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Sitapur News: ठंड से बचने के लिए जलाए पेट्रोमैक्स ने मौत की नींद सुलाया

Sun, 08 Jan 2023 11:10 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Jan 2023 11:10 PM IST
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Burned Petromax to avoid cold, slept to death
बिसवां के मोहल्ला झज्झर में हुई घटना के बाद घर के बाहर जमा लोगों की भीड़। -संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर/बिसवां। सर्द रात में ठंड से बचने के लिए जलाए गए पेट्रोमैक्स ने पूरे परिवार को मौत की नींद सुला दिया। शनिवार रात हंसी खुशी सोए दंपती व दो मासूम बच्चे रविवार की सुबह नहीं देख सके। सुबह पुलिस ने दरवाजा तोड़कर चारों के शव बाहर निकाले।
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मृतक आसिफ का परिवार मूलरूप से लखनऊ के हुसैनपुर में रहता है। करीब तीन साल पहले ही उन्होंने मोहल्ला झज्जर में अपना घर बनवाया था। उनकी पत्नी शगुफ्ता का मायका शहर कोतवाली इलाके में था। सुबह-सुबह आसिफ नमाज पढ़ने जाते थे। रविवार को वह नमाज पढ़ने के लिए उठे ही नहीं।
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सुबह दूध वाला आया था। उसने कई आवाजें लगाईं लेकिन दरवाजा नहीं खुला। जब वो चला गया तो पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई। उन्होंने शिक्षक राशिद को बुलाया। राशिद ने पुलिस को फोन किया। घटना की गंभीरता को भांपते हुए इंस्पेक्टर अनिल सिंह जब छत के रास्ते कमरे में पहुंचे तो उन्होंने पाया कि कमरा अंदर से बंद था।
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जब दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर से गैस की गंध बाहर आ गई। इतनी ज्यादा मात्रा में गैस कमरे में भरी थी कि पुलिसकर्मियों को मास्क लगाकर कमरे में प्रवेश करना पड़ा। इंस्पेक्टर ने पेट्रोमेक्स को बंद किया। जिसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
कमरे में खत्म हो गई ऑक्सीजन
रसायन विज्ञान के शिक्षक शिवद मिश्रा ने बताया कि सिलेंडर में आइसो ब्यूटेन गैस होती है। जब किसी बंद कमरे में गैस जलती है तो वह कमरे में मौजूद ऑक्सीजन को खत्म कर देती है। एक समय ऐसा आता है कि कमरे में सिर्फ कार्बनडाई ऑक्साइड गैस ही रह जाती है। ऑक्सीजन न होने से पेेट्रोमैक्स बुझ गया पर गैस का रिसाव बंद नहीं हुआ। आशंका है कि कमरे में आक्सीजन खत्म होने से ही चारों की मौत हुई होगी।
2006 में लगी थी नौकरी
आसिफ को वर्ष 2006 में नौकरी मिली थी। सदरपुर के गोडैचा स्थित इस्लामिया मदरसा में वे बाबू थे। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार में उनकी मां इशरत जहां, छोटा भाई वाकिफ, बड़ा भाई असीम हैं। इसके अलावा उसकी तीन बहनें रुखसाना, फरजाना और रेहाना हैं। उसकी पत्नी शगुफ्ता की मायका शहर कोतवाली के मोहल्ला गोड़ियनटोला में है। शगुफ्ता की एक बहन शबनम और दो भाई शोएब और शहाब हैं। सीतापुर के मोहल्ला झज्जर स्थित घर में दंपती अपने दो बच्चों के साथ रहते थे। तीन साल पहले ही उसने घर बनवाया था। इससे पहले वह किराए के मकान में रहते थे।

शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट के बाद ही घटना के कारणों का पता चल सकेगा। पीड़ित परिवार को सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
- रामभरत तिवारी, एडीएम
ऐसा न करें
जिला अस्पताल के डॉक्टर गौरव मिश्र ने बताया कि जानकारी के अभाव में ऐसी घटनाएं होती हैं। लोग बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सो जाते है। ऐसे में दम घुटने से उनकी मौत हो जाती है। लोगों को चाहिए कि जिस कमरे में सोए उस कमरे में हवा के आने-जाने का रास्ता अवश्य हो। खिड़की या कोई रोशनदान जरूर खुला हो। अंगीठी पर कोयला, लकड़ी और धुआं देने वाली कोई भी चीज जलाकर न सोए।
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