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घाघरा में समाई 22 बीघा खेतिहर जमीन
Updated Tue, 10 Jul 2018 12:33 AM IST
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पहाड़ों पर बारिश से जलस्तर बढ़ने के आसार, एक-दो दिन में फिर उफना सकती नदी
रेउसा (सीतापुर)। जिले के गांजरी इलाके में घाघरा का जलस्तर घट गया है, लेकिन नदी तेजी से कटान कर रही है। रविवार की रात नदी ने 22 बीघा कृषि योग्य जमीन को निगल लिया है। इधर पहाड़ों पर होने वाली बारिश से नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में घाघरा का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। इससे बाढ़ जैसे हालात भी बन सकते हैं। जिसको लेकर प्रशासन अलर्ट व मुस्तैद नजर आ रहा है। रविवार की रात घाघरा ने लोधपुरवा व परमेश्वर पुरवा के निकट तेजी से कटान किया।
इससे गांव के निवासी साधूराम, पेशकार, विश्राम, बुधराम, पैकरमा, पुत्ती सेठ आदि ग्रामीणों के करीब 22 बीघा खेत कटकर नदी में समा गए। इधर सोमवार को जलस्तर में मामूली रूप से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उधर शारदा व घाघरा बैराजों से 38670 क्यूसेेक पानी छोड़ा गया है।
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यह पानी लगातार छोड़ा जा रहा है, इससे जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी होने के आसार बताए जा रहे हैं। लेकिन पहाड़ों से अच्छी खबर नहीं मिल रही है। बताया जा रहा है कि वहां हो रही भारी बारिश के कारण जलस्तर बढ़ सकता है। पहाड़ों पर बारिश का पानी बनबसा बैराज में जमा हो रहा है।
सोमवार को बनबसा बैराज से 92944 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना बताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि जिस तरह से पहाड़ों पर बारिश हो रही है, उससे बनबसा बैराज से अधिक पानी छोड़ा जा सकता है। जिसकी वजह से आने वाले दिनों में घाघरा के जलस्तर में और इजाफा हो सकता है।
हालांकि जिला प्रशासन इस अभी बाढ़ जैसे हालात न होने की बात कह रहा है। प्रशासन का कहना है कि इसके बावजूद सतर्कता बरती जा रही है। मदद के सारे इंतजाम कर लिए गए हैं। घाघरा के टापू से लेकर तटीय इलाकों तक के बाशिंदों को अलर्ट कर दिया गया है। बहुत से परिवार टापू छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर जा भी रहे हैं।
मारू बेहड़ पहुंच रहे परिवार
तटीय क्षेत्र के बाशिंदे कटान के भय से झोपड़ियों को उजाड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकल रहे हैं। ऐसे में पीड़ितों के लिए मारूबेहड़ चौराहा सुरक्षित ठिकाना बन रहा है। यह ऐसा स्थान है जो बहराइच रोड पर पड़ता है और वहां पर बाजार भी है। इस वजह से लोगों के लिए मारू बेहड़ सबसे मुफीद जगह बन रहा है। लोग झोपड़ियों को लेकर मारू बेहड़ पहुंच रहे हैं और सड़क के किनारे आशियाना बना रहे हैं।
बाढ़ से निपटने को तैयार है प्रशासन
बाढ़ जैसे हालात नहीं है, नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदों को अलर्ट कर दिया गया है। बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार है।
-शशिभूषण राय, एसडीएम
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रेउसा (सीतापुर)। जिले के गांजरी इलाके में घाघरा का जलस्तर घट गया है, लेकिन नदी तेजी से कटान कर रही है। रविवार की रात नदी ने 22 बीघा कृषि योग्य जमीन को निगल लिया है। इधर पहाड़ों पर होने वाली बारिश से नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में घाघरा का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। इससे बाढ़ जैसे हालात भी बन सकते हैं। जिसको लेकर प्रशासन अलर्ट व मुस्तैद नजर आ रहा है। रविवार की रात घाघरा ने लोधपुरवा व परमेश्वर पुरवा के निकट तेजी से कटान किया।
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इससे गांव के निवासी साधूराम, पेशकार, विश्राम, बुधराम, पैकरमा, पुत्ती सेठ आदि ग्रामीणों के करीब 22 बीघा खेत कटकर नदी में समा गए। इधर सोमवार को जलस्तर में मामूली रूप से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उधर शारदा व घाघरा बैराजों से 38670 क्यूसेेक पानी छोड़ा गया है।
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यह पानी लगातार छोड़ा जा रहा है, इससे जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी होने के आसार बताए जा रहे हैं। लेकिन पहाड़ों से अच्छी खबर नहीं मिल रही है। बताया जा रहा है कि वहां हो रही भारी बारिश के कारण जलस्तर बढ़ सकता है। पहाड़ों पर बारिश का पानी बनबसा बैराज में जमा हो रहा है।
सोमवार को बनबसा बैराज से 92944 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना बताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि जिस तरह से पहाड़ों पर बारिश हो रही है, उससे बनबसा बैराज से अधिक पानी छोड़ा जा सकता है। जिसकी वजह से आने वाले दिनों में घाघरा के जलस्तर में और इजाफा हो सकता है।
हालांकि जिला प्रशासन इस अभी बाढ़ जैसे हालात न होने की बात कह रहा है। प्रशासन का कहना है कि इसके बावजूद सतर्कता बरती जा रही है। मदद के सारे इंतजाम कर लिए गए हैं। घाघरा के टापू से लेकर तटीय इलाकों तक के बाशिंदों को अलर्ट कर दिया गया है। बहुत से परिवार टापू छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर जा भी रहे हैं।
मारू बेहड़ पहुंच रहे परिवार
तटीय क्षेत्र के बाशिंदे कटान के भय से झोपड़ियों को उजाड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकल रहे हैं। ऐसे में पीड़ितों के लिए मारूबेहड़ चौराहा सुरक्षित ठिकाना बन रहा है। यह ऐसा स्थान है जो बहराइच रोड पर पड़ता है और वहां पर बाजार भी है। इस वजह से लोगों के लिए मारू बेहड़ सबसे मुफीद जगह बन रहा है। लोग झोपड़ियों को लेकर मारू बेहड़ पहुंच रहे हैं और सड़क के किनारे आशियाना बना रहे हैं।
बाढ़ से निपटने को तैयार है प्रशासन
बाढ़ जैसे हालात नहीं है, नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदों को अलर्ट कर दिया गया है। बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार है।
-शशिभूषण राय, एसडीएम