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जेई व एईएस से पीड़ित के लिए बनेगा पीडियाट्रिक आईसीयू
Updated Wed, 10 Jan 2018 12:02 AM IST
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चार माह में शुरू हो जाएगा पीडियाट्रिक आईसीयू
सीतापुर। जापानी इंसेफेलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों का अब जिले में ही बेहतर इलाज हो सकेगा। उनको लखनऊ रेफर करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए जिला अस्पताल परिसर में पीडियाट्रिक आईसीयू बनेगी।
इस आईसीयू की क्षमता आठ बेड की होगी। इसमें अत्याधुनिक सुविधाएं सहित चिकित्सक तैनात रहेंगे। इससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। भवन बनने की कवायद शुरू हो गई है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में पिछले बरस इससे पीड़ित कोई मरीज सामने नहीं आया है।
जेई व एईएस का खासकर प्रकोप गोरखपुर व बस्ती मंडल में देखने को मिलता है। अब प्रभावित अन्य जिलों में सीतापुर भी शामिल हो गया है। इससे यहां पर पीडियाट्रिक आईसीयू बनेगी। इसकी क्षमता आठ बेड की होगी। यानी एक साथ आठ बच्चे भर्ती किए जा सकेंगे। इस आईसीयू में वेंटीलेटर सहित अन्य सुविधाएं मौजूद रहेंगी।
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24 घंटे यहां पर प्रशिक्षित चिकित्सक तैनात रहेंगे। इसके लिए चिकित्सकों को अलग से ट्रेनिंग दी जाएगी। इस पर जिला अस्पताल परिसर में आईसीयू बनने की कवायद शुरू हो गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है चार माह के अंदर भवन बनकर तैयार हो जाएगा। उसके बाद शासन द्वारा ही वेंटीलेटर व अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी।
इस समय क्या है सुविधा
अगर जिला अस्पताल में जेई व एईएस से पीड़ित कोई मरीज आता है तो उसकी जांच की सामान्य ही सुविधा नहीं है। अगर कोई खास जांच करनी पड़ जाए तो यह यहां पर नहीं है। न ही भर्ती करने के लिए आईसीयू है। केवल चिकित्सक उसका सामान्य परीक्षण कर लेते है। सामान्य वार्ड में ही भर्ती करते हैं। अभी तक इससे पीड़ित मरीजों को बचाने के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है।
क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस
डॉ. जेएन सिंह का कहना है कि इंसेफेलाइटिस को लोग आमतौर पर बोलचाल की भाषा में जापानी बुखार कहते हैं। यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वायरल संक्रमण के कारण होता है। यह खास किस्म के वायरस के कारण लोगों के बीच फैलता है।
यह वायरस मच्छर व सूअर के द्वारा फैलते हैं। ज्यादा गंदगी वाली जगह पर भी यह वायरस पनपता है। एक बार शरीर के संपर्क में आने पर यह सीधा हमारे दिमाग की चला जाता है। यह बीमारी गर्मियों में ही फैलती है।
वर्जन
बनने लगा है भवन
भवन बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीद है चार माह के अंदर यह आईसीयू शुरू हो जाएगा। हालांकि पिछले बरस ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है।
-डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
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सीतापुर। जापानी इंसेफेलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों का अब जिले में ही बेहतर इलाज हो सकेगा। उनको लखनऊ रेफर करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए जिला अस्पताल परिसर में पीडियाट्रिक आईसीयू बनेगी।
इस आईसीयू की क्षमता आठ बेड की होगी। इसमें अत्याधुनिक सुविधाएं सहित चिकित्सक तैनात रहेंगे। इससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। भवन बनने की कवायद शुरू हो गई है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में पिछले बरस इससे पीड़ित कोई मरीज सामने नहीं आया है।
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जेई व एईएस का खासकर प्रकोप गोरखपुर व बस्ती मंडल में देखने को मिलता है। अब प्रभावित अन्य जिलों में सीतापुर भी शामिल हो गया है। इससे यहां पर पीडियाट्रिक आईसीयू बनेगी। इसकी क्षमता आठ बेड की होगी। यानी एक साथ आठ बच्चे भर्ती किए जा सकेंगे। इस आईसीयू में वेंटीलेटर सहित अन्य सुविधाएं मौजूद रहेंगी।
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24 घंटे यहां पर प्रशिक्षित चिकित्सक तैनात रहेंगे। इसके लिए चिकित्सकों को अलग से ट्रेनिंग दी जाएगी। इस पर जिला अस्पताल परिसर में आईसीयू बनने की कवायद शुरू हो गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है चार माह के अंदर भवन बनकर तैयार हो जाएगा। उसके बाद शासन द्वारा ही वेंटीलेटर व अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी।
इस समय क्या है सुविधा
अगर जिला अस्पताल में जेई व एईएस से पीड़ित कोई मरीज आता है तो उसकी जांच की सामान्य ही सुविधा नहीं है। अगर कोई खास जांच करनी पड़ जाए तो यह यहां पर नहीं है। न ही भर्ती करने के लिए आईसीयू है। केवल चिकित्सक उसका सामान्य परीक्षण कर लेते है। सामान्य वार्ड में ही भर्ती करते हैं। अभी तक इससे पीड़ित मरीजों को बचाने के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है।
क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस
डॉ. जेएन सिंह का कहना है कि इंसेफेलाइटिस को लोग आमतौर पर बोलचाल की भाषा में जापानी बुखार कहते हैं। यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वायरल संक्रमण के कारण होता है। यह खास किस्म के वायरस के कारण लोगों के बीच फैलता है।
यह वायरस मच्छर व सूअर के द्वारा फैलते हैं। ज्यादा गंदगी वाली जगह पर भी यह वायरस पनपता है। एक बार शरीर के संपर्क में आने पर यह सीधा हमारे दिमाग की चला जाता है। यह बीमारी गर्मियों में ही फैलती है।
वर्जन
बनने लगा है भवन
भवन बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीद है चार माह के अंदर यह आईसीयू शुरू हो जाएगा। हालांकि पिछले बरस ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है।
-डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल