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मुसाफिरों के लिए मुश्किलों भरा रहता खटारा बसों का सफर

Wed, 06 Sep 2017 12:33 AM IST
Updated Wed, 06 Sep 2017 12:33 AM IST
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मुसाफिरों के लिए मुश्किलों भरा रहता खटारा बसों का सफर
रोडवेज की खटारा बसों में दुश्वारियों भरा सफर
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सीतापुर। टूटी कमानी, खराब गियर बॉक्स, हिलते-डुलते दरवाजे और खिड़कियां। सीतापुर डिपो के बेड़े में शामिल ज्यादातर बसों की पहचान यही है।

खटारा हो चुकी बसों को भी मरम्मत के बाद सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। ऐसी बसों में सफर करना मुसाफिरों के लिए बेहद तकलीफदेह होता है।

हालांकि नौ साल की उम्र पूरी करने अथवा 11 लाख किलोमीटर चलने के बाद बसों को खटारा घोषित कर इन्हें नीलाम करने का प्रावधान है। हालांकि विभागीय अफसरों का कहना है सीतापुर डिपो में कोई बस खटारा नहीं है।

सीतापुर डिपो के बेड़े में इन दिनों 192 बसें हैं। इनमें 101 डिपो की जबकि 91 बसें अनुबंधित हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बेड़े में करीब बारह बसें खटारा हो चुकी हैं।
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इनमें से किसी की कमानी टुटी है, तो किसी का गियरबाक्स खराब है। दरवाजे, खिड़कियां और सीटें तो ज्यादातर बसों के जर्जर हैं। वर्कशॉप में थोड़ी-बहुत मरम्मत कर इन बसों को फिर से सड़कों पर दौड़ाने के लिए उतार दिया जाता है।
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सीतापुर से रेउसा, लहरपुर, अकबरपुर, महमूदाबाद, बिसवां, मिश्रिख के अलावा लखनऊ तथा दिल्ली के रूटों पर भी खटारा बसें दौड़ती नजर आती हैं। इन खटारा बसों में मुसाफिरों का सफर मुश्किलों भरा साबित होता है।
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