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गेहूं खरीद के 10 दिन, केंद्र पर नहीं पहुंच रहे किसान
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जोगिया क्षेत्र के देवरा बाजार में सन्नाटा पड़ा गेहू क्रय केंद्र।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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कहीं बोरे का अभाव तो कहीं सुविधाओं की कमी
13 दिनों में मात्र छह हजार मीट्रिक टन गेहूं की हुई खरीद
बोले रहे जिम्मेदार, इस बार न शिकायत आ रही न ही खरीद का आंकड़ा बढ़ा
जिले में 88500 मीट्रिक टन है गेहूं खरीद का लक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिले में गेहूं खरीद का हाल बुरा दिख रहा है, कारण किसानों का क्रय केंद्र से मोहभंग हो रहा है। खरीद शुरू हुए करीब 13 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन अभी तक जिले में करीब छह हजार मीट्रिक टन खरीद हो पाई है। कहीं बोरे का अभाव है तो कहीं सारी सुविधाओं के बाद भी खरीद नहीं हो पा रहा है। जिम्मेदारों का मानना है कि किसान इस बार अपनी उपज बेचने के लिए निकल नहीं रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो जिले में खरीद का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाएगा।
सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के लिए तमाम योजनाएं और प्रयास कर रही है, जिससे किसानों का खेती के तरफ रुझान बढ़े। उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाते हुए क्रय केंद्रों को सक्रिय किया गया। खरीद प्रणाली को ऑनलाइन में बदलाव किया गया, जिससे बिचौलियों का राज खत्म हो और किसानों को लाभ मिले। गेहूं खरीद के लिए जिले में 57 क्रयकेंद्र बनाए गए और 88,500 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य दिया गया है। एक अप्रैल से शुरू होने वाली खरीद लॉकडाउन के कारण ठप हो गई थी। फसल और किसानों की समस्याओं को देखते हुए 15 अप्रैल से सरकार ने कृषि कार्यों को मंजूरी देते हुए खरीद शुरू करने का निर्देश दिया। खरीद तो शुरू हो गई, लेकिन जिस हिसाब से खरीद होना चाहिए वह हो नहीं पा रही है। जोगिया ब्लॉक के देवरा में बना क्रय केंद्र अभी तक खुला ही नहीं है। वहीं करौंदा में बने क्रय केंद्र पर खरीद चल रही थी। यहां पिछले 14 दिनों में 290 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है। ऐसे अधिकांश क्रय केंद्र हैं, जहां सुविधाएं तो हैं, लेकिन किसान ही नहीं पहुंच रहे हैं। विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी तक छह हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। जो लक्ष्य के सापेक्ष में कम दिख रहा है। जिला विपणन अधिकारी संजय पांडेय ने बताया कि खरीद की गति कुछ धीमी है, लेकिन खरीद का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
ऑनलाइन में भी बनी बाधा
खरीद की गति धीमी होने का सबसे बड़ा कारण है कि ऑनलाइन पंजीकरण है। कारण लॉकडाउन घोषित होने के बाद साइबर कैप बंद पड़े हैं। ऐसे में किसान आधार, बैंक पासबुक और खतौनी का छायाप्रति कैसे और कैसे निकले यह बड़ी समस्या हो गई। इसलिए ऑनलाइन कम हुए है। बिना ऑनलाइन के किसान अपनी उपज को बेच भी नहीं सकता है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि ऑनलाइन के लिए किसानों को कोई सुविधा प्रदान करे, जिससे वह गेहूं बेच सके।
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किसानों ने बताई अपनी समस्याएं
सिद्धार्थनगर। जोगिया ब्लॉक के सिसवा बुजुर्ग गांव निवासी किसान सूर्यप्रकाश, दूधनाथ, उदयनरायन, दयानरायन का कहना है कि गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है। लॉकडाउन घोषित होने के बाद साइबर कैफे बंद हैं। खतौनी भी नहीं निकल पा रहा है और न ही ऑॅनलाइन हो पा रहा है। ऐसे में गेहूं तौल पर संकट दिख रहा है। अगर साइबर कैफे नहीं खुले तो बड़ी दिक्कत होगी। मजबूर होकर बिचौलियों के हाथ उपज को बेचना पड़ेगा।
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13 दिनों में मात्र छह हजार मीट्रिक टन गेहूं की हुई खरीद
बोले रहे जिम्मेदार, इस बार न शिकायत आ रही न ही खरीद का आंकड़ा बढ़ा
जिले में 88500 मीट्रिक टन है गेहूं खरीद का लक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिले में गेहूं खरीद का हाल बुरा दिख रहा है, कारण किसानों का क्रय केंद्र से मोहभंग हो रहा है। खरीद शुरू हुए करीब 13 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन अभी तक जिले में करीब छह हजार मीट्रिक टन खरीद हो पाई है। कहीं बोरे का अभाव है तो कहीं सारी सुविधाओं के बाद भी खरीद नहीं हो पा रहा है। जिम्मेदारों का मानना है कि किसान इस बार अपनी उपज बेचने के लिए निकल नहीं रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो जिले में खरीद का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाएगा।
सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के लिए तमाम योजनाएं और प्रयास कर रही है, जिससे किसानों का खेती के तरफ रुझान बढ़े। उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाते हुए क्रय केंद्रों को सक्रिय किया गया। खरीद प्रणाली को ऑनलाइन में बदलाव किया गया, जिससे बिचौलियों का राज खत्म हो और किसानों को लाभ मिले। गेहूं खरीद के लिए जिले में 57 क्रयकेंद्र बनाए गए और 88,500 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य दिया गया है। एक अप्रैल से शुरू होने वाली खरीद लॉकडाउन के कारण ठप हो गई थी। फसल और किसानों की समस्याओं को देखते हुए 15 अप्रैल से सरकार ने कृषि कार्यों को मंजूरी देते हुए खरीद शुरू करने का निर्देश दिया। खरीद तो शुरू हो गई, लेकिन जिस हिसाब से खरीद होना चाहिए वह हो नहीं पा रही है। जोगिया ब्लॉक के देवरा में बना क्रय केंद्र अभी तक खुला ही नहीं है। वहीं करौंदा में बने क्रय केंद्र पर खरीद चल रही थी। यहां पिछले 14 दिनों में 290 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है। ऐसे अधिकांश क्रय केंद्र हैं, जहां सुविधाएं तो हैं, लेकिन किसान ही नहीं पहुंच रहे हैं। विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी तक छह हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। जो लक्ष्य के सापेक्ष में कम दिख रहा है। जिला विपणन अधिकारी संजय पांडेय ने बताया कि खरीद की गति कुछ धीमी है, लेकिन खरीद का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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ऑनलाइन में भी बनी बाधा
खरीद की गति धीमी होने का सबसे बड़ा कारण है कि ऑनलाइन पंजीकरण है। कारण लॉकडाउन घोषित होने के बाद साइबर कैप बंद पड़े हैं। ऐसे में किसान आधार, बैंक पासबुक और खतौनी का छायाप्रति कैसे और कैसे निकले यह बड़ी समस्या हो गई। इसलिए ऑनलाइन कम हुए है। बिना ऑनलाइन के किसान अपनी उपज को बेच भी नहीं सकता है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि ऑनलाइन के लिए किसानों को कोई सुविधा प्रदान करे, जिससे वह गेहूं बेच सके।
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किसानों ने बताई अपनी समस्याएं
सिद्धार्थनगर। जोगिया ब्लॉक के सिसवा बुजुर्ग गांव निवासी किसान सूर्यप्रकाश, दूधनाथ, उदयनरायन, दयानरायन का कहना है कि गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है। लॉकडाउन घोषित होने के बाद साइबर कैफे बंद हैं। खतौनी भी नहीं निकल पा रहा है और न ही ऑॅनलाइन हो पा रहा है। ऐसे में गेहूं तौल पर संकट दिख रहा है। अगर साइबर कैफे नहीं खुले तो बड़ी दिक्कत होगी। मजबूर होकर बिचौलियों के हाथ उपज को बेचना पड़ेगा।