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ओडीएफ ग्राम पुरस्कार को 54 गांवों ने की दावेदारी
Updated Wed, 04 Jul 2018 11:48 PM IST
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गांव के विकास में किया जा सकेगा पुरस्कार की रकम का इस्तेमाल
सीतापुर। जिले के 54 गांवों ने चालू वित्तीय वर्ष में ओडीएफ ग्राम पुरस्कार के लिए दावेदारी की है। चयनित गांवों को शासन से नकद पुरस्कार मिलेगा। यह रकम एक लाख से 5 लाख रुपये तक हो सकती है। इस रकम का इस्तेमाल गांव के विकास में किया जाएगा। दावेदारी के बाद अब शासन स्तर से पुरस्कार के लिए गांव चयनित किए जाने का इंतजार है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत गांवों को खुले में शौच की प्रथा को समाप्त करने के लिए शौचालय बनवाने के लिए सरकार प्रोत्साहन राशि देती है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में बेसलाइन सर्वे के मुताबिक 3 लाख 62 हजार 565 शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिले में इस वित्तीय वर्ष में अब तक 68 लाख की राशि प्राप्त हुई है। जिसके सापेक्ष 60 हजार 639 शौचालयों के निर्माण एवं गत वर्ष के अवशेष शौचालयों की राशि लाभार्थियों को हस्तांतरित की गई है। इसके सापेक्ष स्वयं संसाधन एवं स्वीकृति पत्र के क्रम में निर्मित शौचालयों को सम्मिलित करते हुए 44 हजार 550 शौचालयों का निर्माण पूरा करने का दावा पंचायती राज विभाग कर रहा है।
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शेष शौचालयों का निर्माण प्रगति पर होने की बात कही जा रही है। पंचायती राज विभाग के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 54 गांव ओडीएफ घोषित किए गए हैं। इनको सम्मिलित करते हुए जिले के कुल 223 गांव खुले में शौचमुक्त घोषित हो गए हैं। इस वित्तीय वर्ष ओडीएफ होने वाले 54 गांवों ने ओडीएफ ग्राम पुरस्कार के लिए दावेदारी की है।
सबसे ज्यादा पहला ब्लॉक से दावेदारी
ओडीएफ ग्राम पुरस्कार के लिए सबसे ज्यादा ब्लॉक पहला से 13 गांवों ने दावेदारी की है। जबकि सबसे कम बिसवां ब्लॉक से सिर्फ एक गांव ने दावेदारी की है।
इसके अलावा ब्लॉक ऐलिया के 4, बेहटा के 2, गोंदलामऊ के 3, हरगांव के 4, कसमंडा के 2, खैराबाद के 3, लहरपुर के 2, मछरेहटा के 5, महमूदाबाद के 5, मिश्रिख के 3, पिसावां के 3 और रामपुर मथुरा के 4 गांव इस दावेदारी में शामिल हैं। वहीं सिधौली, सकरन, रेउसा, परसेंडी तथा महोली ब्लॉक से किसी गांव ने दावेदारी नहीं की है।
आबादी के मुताबिक तय होती पुरस्कार की श्रेणी
चालू वित्तीय वर्ष में 54 गांवों ने ओडीएफ ग्राम पुरस्कार के लिए दावेदारी की है। शासन से चयनित गांवों को एक लाख से 5 लाख रुपये तक का पुरस्कार मिलता है। पुरस्कार का मानक गांव की आबादी के हिसाब से तय किया जाता है।
-तुलसीराम, डीपीआरओ
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सीतापुर। जिले के 54 गांवों ने चालू वित्तीय वर्ष में ओडीएफ ग्राम पुरस्कार के लिए दावेदारी की है। चयनित गांवों को शासन से नकद पुरस्कार मिलेगा। यह रकम एक लाख से 5 लाख रुपये तक हो सकती है। इस रकम का इस्तेमाल गांव के विकास में किया जाएगा। दावेदारी के बाद अब शासन स्तर से पुरस्कार के लिए गांव चयनित किए जाने का इंतजार है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत गांवों को खुले में शौच की प्रथा को समाप्त करने के लिए शौचालय बनवाने के लिए सरकार प्रोत्साहन राशि देती है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में बेसलाइन सर्वे के मुताबिक 3 लाख 62 हजार 565 शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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जिले में इस वित्तीय वर्ष में अब तक 68 लाख की राशि प्राप्त हुई है। जिसके सापेक्ष 60 हजार 639 शौचालयों के निर्माण एवं गत वर्ष के अवशेष शौचालयों की राशि लाभार्थियों को हस्तांतरित की गई है। इसके सापेक्ष स्वयं संसाधन एवं स्वीकृति पत्र के क्रम में निर्मित शौचालयों को सम्मिलित करते हुए 44 हजार 550 शौचालयों का निर्माण पूरा करने का दावा पंचायती राज विभाग कर रहा है।
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शेष शौचालयों का निर्माण प्रगति पर होने की बात कही जा रही है। पंचायती राज विभाग के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 54 गांव ओडीएफ घोषित किए गए हैं। इनको सम्मिलित करते हुए जिले के कुल 223 गांव खुले में शौचमुक्त घोषित हो गए हैं। इस वित्तीय वर्ष ओडीएफ होने वाले 54 गांवों ने ओडीएफ ग्राम पुरस्कार के लिए दावेदारी की है।
सबसे ज्यादा पहला ब्लॉक से दावेदारी
ओडीएफ ग्राम पुरस्कार के लिए सबसे ज्यादा ब्लॉक पहला से 13 गांवों ने दावेदारी की है। जबकि सबसे कम बिसवां ब्लॉक से सिर्फ एक गांव ने दावेदारी की है।
इसके अलावा ब्लॉक ऐलिया के 4, बेहटा के 2, गोंदलामऊ के 3, हरगांव के 4, कसमंडा के 2, खैराबाद के 3, लहरपुर के 2, मछरेहटा के 5, महमूदाबाद के 5, मिश्रिख के 3, पिसावां के 3 और रामपुर मथुरा के 4 गांव इस दावेदारी में शामिल हैं। वहीं सिधौली, सकरन, रेउसा, परसेंडी तथा महोली ब्लॉक से किसी गांव ने दावेदारी नहीं की है।
आबादी के मुताबिक तय होती पुरस्कार की श्रेणी
चालू वित्तीय वर्ष में 54 गांवों ने ओडीएफ ग्राम पुरस्कार के लिए दावेदारी की है। शासन से चयनित गांवों को एक लाख से 5 लाख रुपये तक का पुरस्कार मिलता है। पुरस्कार का मानक गांव की आबादी के हिसाब से तय किया जाता है।
-तुलसीराम, डीपीआरओ