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घाघरा में 25 बीघा खेत समाया
Amarujala Bureau
Updated Thu, 23 Jun 2016 11:00 PM IST
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घाघरा नदी से कटान
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घाघरा व शारदा बैराज से 61317 क्यूसेक पानी छोड़ने से घाघरा में उफान आ गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने से रामपुर मथुरा के छह गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। यहां नदी ने खेतों के आसपास की जमीन को लीलना शुरू कर दिया है। अब तक 25 बीघा जमीन समा गई है। ऐसे में नदी के तटवर्ती गांव के ग्रामीण सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने के लिए अपने आशियाने उजाड़ने लगे हैं। उधर, घाघरा के बढ़े जलस्तर से प्रशासन भी बेचैन है।
घाघरा व शारदा बैराज से 61317 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद घाघरा का जलस्तर करीब तीन मीटर बढ़ गया है। जिसके चलते गांजर में हालात भयावह होने लगे हैं। इलाके से होकर बहने वाली घाघरा का जलस्तर बुधवार से बढ़ना शुरू हो गया, जो गुरुवार को भी जारी रहा। नदी के पानी ने तेजी से कृषि भूमि को लीलना शुरू कर दिया है।
नदी का रुख अब आबादी की ओर है। अब तक उफनाई घाघरा तकरीबन 25 बीघा खेत लील चुकी है। जबकि अंगरौरा, दूबेनपुरवा, बंगालीपुरवा, कनरखी, शुकुलपुरवा, अर्जनपुरवा, मिश्रिनपुरवा तथा छोटेपुरवा आदि गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
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नदी के तटवर्ती गांव अंगरौरा व दूबेनपुरवा के लोग बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए पलायन की कवायद में जुट गए हैं। ग्रामीणों ने अपने आशियाने उजाड़ने शुरू कर दिए हैं। प्रशासनिक अफसर क्षेत्र का दौरा कर हालात पर नजर रख रहे हैं।
तटवर्ती गांवों के लोग पलायन की कवायद में जुटे
अंगरौरा व दूबेनपुरवा घाघरा से महज सौ मीटर की दूरी पर बसा है। नदी का तटवर्ती गांव होने से बाढ़ व कटान का सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं गांवों पर मंडरा रहा है। हालात खराब देख यहां के ग्रामीणों ने पलायन की तैयारी शुरू कर दी है। गुरुवार को अयोध्या प्रसाद, लखन, दीपक, परशुराम, रामपाल, रिंकू, सीमा, रामऔतार और फूलचंद अपने छप्पर व अन्य जरूरी चीजें गांव से हटाकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा रहे हैं। यह लोग तटबंध के किनारे डेरा जमाएंगे।
इतना छोड़ा गया पानी
शारदा बैराज -17155 क्यूसेक
घाघरा बैराज - 44162 क्यूसेक
बाढ़ राहत चौकियां सूनी पड़ीं
इलाके में घाघरा में बढ़ा पानी कहर मचा रहा है। कटान शुरू होने के साथ ही कई गांवों पर खतरा मंडराने लगा है, लेकिन बाढ़ राहत चौकियों पर अभी तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है। यहां रामपुर मथुरा, गोड़ैचा, भगवतीपुर तथा अर्जुनपुरवा में बाढ़ राहत चौकी स्थापित हैं पर व्यवस्था के अभाव में सारी चौकियां अभी सूनी पड़ीं हैं।
बाक्स
एसडीएम ने दौरा कर हालातों का जायजा लिया
एसडीएम महमूदाबाद अजय कुमार सिंह ने गुरुवार को अंगरौरा का दौरा कर हालातों का जायजा लिया। संभावित खतरे को देखते हुए उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि जिन्हें जमीन का पट्टा मिल चुका है, वे लोग वहां चले जाएं। जिनको अभी पट्टा नहीं मिल सका है, उन्हें जल्द पट्टा दिलाया जाएगा।
कोनी व निर्मलपुरवा के बीच 15 बीघा खेत जलमग्न
