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Siddharthnagar News: ट्रेन से उतरे तो साधन के लिए भटके
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- होली की वजह से कम निकले निजी वाहन, यात्रियों को हुई परेशानियां
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। होली पर घर आने वालों की संख्या अधिक दिखी। रेलवे स्टेशन से उतरे, लेकिन साधन ढूंढने के लिए यात्रियों को झोला और बैग लेकर भटकना पड़ा। रोडवेज पर भी लोकल रूट पर सवारी कम होने के कारण कम बसें थीं। स्टेशन से निकलने के बाद ई- रिक्शा तो मिला, लेकिन मुंह मांगा किराया देकर लोगों को यात्रा करनी पड़ी।
होली त्योहार के कारण अन्य दिनों की तुलना में नगर में महज 10 प्रतिशत निजी वाहन सड़क पर दिखे। वहीं, रोडवेज पर भी कमोबेश यही हाल रहा। आने वाली बसों में लोग आए तो जरूर, लेकिन जाने वालों की संख्या बहुत ही कम थी। सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन गोंडा से गोरखपुर की ओर जाने वाली ट्रेन पहुंची तो उतरने वाले यात्री अधिक रहे। झोला, बैग आदि टांगे लोग स्टेशन से बाहर निकले तो उन्हें वाहन के लिए भटकना पड़ा। कारण अन्य दिनों की तुलना में ई- रिक्शा और टैंपो भी 10 प्रतिशत ही चला। कारण देहात क्षेत्र के अधिकांश लोग रहते हैं, जो होली के कारण आए ही नहीं थे। किसी तरह से ई- रिक्शा तो मिला, लेकिन मुंह मांगी कीमत ली।
रेलवे स्टेशन से उतरने के बाद ऑटो ढूंढ़ते हुए पांच से छह की संख्या में बैग, बोरी लेकर लोग आ रहे थे। उनसे पूछा गया तो उसमें शामिल उमेश ने कहा कि स्टेशन से यहां तक कोई साधन नहीं मिला। जो मिला वह बहुत किराया मांग रहे हैं। सोचा चौराहे पर पहुंचकर वाहन लेंगे। इसी प्रकार से अन्य लोगों को घरों तक जाने में कठिनाई हुई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। होली पर घर आने वालों की संख्या अधिक दिखी। रेलवे स्टेशन से उतरे, लेकिन साधन ढूंढने के लिए यात्रियों को झोला और बैग लेकर भटकना पड़ा। रोडवेज पर भी लोकल रूट पर सवारी कम होने के कारण कम बसें थीं। स्टेशन से निकलने के बाद ई- रिक्शा तो मिला, लेकिन मुंह मांगा किराया देकर लोगों को यात्रा करनी पड़ी।
होली त्योहार के कारण अन्य दिनों की तुलना में नगर में महज 10 प्रतिशत निजी वाहन सड़क पर दिखे। वहीं, रोडवेज पर भी कमोबेश यही हाल रहा। आने वाली बसों में लोग आए तो जरूर, लेकिन जाने वालों की संख्या बहुत ही कम थी। सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन गोंडा से गोरखपुर की ओर जाने वाली ट्रेन पहुंची तो उतरने वाले यात्री अधिक रहे। झोला, बैग आदि टांगे लोग स्टेशन से बाहर निकले तो उन्हें वाहन के लिए भटकना पड़ा। कारण अन्य दिनों की तुलना में ई- रिक्शा और टैंपो भी 10 प्रतिशत ही चला। कारण देहात क्षेत्र के अधिकांश लोग रहते हैं, जो होली के कारण आए ही नहीं थे। किसी तरह से ई- रिक्शा तो मिला, लेकिन मुंह मांगी कीमत ली।
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रेलवे स्टेशन से उतरने के बाद ऑटो ढूंढ़ते हुए पांच से छह की संख्या में बैग, बोरी लेकर लोग आ रहे थे। उनसे पूछा गया तो उसमें शामिल उमेश ने कहा कि स्टेशन से यहां तक कोई साधन नहीं मिला। जो मिला वह बहुत किराया मांग रहे हैं। सोचा चौराहे पर पहुंचकर वाहन लेंगे। इसी प्रकार से अन्य लोगों को घरों तक जाने में कठिनाई हुई।
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