजगार हुए तो परिवार चलाने के लिए अब मनरेगा में मजदूरी करने को विवश हैं।
परदेश से आने के बाद से कंप्यूटर चलाने वाले हाथों में फावड़ा है। रामेश्वर कहते हैं रोजगार गंवाने के बाद जब कुछ समझ नहीं आ रहा था, ऐसे में मनरेगा उनके लिए संकट मोचक साबित हो रही है। रामेश्वर की तरह परदेश से बेरोजगार होकर वापस आने वाले कई लोगों के लिए मनरेगा जीविकोपार्जन का जरिया बन ही है।
मद्रास के कॉफी हाउस में शेफ का काम करने वाले प्रदीप कुमार की बात करें अथवा बंगलौर की एक नामचीन कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करने वाले अजय कुमार की। इन सबके लिए संकट की घड़ी में मनरेगा मददगार बन रही है। दरअसल, कोरोना संकट के इस दौर में परदेश कमाने गए तमाम लोग बेरोजगार होकर वापस लौटे हैं। जमापूंजी आखिर कब तक चलती। पाई-पाई को मोहताज हुए तो बड़ी-बड़ी कंपनियों में कंप्यूटर व लग्जरी वाहन चलाने वाले लोग भी मजबूरन फावड़ा चला रहे हैं।
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मनरेगा में 6,681 जरूरतमंदों को मिला रोजगार
ब्लॉक सिधौली की 86 ग्राम पंचायतों में से इन दिनों 84 ग्राम पंचायतों में 6,681 मजदूर मनरेगा में काम कर रहे हैं। इन गांवों में तालाब की खुदाई, समतलीकरण, संपर्क मार्ग का पटान, ड्रेन की खुदाई और चकमार्ग पर मिट्टी पटाई का काम चल रहा है। इस दौरान 6,512 परिवार में 7,911 मजदूरों क्रो 77170 मानव दिवस का भुगतान किया जा चुका है।
मनरेगा में डिमांड के अनुसार काम मुहैया कराया जा रहा है। परदेश से लौटकर आए लगभग 300 लोगों ने मनरेगा में काम किया है। समय से भुगतान भी किया जा रहा है।
- अखिलेश कुमार चौबे, बीडीओ सिधौली
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परदेश से आने के बाद से कंप्यूटर चलाने वाले हाथों में फावड़ा है। रामेश्वर कहते हैं रोजगार गंवाने के बाद जब कुछ समझ नहीं आ रहा था, ऐसे में मनरेगा उनके लिए संकट मोचक साबित हो रही है। रामेश्वर की तरह परदेश से बेरोजगार होकर वापस आने वाले कई लोगों के लिए मनरेगा जीविकोपार्जन का जरिया बन ही है।
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मद्रास के कॉफी हाउस में शेफ का काम करने वाले प्रदीप कुमार की बात करें अथवा बंगलौर की एक नामचीन कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करने वाले अजय कुमार की। इन सबके लिए संकट की घड़ी में मनरेगा मददगार बन रही है। दरअसल, कोरोना संकट के इस दौर में परदेश कमाने गए तमाम लोग बेरोजगार होकर वापस लौटे हैं। जमापूंजी आखिर कब तक चलती। पाई-पाई को मोहताज हुए तो बड़ी-बड़ी कंपनियों में कंप्यूटर व लग्जरी वाहन चलाने वाले लोग भी मजबूरन फावड़ा चला रहे हैं।
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मनरेगा में 6,681 जरूरतमंदों को मिला रोजगार
ब्लॉक सिधौली की 86 ग्राम पंचायतों में से इन दिनों 84 ग्राम पंचायतों में 6,681 मजदूर मनरेगा में काम कर रहे हैं। इन गांवों में तालाब की खुदाई, समतलीकरण, संपर्क मार्ग का पटान, ड्रेन की खुदाई और चकमार्ग पर मिट्टी पटाई का काम चल रहा है। इस दौरान 6,512 परिवार में 7,911 मजदूरों क्रो 77170 मानव दिवस का भुगतान किया जा चुका है।
मनरेगा में डिमांड के अनुसार काम मुहैया कराया जा रहा है। परदेश से लौटकर आए लगभग 300 लोगों ने मनरेगा में काम किया है। समय से भुगतान भी किया जा रहा है।
- अखिलेश कुमार चौबे, बीडीओ सिधौली