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विदेशी भाषा की पढ़ाई के लिए शिक्षकों का इंतजार
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विदेशी भाषा की पढ़ाई के लिए शिक्षकों का इंतजार
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र में शिक्षकों की नहीं हो सकी नियुक्ति
नेपाली और श्रीलंका की सिंघली सहित नौ भाषाओं की होनी है पढ़ाई
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई के लिए शिक्षकों की नियुक्ति का इंतजार है। विश्वविद्यालय में शुरू हुई शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान भी नौ विदेशी भाषाओं की शिक्षा देने वाले शिक्षकों के पद नहीं भरे जा सके हैं। विश्वविद्यालय में नेपाली, श्रीलंका की सांघली सहित नौ विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू होने पर विदेशी छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने की संभावना है।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र की स्थापना की गई है। इसके अंतर्गत हिंदू धर्म दर्शन, बौद्ध धर्म दर्शन व जैन धर्म दर्शन की पढ़ाई होनी है। भारत-नेपाल सीमा स्थित विश्वविद्यालय में नेपाली भाषा का पीजी कोर्स शुरू होने पर नेपाली छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ेगी, जबकि इसी तरह श्रीलंका की सिंघली, संस्कृत, पालि प्राकृत, अपभ्रंश, तिब्बती, जापानी, थाई, कोरियाई भाषा की पढ़ाई शुरू होनी है।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र में शिक्षकों के 21 पद सृजित किए गए हैं, जिनमें तीन प्रोफेसर, छह एसोसिएट प्रोफेसर एवं 12 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति होनी है। शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में अन्य विभागों के शिक्षकों की नियुक्ति हुई। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र के ओएसडी प्रो. सुशील तिवारी ने बताया कि नेपाली, पालि, प्राकृत भाषा का कोर्स तैयार कर लिया गया है, जबकि सर्टिफिकेट कोर्स भी बनाया गया है।
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सिद्धार्थ विश्वविविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय केंद्र में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित हुए थे, आवेदन की जांच प्रक्रिया में है। विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय निरंतर प्रयासरत है।
प्रो. दीपक मिश्रा, मुख्य नियंता
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अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र में शिक्षकों की नहीं हो सकी नियुक्ति
नेपाली और श्रीलंका की सिंघली सहित नौ भाषाओं की होनी है पढ़ाई
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई के लिए शिक्षकों की नियुक्ति का इंतजार है। विश्वविद्यालय में शुरू हुई शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान भी नौ विदेशी भाषाओं की शिक्षा देने वाले शिक्षकों के पद नहीं भरे जा सके हैं। विश्वविद्यालय में नेपाली, श्रीलंका की सांघली सहित नौ विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू होने पर विदेशी छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने की संभावना है।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र की स्थापना की गई है। इसके अंतर्गत हिंदू धर्म दर्शन, बौद्ध धर्म दर्शन व जैन धर्म दर्शन की पढ़ाई होनी है। भारत-नेपाल सीमा स्थित विश्वविद्यालय में नेपाली भाषा का पीजी कोर्स शुरू होने पर नेपाली छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ेगी, जबकि इसी तरह श्रीलंका की सिंघली, संस्कृत, पालि प्राकृत, अपभ्रंश, तिब्बती, जापानी, थाई, कोरियाई भाषा की पढ़ाई शुरू होनी है।
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अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र में शिक्षकों के 21 पद सृजित किए गए हैं, जिनमें तीन प्रोफेसर, छह एसोसिएट प्रोफेसर एवं 12 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति होनी है। शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में अन्य विभागों के शिक्षकों की नियुक्ति हुई। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र के ओएसडी प्रो. सुशील तिवारी ने बताया कि नेपाली, पालि, प्राकृत भाषा का कोर्स तैयार कर लिया गया है, जबकि सर्टिफिकेट कोर्स भी बनाया गया है।
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सिद्धार्थ विश्वविविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय केंद्र में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित हुए थे, आवेदन की जांच प्रक्रिया में है। विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय निरंतर प्रयासरत है।
प्रो. दीपक मिश्रा, मुख्य नियंता