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गांजर के 36 गांवों में घुसा पानी
Amar ujala Bureau
Updated Mon, 18 Jul 2016 11:36 PM IST
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गांजर क्षेत्र में मुसीबत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। यहां घाघरा इस कदर उफनाई की रातों रात रेउसा के 26 और रामपुर मथुरा के 10 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इससे बाढ़ की चपेट में आने वाले गांवों की संख्या 36 हो गई।
पानी का अचानक रविवार रात में भर जाने से लोगों को घरों से सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से करीब 102 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। करीब 50 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच भी चुका है।
घाघरा व शारदा बैराजों से करीब तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे हालात और बिगड़ने की आशंका है। वहीं, प्रशासन मदद के नाम पर आंखें मूंदे बैठा है और पूरे क्षेत्र में हाय तौबा मची हुई है। अभी तक महज कोनी व फौजदार पुरवा गांव में बाढ़ का पानी घुसा था।
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जबकि 11 गांवों के आसपास पानी मंडरा रहा था। रविवार रात रेउसा क्षेत्र के निर्मल पुरवा, गोड़ियन पुरवा, दुर्गा पुरवा, परमेश्वरदीन पुरवा, जैतहिया, रामलाल पुरवा, ठेकेदार पुरवा, सोमवारी पुरवा, सलामतजान पुरवा, बिल्लर पुरवा, दर्जिन रेती, भजन पुरवा, बैरागी पुरवा, नगीना पुरवा, पासिन पुरवा, सिसैया बाजार, चंद्रभाल पुरवा आदि 26 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया।
गांव के लोगों की माने तो जिस दौरान बाढ़ का पानी गांव में आया, उस दौरान सभी सो रहे थे। अचानक बिस्तर गीले होते ही लोग समझ गए कि बाढ़ आ गई। आनन-फानन में लोग जान बचाने में जुट गए।
किसी ने खुद व परिवार को छप्पर पर पहुंचाया तो कोई पक्के मकान की छत पर चढ़ गया। रात के समय अंधेरा होने से लोग गांव से निकलने की हिम्मत भी न जुटा सके। गांव के सारे मार्ग जलमग्न हो गए। प्रमुख मार्गों पर भी पानी भर गया है। गांव के लोग मदद की बाट जोह रहे हैं।
नाव की व्यवस्था न होने के कारण वे बाढ़ में फंसे हुए हैं। उधर, रामपुर मथुरा क्षेत्र में पंडित पुरवा, कनरखी, पासिन पुरवा, नया गांव, सोती पुरवा, अर्जुनपुरवा, बंगाली पुरवा, धंधी रेती, दुबे पुरवा, हरपालपुरवा आदि 10 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
कुछ परिवारों ने घर छोड़ दिया है, जबकि कई परिवार अब भी बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं। उधर, घाघरा व शारदा बैराजों से 2 लाख 90 हजार 157 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसकी वजह से हालात और भी बिगड़ने के आसार नजर आ रहे हैं।
कोनी गांव में केशरीलाल का घर सोमवार को कटकर बाढ़ में बह गया है। गांव के कई अन्य घर कटान के मुहाने पर खड़े हैं। तटीय क्षेत्र के परिवारों ने घरों को खाली कर दिया है। वे सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर गए हैं।
प्रशासन ने पचीसा गांव के 50 परिवारों को ठेकेदार पुरवा के पास बसाने का दावा किया था। यह भूमि विवादित थी, जिसकी वजह से कुछ ही परिवार यहां पर बस पाए। बावजूद इसके उस स्थान पर भी मुसीबत आ गई है। बाढ़ से वह स्थल भी डूब गया है। छप्पर बाढ़ के पानी पर तैर रहे हैं।
गांजरी क्षेत्र में लोग जान बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। कोई छतों पर बैठा है तो कोई तैर कर बाढ़ का पानी पार कर रहा है। सिर पर गठरी लादे सैकड़ों लोग बाढ़ के पानी को पार कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ जाते नजर आ रहे हैं।
इतनी मुसीबत आने के बावजूद प्रशासन बेफिक्र है। यही वजह है कि अभी तक कहीं बाढ़ राहत चौकियां नहीं बनाई गई हैं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर मदद किस स्तर से और कहां की जा रही है।
बाढ़ग्रस्त इलाके का हाल ये है कि खाना खाने की कौन कहे, खाना बनाने तक के लिए ठौर नहीं है। हालत ये है कि पक्के मकानों की छते ही रसोई का काम कर रही हैं। अगर एक भी पक्का मकान है, तो दोपहर के वक्त वह कई चूल्हों की रसोई का रूप ले रहा है।
