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Siddharthnagar News: चुनावी रोजगार में मजदूरों की चांदी, हो रहे मालामाल
Wed, 03 May 2023 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 03 May 2023 11:56 PM IST
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शहर के सिद्धार्थ तिराहे के पास स्थिम लेबर चौक पर कम ही दिख रहे मजदूर।
सिद्धार्थनगर। शहर के सिद्धार्थ तिराहे के निकट स्थित लेबर चौक पर सुबह आठ बजे मजदूरों की तलाश करने पहुंचे संदीप को निराश होना पड़ा। उन्हें निर्माणाधीन मकान के लिए 12 मजदूर की जरूरत थी, लेकिन मौके पर सिर्फ तीन मजदूर ही मिले। उन्होंने पता किया कि आज मजदूर क्यों नहीं आए, तो पता चला कि अधिकांश मजदूर चुनाव में लग गए है। जिन मजदूरों को सिर्फ मजदूरी से संतोष करना पड़ता था, उन्हें चुनावी रोजगार में कम परिश्रम पर भी दोगुना दिहाड़ी के साथ ही खाने पीने की सुविधा उपलब्ध हो रही है।
शहर के लेबर चौक पर सुबह सैंकड़ों की तादाद में मौजूद मजदूरों को काम की तलाश रहती है, इनमें जिनको काम मिला तो ठीक, नहीं तो बाकी को निराश लौटना पड़ता था। इसी लेबर चौक से जिनको मजदूरों की जरूरत होती थी वह सुबह यहां आवश्यकता के अनुसार उन्हें साथ ले जाते है। इधर जब से चुनाव शुरू हुआ है तभी से लेबर चौक पर मजदूरों की बहुत तादाद कम दिख रही है। बुधवार सुबह घर समेत व्यवसायिक कार्य के लिए मजदूर खोजने लेबर चौक पहुंचे शहरवासी हरश्चिंद्र, व्यापारी दीनानाथ व रामभरोस को निराशा हाथ लगी। चुनाव प्रचार में लगे मजदूर सोमई, हरिहर व उमापति का कहना था कि वर्तमान में नगर निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के साथ घुमने, वोट मांगने और उनके नाम का जयकारा लगाने के लिए ही पूरे दिन की दिहाड़ी मिल जा रही है तो लेबर चौक पर मजदूरी खोजने क्यो जाएं। चुनावी जानकारों की मानें तो मजदूरों के भरोसे कुछ प्रत्याशी अधिक समर्थन मिलने का भौकाल बना रहे है, लेकिन हकीकत में उनके साथ मतदाताओं की तादाद बेहद कम है। ऐसे में चुनाव परिणाम आने पर भीड़ दिखाने वाले इन प्रत्याशियों की हालत खराब होनी तय है।
अच्छे कपड़े पहनकर आने की शर्त
चुनाव प्रचार में लगने वाले मजदूरों से प्रत्याशियों की एक ही शर्त होती है कि वह अच्छे कपड़े पहनकर प्रचार में निकले। जिससे लोगों को यह लगे कि वह मजदूर नहीं बल्कि समर्थक है जो पूरी क्षमता के साथ नेताजी के चुनाव प्रचार में डटा हुआ है। इसके चक्कर में मजदूर भी घर से नए कपड़े पहनकर चुनाव में मजदूरी करने पहुंच रहे है।
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बढ़ा रेट, सुविधाएं भी अधिक
चुनाव प्रचार करने वाले मजदूरों को सामान्य मजदूरी से अधिक रेट और सुविधाएं मिल रही है। जहां उन्हें सामान्य मजदूरी में तीन सौ रुपये तक मिलती है, वहीं चुनाव प्रचार के लिए उन्हें चार से पांच सौ रुपये मिल रहे है, साथ ही दिन में नाश्ता, गुटखा खाने के पैसे के साथ अन्य तरह की सुविधाएं भी उपलब्ध हो रही है।
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शहर के लेबर चौक पर सुबह सैंकड़ों की तादाद में मौजूद मजदूरों को काम की तलाश रहती है, इनमें जिनको काम मिला तो ठीक, नहीं तो बाकी को निराश लौटना पड़ता था। इसी लेबर चौक से जिनको मजदूरों की जरूरत होती थी वह सुबह यहां आवश्यकता के अनुसार उन्हें साथ ले जाते है। इधर जब से चुनाव शुरू हुआ है तभी से लेबर चौक पर मजदूरों की बहुत तादाद कम दिख रही है। बुधवार सुबह घर समेत व्यवसायिक कार्य के लिए मजदूर खोजने लेबर चौक पहुंचे शहरवासी हरश्चिंद्र, व्यापारी दीनानाथ व रामभरोस को निराशा हाथ लगी। चुनाव प्रचार में लगे मजदूर सोमई, हरिहर व उमापति का कहना था कि वर्तमान में नगर निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के साथ घुमने, वोट मांगने और उनके नाम का जयकारा लगाने के लिए ही पूरे दिन की दिहाड़ी मिल जा रही है तो लेबर चौक पर मजदूरी खोजने क्यो जाएं। चुनावी जानकारों की मानें तो मजदूरों के भरोसे कुछ प्रत्याशी अधिक समर्थन मिलने का भौकाल बना रहे है, लेकिन हकीकत में उनके साथ मतदाताओं की तादाद बेहद कम है। ऐसे में चुनाव परिणाम आने पर भीड़ दिखाने वाले इन प्रत्याशियों की हालत खराब होनी तय है।
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अच्छे कपड़े पहनकर आने की शर्त
चुनाव प्रचार में लगने वाले मजदूरों से प्रत्याशियों की एक ही शर्त होती है कि वह अच्छे कपड़े पहनकर प्रचार में निकले। जिससे लोगों को यह लगे कि वह मजदूर नहीं बल्कि समर्थक है जो पूरी क्षमता के साथ नेताजी के चुनाव प्रचार में डटा हुआ है। इसके चक्कर में मजदूर भी घर से नए कपड़े पहनकर चुनाव में मजदूरी करने पहुंच रहे है।
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चुनाव प्रचार करने वाले मजदूरों को सामान्य मजदूरी से अधिक रेट और सुविधाएं मिल रही है। जहां उन्हें सामान्य मजदूरी में तीन सौ रुपये तक मिलती है, वहीं चुनाव प्रचार के लिए उन्हें चार से पांच सौ रुपये मिल रहे है, साथ ही दिन में नाश्ता, गुटखा खाने के पैसे के साथ अन्य तरह की सुविधाएं भी उपलब्ध हो रही है।