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Siddharthnagar News: गर्मी में पानी संकट, शहर में शुद्ध पानी के लिए जद्दोजहद
Thu, 02 Apr 2026 01:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 02 Apr 2026 01:25 AM IST
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सिद्धार्थनगर। गर्मी की दस्तक के साथ ही साफ पानी से प्यास बुझाने की चुनौती भी गहराने लगी है। शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों रोडवेज, रेलवे स्टेशन, कचहरी पर पेयजल व्यवस्था की खामियां अब सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा सवाल बनती जा रही हैं। कहीं वाटर कूलर खराब पड़े हैं, कहीं निर्माण कार्य में दब गए हैं, तो कहीं ठंडे की जगह गर्म पानी मिल रहा है। ऐसे में लोग मजबूरी में जो मिले वही पीने को विवश हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
शहर के बुद्धिजीवी कहते हैं कि शहर में पानी अब बुनियादी सुविधा नहीं बल्कि संघर्ष बनता जा रहा है। लोग या तो जेब ढीली कर रहे हैं या सेहत से समझौता। गर्मी अभी बढ़नी बाकी है, ऐसे में यदि व्यवस्था नहीं सुधरी, तो यह लापरवाही सीधे जनस्वास्थ्य संकट में बदल सकती है। बांसी मार्ग स्थित जनपद न्यायालय के मुख्य गेट के बाहर लगा वाटर कूलर लंबे समय से खराब पड़ा है। इसके पास फैली गंदगी समस्या को और गंभीर बनाती है। उधर से रोजाना सैकड़ों वादकारी, अधिवक्ता और ग्रामीण पहुंचते हैं। दोपहर की तेज धूप में घंटों इंतजार के दौरान पानी की सुविधा न होने से लोग इधर-उधर भटकते हैं। कई लोग पास की दुकानों या ठेलों से पानी खरीदते हैं जबकि कुछ लोग खुले में रखे पानी का सहारा लेते हैं।
रोडवेज परिसर में स्थिति और गंभीर है। बाउंड्रीवाॅल निर्माण के दौरान वाटर कूलर और हैंडपंप दब जाने से यात्रियों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। बसों के इंतजार में खड़े लोग, महिलाएं और बच्चे पानी के लिए परेशान नजर आते हैं। कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोगों को मजबूरी में बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा है। रोडवेज पर मिलीं यात्री सीमा देवी बताती हैं कि रोडवेज पर बच्चों के साथ बहुत दिक्कत होती है। यात्री अमित कुमार बताते हैं कि बोतल का पानी ही सहारा है।
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रेलवे स्टेशन पर भी राहत नहीं है। प्लेटफाॅर्म पर लगा वाटर कूलर ठंडे के बजाय गर्म पानी दे रहा है। यात्रियों को इससे कोई लाभ नहीं मिल रहा। ट्रेन का इंतजार कर रहे लोग या तो बोतलबंद पानी खरीदते हैं या फिर ट्रेन में मिलने वाले पानी पर निर्भर रहते हैं। इन सबके बीच कलक्ट्रेट परिसर एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आता है। यहां लगा वाटर कूलर नियमित देखरेख के चलते ठंडा और स्वच्छ पानी उपलब्ध करा रहा है। यह दिखाता है कि यदि निगरानी और जिम्मेदारी तय हो तो व्यवस्था बेहतर रह सकती है।
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी अजय कुमार सिंह कहते हैं कि सभी वाटर कूलरों का सर्वे कराया जा रहा है, खराब कूलर जल्द ठीक करा दिए जाएंगे।
मजबूरी में बदल रहे विकल्प, बढ़ रहा खर्च
- पेयजल व्यवस्था की कमी ने लोगों की आदतों को बदल दिया है। अब बड़ी संख्या में लोग घर से पानी लेकर निकल रहे हैं। कुछ लोग फिल्टर या आरओ का पानी बोतल में भरते हैं। वहीं, मजदूर और गरीब वर्ग के लोग सस्ते पाउच या खुले पानी पर निर्भर हो रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार, गर्मी शुरू होते ही बोतलबंद पानी की बिक्री 30-40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इससे लोगों का रोजाना खर्च भी बढ़ रहा है।
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शहर के बुद्धिजीवी कहते हैं कि शहर में पानी अब बुनियादी सुविधा नहीं बल्कि संघर्ष बनता जा रहा है। लोग या तो जेब ढीली कर रहे हैं या सेहत से समझौता। गर्मी अभी बढ़नी बाकी है, ऐसे में यदि व्यवस्था नहीं सुधरी, तो यह लापरवाही सीधे जनस्वास्थ्य संकट में बदल सकती है। बांसी मार्ग स्थित जनपद न्यायालय के मुख्य गेट के बाहर लगा वाटर कूलर लंबे समय से खराब पड़ा है। इसके पास फैली गंदगी समस्या को और गंभीर बनाती है। उधर से रोजाना सैकड़ों वादकारी, अधिवक्ता और ग्रामीण पहुंचते हैं। दोपहर की तेज धूप में घंटों इंतजार के दौरान पानी की सुविधा न होने से लोग इधर-उधर भटकते हैं। कई लोग पास की दुकानों या ठेलों से पानी खरीदते हैं जबकि कुछ लोग खुले में रखे पानी का सहारा लेते हैं।
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रोडवेज परिसर में स्थिति और गंभीर है। बाउंड्रीवाॅल निर्माण के दौरान वाटर कूलर और हैंडपंप दब जाने से यात्रियों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। बसों के इंतजार में खड़े लोग, महिलाएं और बच्चे पानी के लिए परेशान नजर आते हैं। कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोगों को मजबूरी में बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा है। रोडवेज पर मिलीं यात्री सीमा देवी बताती हैं कि रोडवेज पर बच्चों के साथ बहुत दिक्कत होती है। यात्री अमित कुमार बताते हैं कि बोतल का पानी ही सहारा है।
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रेलवे स्टेशन पर भी राहत नहीं है। प्लेटफाॅर्म पर लगा वाटर कूलर ठंडे के बजाय गर्म पानी दे रहा है। यात्रियों को इससे कोई लाभ नहीं मिल रहा। ट्रेन का इंतजार कर रहे लोग या तो बोतलबंद पानी खरीदते हैं या फिर ट्रेन में मिलने वाले पानी पर निर्भर रहते हैं। इन सबके बीच कलक्ट्रेट परिसर एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आता है। यहां लगा वाटर कूलर नियमित देखरेख के चलते ठंडा और स्वच्छ पानी उपलब्ध करा रहा है। यह दिखाता है कि यदि निगरानी और जिम्मेदारी तय हो तो व्यवस्था बेहतर रह सकती है।
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी अजय कुमार सिंह कहते हैं कि सभी वाटर कूलरों का सर्वे कराया जा रहा है, खराब कूलर जल्द ठीक करा दिए जाएंगे।
मजबूरी में बदल रहे विकल्प, बढ़ रहा खर्च
- पेयजल व्यवस्था की कमी ने लोगों की आदतों को बदल दिया है। अब बड़ी संख्या में लोग घर से पानी लेकर निकल रहे हैं। कुछ लोग फिल्टर या आरओ का पानी बोतल में भरते हैं। वहीं, मजदूर और गरीब वर्ग के लोग सस्ते पाउच या खुले पानी पर निर्भर हो रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार, गर्मी शुरू होते ही बोतलबंद पानी की बिक्री 30-40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इससे लोगों का रोजाना खर्च भी बढ़ रहा है।