जिन रास्तों पर कुछ दिन पहले पैदल चला जाता था, वहां अब नावें चल रही हैं। रास्ते अब पानी में समा चुके हैं। जहां घुटनों से लेकर डुबाव तक का पानी है। ऐसे में नाव अगर न हुई तो जान का जोखिम अधिक रहेगा। इसलिए पूरे इलाके में बस नावों से ही आवागमन हो रहा है।
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पानी का अचानक रविवार रात में भर जाने से लोगों को घरों से सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से करीब 102 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। करीब 50 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच भी चुका है।
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घाघरा व शारदा बैराजों से करीब तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे हालात और बिगड़ने की आशंका है। वहीं, प्रशासन मदद के नाम पर आंखें मूंदे बैठा है और पूरे क्षेत्र में हाय तौबा मची हुई है। अभी तक महज कोनी व फौजदार पुरवा गांव में बाढ़ का पानी घुसा था।
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जबकि 11 गांवों के आसपास पानी मंडरा रहा था। रविवार रात रेउसा क्षेत्र के निर्मल पुरवा, गोड़ियन पुरवा, दुर्गा पुरवा, परमेश्वरदीन पुरवा, जैतहिया, रामलाल पुरवा, ठेकेदार पुरवा, सोमवारी पुरवा, सलामतजान पुरवा, बिल्लर पुरवा, दर्जिन रेती, भजन पुरवा, बैरागी पुरवा, नगीना पुरवा, पासिन पुरवा, सिसैया बाजार, चंद्रभाल पुरवा आदि 26 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया।
गांव के लोगों की माने तो जिस दौरान बाढ़ का पानी गांव में आया, उस दौरान सभी सो रहे थे। अचानक बिस्तर गीले होते ही लोग समझ गए कि बाढ़ आ गई। आनन-फानन में लोग जान बचाने में जुट गए।
किसी ने खुद व परिवार को छप्पर पर पहुंचाया तो कोई पक्के मकान की छत पर चढ़ गया। रात के समय अंधेरा होने से लोग गांव से निकलने की हिम्मत भी न जुटा सके। गांव के सारे मार्ग जलमग्न हो गए। प्रमुख मार्गों पर भी पानी भर गया है। गांव के लोग मदद की बाट जोह रहे हैं।
नाव की व्यवस्था न होने के कारण वे बाढ़ में फंसे हुए हैं। उधर, रामपुर मथुरा क्षेत्र में पंडित पुरवा, कनरखी, पासिन पुरवा, नया गांव, सोती पुरवा, अर्जुनपुरवा, बंगाली पुरवा, धंधी रेती, दुबे पुरवा, हरपालपुरवा आदि 10 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
कुछ परिवारों ने घर छोड़ दिया है, जबकि कई परिवार अब भी बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं। उधर, घाघरा व शारदा बैराजों से 2 लाख 90 हजार 157 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसकी वजह से हालात और भी बिगड़ने के आसार नजर आ रहे हैं।
कोनी गांव में केशरीलाल का घर सोमवार को कटकर बाढ़ में बह गया है। गांव के कई अन्य घर कटान के मुहाने पर खड़े हैं। तटीय क्षेत्र के परिवारों ने घरों को खाली कर दिया है। वे सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर गए हैं।
प्रशासन ने पचीसा गांव के 50 परिवारों को ठेकेदार पुरवा के पास बसाने का दावा किया था। यह भूमि विवादित थी, जिसकी वजह से कुछ ही परिवार यहां पर बस पाए। बावजूद इसके उस स्थान पर भी मुसीबत आ गई है। बाढ़ से वह स्थल भी डूब गया है। छप्पर बाढ़ के पानी पर तैर रहे हैं।
गांजरी क्षेत्र में लोग जान बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। कोई छतों पर बैठा है तो कोई तैर कर बाढ़ का पानी पार कर रहा है। सिर पर गठरी लादे सैकड़ों लोग बाढ़ के पानी को पार कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ जाते नजर आ रहे हैं।
इतनी मुसीबत आने के बावजूद प्रशासन बेफिक्र है। यही वजह है कि अभी तक कहीं बाढ़ राहत चौकियां नहीं बनाई गई हैं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर मदद किस स्तर से और कहां की जा रही है।
बाढ़ग्रस्त इलाके का हाल ये है कि खाना खाने की कौन कहे, खाना बनाने तक के लिए ठौर नहीं है। हालत ये है कि पक्के मकानों की छते ही रसोई का काम कर रही हैं। अगर एक भी पक्का मकान है, तो दोपहर के वक्त वह कई चूल्हों की रसोई का रूप ले रहा है।
जिन रास्तों पर कुछ दिन पहले पैदल चला जाता था, वहां अब नावें चल रही हैं। रास्ते अब पानी में समा चुके हैं। जहां घुटनों से लेकर डुबाव तक का पानी है। ऐसे में नाव अगर न हुई तो जान का जोखिम अधिक रहेगा। इसलिए पूरे इलाके में बस नावों से ही आवागमन हो रहा है।