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पहले भी पाला बदलते रहे हैं भाजपा व बसपा के विधायक
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सीतापुर। कहते हैं कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं होता है। जी हां, विधायक रहते हुए भी पाला बदलने का ट्रेंड सीतापुर के माननीयों के लिए कोई नया नहीं है। ‘गोल्डन’ मौके की ताक और वक्त की नजाकत को भांपते हुए पहले भी कई माननीय सत्ता में रहते हुए नए घर की तलाश करके ठिकाना बनाने में कामयाब रहे हैं। सिर्फ ठिकाना बनाने में ही नहीं बल्कि अपने राजनीतिक सफर को भी सफल बनाने में कामयाब रहे हैं।
नगर विधायक राकेश राठौर और सिधौली विधायक हरगोविंद भार्गव शनिवार को सपा में शामिल हो गए। राकेश राठौर नगर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, जबकि हरगोविंद भार्गव बसपा के टिकट से चुनाव जीते थे, लेकिन दोनों ही माननीयों ने पार्टियों से अलग होकर समाजवादी पार्टी को अब नया घर बना लिया है।
अब इस नए घर से राजनीतिक सफर की डगर कितनी आसान होने वाली है, यह तो अभी कहना मुमकिन नहीं है, लेकिन जिस तरह से राकेश राठौर और विधायक हरगोविंद भार्गव ने सीटिंग विधायक रहते हुए पाला बदलकर नई पारी की शुरुआत की है, इनके नक्शेकदम पर पहले भी जिले के कई माननीय चले हैं और अपनी राजनीतिक सफर की राह को आसान बनाकर लंबी पारी खेलने में कामयाब हुए हैं।
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इसमें मौजूदा समय में महमूदाबाद के सपा विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा, मिश्रिख के भाजपा विधायक रामकृष्ण भार्गव और लहरपुर के पूर्व विधायक अनिल वर्मा का नाम शामिल है।
अनिल वर्मा ने 1993 में छोड़ी थी भाजपा
पूर्व विधायक अनिल वर्मा की बात की जाए तो उनकी माता चंद्रकली 1989 में भाजपा से विधायक बनी थी। इसके बाद 1991 में अनिल वर्मा भाजपा से विधायक बने। 6 दिसंबर 1992 में विधायक रहते हुए वह भाजपा को छोड़कर सपा में शामिल हो गए। 1993 में सपा के टिकट से लहरपुर से विधायक बने। 1996 तक विधायक रहे। इसके बाद से लगातार सपा में ही हैं। 2002 में सपा से दोबारा विधायक बने। 2017 में चुनाव हार गए थे।
2000 में बसपा छोड़ सपा में शामिल हुए थे रामकृष्ण
मिश्रिख से मौजूदा विधायक रामकृष्ण भार्गव की बात की जाए तो वह भी विधायक रहते हुए पाला बदल चुके हैं। बात उस वक्त की है, जब वह बसपा के विधायक थे, लेकिन मायावती की सरकार गिर गई थी। इसी बीच में वह पाला बदलकर सपा में शामिल हो गए थे। 1998 में बसपा के टिकट से चुनाव जीते थे, लेकिन 2000 में विधायक रहते हुए सपा में शामिल हुए। कुछ दिनों तक सपा में रहे, फिर बसपा में वापसी की। इसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव से पहले बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।
नरेंद्र वर्मा ने भाजपा छोड़ थामा था सपा का दामन
महमूदाबाद से सपा विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा भी भाजपा से विधायक रहते हुए पाला बदल चुके हैं। 1991, 1993 में वह भाजपा से विधायक बने थे। इसके बाद विधायक रहते हुए उन्होंने सपा ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद से वह लगातार विधायक बनते आ रहे हैं। अब तक छह बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। मोदी लहर में भी 2017 में उन्होंने सपा की झोली में महमूदाबाद की सीट डाल दी थी।
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नगर विधायक राकेश राठौर और सिधौली विधायक हरगोविंद भार्गव शनिवार को सपा में शामिल हो गए। राकेश राठौर नगर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, जबकि हरगोविंद भार्गव बसपा के टिकट से चुनाव जीते थे, लेकिन दोनों ही माननीयों ने पार्टियों से अलग होकर समाजवादी पार्टी को अब नया घर बना लिया है।
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अब इस नए घर से राजनीतिक सफर की डगर कितनी आसान होने वाली है, यह तो अभी कहना मुमकिन नहीं है, लेकिन जिस तरह से राकेश राठौर और विधायक हरगोविंद भार्गव ने सीटिंग विधायक रहते हुए पाला बदलकर नई पारी की शुरुआत की है, इनके नक्शेकदम पर पहले भी जिले के कई माननीय चले हैं और अपनी राजनीतिक सफर की राह को आसान बनाकर लंबी पारी खेलने में कामयाब हुए हैं।
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इसमें मौजूदा समय में महमूदाबाद के सपा विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा, मिश्रिख के भाजपा विधायक रामकृष्ण भार्गव और लहरपुर के पूर्व विधायक अनिल वर्मा का नाम शामिल है।
अनिल वर्मा ने 1993 में छोड़ी थी भाजपा
पूर्व विधायक अनिल वर्मा की बात की जाए तो उनकी माता चंद्रकली 1989 में भाजपा से विधायक बनी थी। इसके बाद 1991 में अनिल वर्मा भाजपा से विधायक बने। 6 दिसंबर 1992 में विधायक रहते हुए वह भाजपा को छोड़कर सपा में शामिल हो गए। 1993 में सपा के टिकट से लहरपुर से विधायक बने। 1996 तक विधायक रहे। इसके बाद से लगातार सपा में ही हैं। 2002 में सपा से दोबारा विधायक बने। 2017 में चुनाव हार गए थे।
2000 में बसपा छोड़ सपा में शामिल हुए थे रामकृष्ण
मिश्रिख से मौजूदा विधायक रामकृष्ण भार्गव की बात की जाए तो वह भी विधायक रहते हुए पाला बदल चुके हैं। बात उस वक्त की है, जब वह बसपा के विधायक थे, लेकिन मायावती की सरकार गिर गई थी। इसी बीच में वह पाला बदलकर सपा में शामिल हो गए थे। 1998 में बसपा के टिकट से चुनाव जीते थे, लेकिन 2000 में विधायक रहते हुए सपा में शामिल हुए। कुछ दिनों तक सपा में रहे, फिर बसपा में वापसी की। इसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव से पहले बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।
नरेंद्र वर्मा ने भाजपा छोड़ थामा था सपा का दामन
महमूदाबाद से सपा विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा भी भाजपा से विधायक रहते हुए पाला बदल चुके हैं। 1991, 1993 में वह भाजपा से विधायक बने थे। इसके बाद विधायक रहते हुए उन्होंने सपा ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद से वह लगातार विधायक बनते आ रहे हैं। अब तक छह बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। मोदी लहर में भी 2017 में उन्होंने सपा की झोली में महमूदाबाद की सीट डाल दी थी।