मारूबेहड़। रेउसा ब्लॉक में गुरुवार को घाघरा का जलस्तर थम गया। लेकिन लहरों ने जमीन का कटान षुरू कर दिया है। कोनी व निर्मलपुरवा के बीच करीब 15 बीघा खेत जल-मग्न हो गए हैं। जबकि पचीसा, चन्द्रभालपुरवा, सिसैया बाजार निर्मलपुरवा व कोनी आदि गांव कटान के मुहाने पर आ गए हैं। बाढ़ के खतरे को देखते हुए इन गांवों के ग्रामीणों ने सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।
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घाघरा व शारदा बैराज से 61317 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद घाघरा का जलस्तर करीब तीन मीटर बढ़ गया है। जिसके चलते गांजर में हालात भयावह होने लगे हैं। इलाके से होकर बहने वाली घाघरा का जलस्तर बुधवार से बढ़ना शुरू हो गया, जो गुरुवार को भी जारी रहा। नदी के पानी ने तेजी से कृषि भूमि को लीलना शुरू कर दिया है।
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नदी का रुख अब आबादी की ओर है। अब तक उफनाई घाघरा तकरीबन 25 बीघा खेत लील चुकी है। जबकि अंगरौरा, दूबेनपुरवा, बंगालीपुरवा, कनरखी, शुकुलपुरवा, अर्जनपुरवा, मिश्रिनपुरवा तथा छोटेपुरवा आदि गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
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नदी के तटवर्ती गांव अंगरौरा व दूबेनपुरवा के लोग बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए पलायन की कवायद में जुट गए हैं। ग्रामीणों ने अपने आशियाने उजाड़ने शुरू कर दिए हैं। प्रशासनिक अफसर क्षेत्र का दौरा कर हालात पर नजर रख रहे हैं।
तटवर्ती गांवों के लोग पलायन की कवायद में जुटे
अंगरौरा व दूबेनपुरवा घाघरा से महज सौ मीटर की दूरी पर बसा है। नदी का तटवर्ती गांव होने से बाढ़ व कटान का सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं गांवों पर मंडरा रहा है। हालात खराब देख यहां के ग्रामीणों ने पलायन की तैयारी शुरू कर दी है। गुरुवार को अयोध्या प्रसाद, लखन, दीपक, परशुराम, रामपाल, रिंकू, सीमा, रामऔतार और फूलचंद अपने छप्पर व अन्य जरूरी चीजें गांव से हटाकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा रहे हैं। यह लोग तटबंध के किनारे डेरा जमाएंगे।
इतना छोड़ा गया पानी
शारदा बैराज -17155 क्यूसेक
घाघरा बैराज - 44162 क्यूसेक
बाढ़ राहत चौकियां सूनी पड़ीं
इलाके में घाघरा में बढ़ा पानी कहर मचा रहा है। कटान शुरू होने के साथ ही कई गांवों पर खतरा मंडराने लगा है, लेकिन बाढ़ राहत चौकियों पर अभी तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है। यहां रामपुर मथुरा, गोड़ैचा, भगवतीपुर तथा अर्जुनपुरवा में बाढ़ राहत चौकी स्थापित हैं पर व्यवस्था के अभाव में सारी चौकियां अभी सूनी पड़ीं हैं।
बाक्स
एसडीएम ने दौरा कर हालातों का जायजा लिया
एसडीएम महमूदाबाद अजय कुमार सिंह ने गुरुवार को अंगरौरा का दौरा कर हालातों का जायजा लिया। संभावित खतरे को देखते हुए उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि जिन्हें जमीन का पट्टा मिल चुका है, वे लोग वहां चले जाएं। जिनको अभी पट्टा नहीं मिल सका है, उन्हें जल्द पट्टा दिलाया जाएगा।
कोनी व निर्मलपुरवा के बीच 15 बीघा खेत जलमग्न
मारूबेहड़। रेउसा ब्लॉक में गुरुवार को घाघरा का जलस्तर थम गया। लेकिन लहरों ने जमीन का कटान षुरू कर दिया है। कोनी व निर्मलपुरवा के बीच करीब 15 बीघा खेत जल-मग्न हो गए हैं। जबकि पचीसा, चन्द्रभालपुरवा, सिसैया बाजार निर्मलपुरवा व कोनी आदि गांव कटान के मुहाने पर आ गए हैं। बाढ़ के खतरे को देखते हुए इन गांवों के ग्रामीणों ने सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।