{"_id":"580cef174f1c1bcb75bc1cce","slug":"yume-akidt-were-observed-asghar","type":"story","status":"publish","title_hn":"अकीदत से मनाया गया यौमे असगर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अकीदत से मनाया गया यौमे असगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 23 Oct 2016 10:40 PM IST
विज्ञापन
हल्लौर में यौमे असगर पर निकाले गए जुलूस में शामिल अकीदतमंद।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डुमरियागंज। हल्लौर स्थित बाबुलगंज मोहल्ले में शनिवार की रात यौमे असगर का कार्यक्रम आयोजित की गई। इस दौरान मरसिया मजलिस हुई व अकीदतमंदों ने नौहा मातम कर हजरत इमाम हुसैन के दुधमुंहे बेटे अली असगर को खिराजे अकीदत पेश किया।
यौमे असगर की शुरूआत में इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल में शनिवार की रात 10 बजे मरसिया मजलिस आयोजित की गई। मरसियाख्वानी हैदरे कर्रार व उनके हमनवा ने की। मजलिस को अजीम हैदर रिजवी ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन के बेटे अली असगर की शहादत को बयां किया। मजलिस के बाद इमामबाड़े से अलम ताबूत का जुलूस निकाला गया, जो बड़े इमामबाड़ा व जनाबे सकीना के रौजे से होता हुआ अली असगर के रौजे पर पहुंचे, जहां पर मरसिया मजलिस हुई।
मरसियाख्वानी शाहिद आलम व उनके हमनवा ने की। मजलिस को खिताब करते हुए अजीम हैदर ने अली असगर की शहादत को विस्तार से बयां किया। नौहा मातम में अंजुमन फरोग मातम, अंजुमन गुलदस्ता मातम व अंजुमन अली असगर अलैहिस्स्लाम के मातमी दस्ते ने मशहूर नौहा खां सावन हल्लौरी, हसन जमाल, हानी, फरहान, बब्लू, सब्लू, खुशनूद, संजू द्वारा पढ़े गए नौहे पर मातम किया। इस दौरान कायनात हैदर, मोहम्मद, हैदर, काजिम मेंहदी, जान, शान, जानू आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
यौमे असगर की शुरूआत में इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल में शनिवार की रात 10 बजे मरसिया मजलिस आयोजित की गई। मरसियाख्वानी हैदरे कर्रार व उनके हमनवा ने की। मजलिस को अजीम हैदर रिजवी ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन के बेटे अली असगर की शहादत को बयां किया। मजलिस के बाद इमामबाड़े से अलम ताबूत का जुलूस निकाला गया, जो बड़े इमामबाड़ा व जनाबे सकीना के रौजे से होता हुआ अली असगर के रौजे पर पहुंचे, जहां पर मरसिया मजलिस हुई।
विज्ञापन
मरसियाख्वानी शाहिद आलम व उनके हमनवा ने की। मजलिस को खिताब करते हुए अजीम हैदर ने अली असगर की शहादत को विस्तार से बयां किया। नौहा मातम में अंजुमन फरोग मातम, अंजुमन गुलदस्ता मातम व अंजुमन अली असगर अलैहिस्स्लाम के मातमी दस्ते ने मशहूर नौहा खां सावन हल्लौरी, हसन जमाल, हानी, फरहान, बब्लू, सब्लू, खुशनूद, संजू द्वारा पढ़े गए नौहे पर मातम किया। इस दौरान कायनात हैदर, मोहम्मद, हैदर, काजिम मेंहदी, जान, शान, जानू आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन