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कर्बला से वतन लौटे जायरीनों का हुआ स्वागत
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कर्बला से वतन लौटे जायरीनों का हुआ स्वागत
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के हल्लौर कस्बा से बीते पांच जून को कर्बला की जियारत के लिए रवाना हुआ जायरीनों का जत्था शनिवार की रात वापस लौट आया। इस दौरान बड़े इमामबाड़ा पर मरसिया मजलिस आयोजित हुई। लोगों ने जायरीनों के गले मिलकर उनका स्वागत किया।
बीते पांच जून को जायरीन का अलग-अलग दो जत्था ईरान के मशहद, कुम, निशापुर, इराक के कर्बला व नजफ सहित शिया समुदाय की आस्था के प्रमुख धार्मिक स्थलों की जियारत करने के लिए गया था। शनिवार की रात सकुशल हल्लौर पहुंच गए। जायरीनों का काफिला जब भी कर्बला नजफ आदि प्रमुख धार्मिक स्थलों की जियारत के लिए जाता है तो पहले कर्बला के शहीदों की याद में मजलिस का आयोजन किया जाता है। जब वापस आते हैं, तब भी मजलिस करने के बाद ही जायरीन अपने-अपने घरों को जाते हैं। शनिवार को जायरीनों की वापसी पर हल्लौर स्थित बड़े इमामबाड़ा पर मरसिया मजलिस आयोजित हुई।
सबसे पहले सरवर मेंहदी और अब्बास अली ने मर्सिया ख्वानी की। उसके बाद मौलाना अली अब्बास और जाकिर, अहलेबैत जमाल हैदर ने कर्बला की जियारत की अहमियत और विशेषता पर रोशनी डाली। उसके बाद कर्बला के शहीदों का फजायल और मसायब को विस्तार से बया किया। मजलिस के अंत में करबला के शहीदों की वतन वापसी का बयान किया तो मौजूद लोगों की आंखों से आंसू निकल आए। मजलिस के बाद कर्बला से वापस आए हुए जायरीनों से गले मिलकर स्वागत किया।
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इस दौरान मौलाना महफूज हुज्जत, डॉ. फरीद हैदर, मोहम्मद आलिम, काजिम मेहंदी, अली ताहिर, रिजवान अली, इरफान अली, मो. जमाल हैदर, महमूद, अजीम सज्जादी, फरहान, अकमल प्रिंस, शब्बीर हसन आदि मौजूद रहे।
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डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के हल्लौर कस्बा से बीते पांच जून को कर्बला की जियारत के लिए रवाना हुआ जायरीनों का जत्था शनिवार की रात वापस लौट आया। इस दौरान बड़े इमामबाड़ा पर मरसिया मजलिस आयोजित हुई। लोगों ने जायरीनों के गले मिलकर उनका स्वागत किया।
बीते पांच जून को जायरीन का अलग-अलग दो जत्था ईरान के मशहद, कुम, निशापुर, इराक के कर्बला व नजफ सहित शिया समुदाय की आस्था के प्रमुख धार्मिक स्थलों की जियारत करने के लिए गया था। शनिवार की रात सकुशल हल्लौर पहुंच गए। जायरीनों का काफिला जब भी कर्बला नजफ आदि प्रमुख धार्मिक स्थलों की जियारत के लिए जाता है तो पहले कर्बला के शहीदों की याद में मजलिस का आयोजन किया जाता है। जब वापस आते हैं, तब भी मजलिस करने के बाद ही जायरीन अपने-अपने घरों को जाते हैं। शनिवार को जायरीनों की वापसी पर हल्लौर स्थित बड़े इमामबाड़ा पर मरसिया मजलिस आयोजित हुई।
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सबसे पहले सरवर मेंहदी और अब्बास अली ने मर्सिया ख्वानी की। उसके बाद मौलाना अली अब्बास और जाकिर, अहलेबैत जमाल हैदर ने कर्बला की जियारत की अहमियत और विशेषता पर रोशनी डाली। उसके बाद कर्बला के शहीदों का फजायल और मसायब को विस्तार से बया किया। मजलिस के अंत में करबला के शहीदों की वतन वापसी का बयान किया तो मौजूद लोगों की आंखों से आंसू निकल आए। मजलिस के बाद कर्बला से वापस आए हुए जायरीनों से गले मिलकर स्वागत किया।
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इस दौरान मौलाना महफूज हुज्जत, डॉ. फरीद हैदर, मोहम्मद आलिम, काजिम मेहंदी, अली ताहिर, रिजवान अली, इरफान अली, मो. जमाल हैदर, महमूद, अजीम सज्जादी, फरहान, अकमल प्रिंस, शब्बीर हसन आदि मौजूद रहे।