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दो अदद फूल को तरसती रही शहीद अब्दुल हमीद की प्रतिमा
Updated Mon, 11 Sep 2017 12:33 AM IST
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दो अदद फूल को तरसती रही
सीतापुर। परमवीर चक्र विजेता वीर शहीद अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि को भी लोग भूल गए। रविवार को पुण्यतिथि पर उन्हें दो अदद फूल भी नसीब नहीं हुए।
जबकि शहीद अब्दुल हमीद ने वर्ष 1965 में पाकिस्तान के टैंकों को ध्वस्त कर भारत को जीत दिलाई थी। जिले के लोग वीर अब्दुल हमीद की शहादत को याद रखें, इसको लेकर प्रशासन ने मशहूर सीतापुर आंख अस्पताल द्वार पर वीर अब्दुल हमीद के नाम से पार्क बना रखा है।
इसी पार्क में वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा भी मौजूद है। समय समय पर विभिन्न संस्थाएं इस पार्क में पहुंचकर शहीदों को नमन करती हैं।
रविवार को वीर अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि थी। ऐसे में वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर दो फूल की उम्मीद थी। सुबह से लेकर शाम हो गई, लेकिन लोगों को 1965 केे रणबांकुरे की शहादत याद ही नहीं रही।
यही वजह रही कि वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पुुण्यतिथि के दिन भी दो फूल को तरसती रही।
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सीतापुर। परमवीर चक्र विजेता वीर शहीद अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि को भी लोग भूल गए। रविवार को पुण्यतिथि पर उन्हें दो अदद फूल भी नसीब नहीं हुए।
जबकि शहीद अब्दुल हमीद ने वर्ष 1965 में पाकिस्तान के टैंकों को ध्वस्त कर भारत को जीत दिलाई थी। जिले के लोग वीर अब्दुल हमीद की शहादत को याद रखें, इसको लेकर प्रशासन ने मशहूर सीतापुर आंख अस्पताल द्वार पर वीर अब्दुल हमीद के नाम से पार्क बना रखा है।
इसी पार्क में वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा भी मौजूद है। समय समय पर विभिन्न संस्थाएं इस पार्क में पहुंचकर शहीदों को नमन करती हैं।
रविवार को वीर अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि थी। ऐसे में वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर दो फूल की उम्मीद थी। सुबह से लेकर शाम हो गई, लेकिन लोगों को 1965 केे रणबांकुरे की शहादत याद ही नहीं रही।
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यही वजह रही कि वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पुुण्यतिथि के दिन भी दो फूल को तरसती रही।