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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Becoming of 55 feet high Ravana

55 फीट ऊंचा बन रहा रावण का पुतला

Mon, 19 Oct 2015 11:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर Updated Mon, 19 Oct 2015 11:09 PM IST
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दशहरा पर्व करीब आ गया है, इसको लेकर रामलीला का दौर शुरू हो गया है। रावण दहन की तैयारियां भी प्रारंभ कर दी गई है। रामलीला स्थलों पर रावण के पुतलों को बनाने का काम भी शुरू हो गया है। यहां सदर बाजार में रावण के पुतले की ऊंचाई सबसे अधिक है। जिसको देखने के लिए दूर दराज इलाके से हजारों की संख्या में लोग मेला मैदान पहुंच रहे हैं।

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शहर में तरीनपुर, लालबाग व सदर बाजार में रामलीला का कार्यक्रम हो रहा है।

इन्ही स्थानों पर रावण के दहन का आयोजन किया जाएगा। तरीनपुर में शाहजहांपुर जिले के संजय रावण का पुतला बनाने के लिए बुलाए गए हैं। संजय कहते हैं कि एक पुतले में करीब 30 हजार रुपये की लागत आती है। इनमें 10 से 12 हजार रुपये कीमत की आतिशबाजी लगती है।
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लालबाग में शहर के मोहल्ला दुर्गा पुरवा निवासी हरिश्चंद्र व कांशीराम कॉलोनी निवासी नेता रावण के पुतले का निर्माण कर रहे हैं। यहां भी पुतले की लागत 25 से 30 हजार रुपये बताई गई। तरीनपुर व लालबाग में बनने वाले रावण के पुतलों की लंबाई 40 फीट के करीब बताई जा रही है।
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शहर के सदर बाजार में भी रावण के पुतले का निर्माण किया जा रहा है।  आयोजक विश्राम सागर राठौर ने बताया कि इस पुतले का निर्माण मोहल्ले के ही लोग करते हैं। इस पुतले की लागत करीब 32 हजार रुपये है। इसकी ऊंचाई करीब 55 फीट है। ऊंचाई की वजह से ही यहां का दशहरा मेला विख्यात है।

ऊंचे रावण को देखने के लिए दूर दूर से लोग सदर बाजार पहुंचते हैं। सबसे अहम बात यह है कि इन पुतलों में आतिशबाजी के साथ  इलेक्ट्रिक बल्ब का भी इस्तेमाल किया जाता है। लहरपुर कस्बे में 30 फीट का पुतला तैयार किया जाता है। जबकि बिसवां व महमूदाबाद कस्बे में भी रावण के पुतलों की ऊंचाई 25 से 30 फीट के बीच है। वहां भी पुतलों के निर्माण का काम चल रहा है।

रावण के पुतले के साथ मेघनाथ व कुंभकर्ण के पुतलों का निर्माण किया जाता है। रावण के पुतले के साथ कुंभकर्ण व  मेघनाथ के पुतले का भी दहन किया जाता है। कुंभकर्ण व मेघनाथ के पुतलों की ऊंचाई रावण के पुतले से कम होती है।


ज्योतिष श्रीपति मिश्र ने कहा, दशहरा के दिन रावण के पुतले का दहन शाम साढ़े आठ बजे के बाद हो सकेगा। रात के 8:45 मिनट पर भद्रा योग समाप्त होगा। इसके बाद ही रावण पुतले का दहन होगा।

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