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Sitapur News: 41 साल बाद भूमाफिया के कब्जे से मुक्त हुई 54 बीघा सरकारी जमीन

Fri, 28 Mar 2025 11:32 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Fri, 28 Mar 2025 11:32 PM IST
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After 41 years, 54 bigha government land was freed from the clutches of land mafia
जमीन पर लगाया गया सरकारी बोर्ड।
सीतापुर। करीब 41 वर्षाें बाद सदर तहसील की पारा ग्राम सभा की 54 बीघा जमीन भूमाफिया के चंगुल से मुक्त हो पाई है। वर्ष 1984 से इस जमीन पर कब्जा चला आ रहा था। हाईकोर्ट की एकल खंडपीठ ने शासन के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए इसे नजीर के रूप में दर्ज किया है। वहीं, शुक्रवार को तहसील सदर प्रशासन ने जमीन पर सरकारी बोर्ड लगाकर इसे कब्जामुक्त कराया है।
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बता दें कि तहसील सदर की ग्राम पंचायत पारा में स्थित खाता संख्या 218 की 4.312 हेक्टेयर भूमि को लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ बेंच की न्यामूर्ति जसप्रीत सिंह की एकल खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस 54 बीघा भूखंड का बाजार मूल्य करीब 6 करोड़ रुपये है।
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उपजिलाधिकारी सदर अभिनव यादव ने बताया कि पारा ग्राम समाज की 218 खाता संख्या रुदा सिंह के नाम दर्ज थी। वर्ष 1979 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद यह भूखंड प्रधान के प्रस्ताव पर अभिलेखों में ग्राम सभा के नाम हो गया। वहीं, चकबंदी प्रक्रिया के दौरान कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर भूमाफिया राम कुमार शुक्ला ने अपने सहयोगी चंदन सिंह उर्फ चन्द्रपाल सिंह को रुदा सिंह काे भांजा बनाकर पेश किया।
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इसके आधार पर अपने पक्ष में वरासत आदेश पारित करा लिया। इसके बाद चंदन सिंह ने कुल आठ बैनामों के माध्यम से भूमि का बैनामा भूमाफिया राम कुमार शुक्ला के परिजनों के पक्ष में कर दिया। इसमें एक 12 वर्षीय बालक भी शामिल रहा। इसके बाद इस प्रकरण में उप संचालक चकबंदी ने वर्ष 2024 में निर्णय लेकर शासन के पक्ष में भूखंड कर दिया।


चंदन सिंह ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इस पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की एकल खंडपीठ ने शासन के पक्ष में आदेश पारित करते हुए ग्राम सभा के नाम भूमि दर्ज कराने का निर्णय दिया। कोर्ट के आदेश पर तहसीलदार सदर अतुल सेन सिंह की टीम ने शुक्रवार को पारा गांव जाकर जमीन पर प्रशासन का बोर्ड लगवा दिया।
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