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समूह की मदद से अब फिरने लगे हैं सुनीता के दिन
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फोटो
समूह की मदद से अब बदल रहे सुनीता के दिन
विकास भवन परिसर में कैंटीन शुरू करने के बाद बदली तकदीर
सुनीता की प्रेरणा से अन्य महिलाएं भी गरीबी को दे रहीं मात
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। सदर विकास खंड के परसा शाहआलम की सुनीता अग्रहरि खुद के पांवों पर खड़ा करके सफलता की ऊंचाइयों को छू रही हैं। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से तरक्की की इबारत लिख रही हैं। साथ ही आसपास की अपनी संगी महिलाओं को भी समूह की मदद से आगे बढ़ा रही हैं।
गरीबी से जूझ रही जिला मुख्यालय से सटे परसा शाहआलम निवासी सुनीता अग्रहरि ने आसपास की महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह का गठन किया। पहले घर पर ही रहकर सिलाई, कढ़ाई, कटाई के कार्य में जुटी रहीं। कोरोना संक्रमण काल में लॉकडाउन की घोषणा होने के चार दिन पहले 20 मार्च 2020 को उन्हें कैंटीन खोलने का अवसर मिला। विकास भवन परिसर में सीडीओ पुलकित गर्ग, उपायुक्त स्वत: रोजगार शेषमणि सिंह की विशेष रुचि से प्रेरणा कैंटीन का संचालन शुरू किया। लॉकडाउन में विकास भवन और कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालयों में नियमों का पालन करते हुए जलपान पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इस कार्य में उनके पति अनुराग अग्रहरि भी कदम-कदम पर साथ दे रहे हैं। सुनीता बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उनके मन में चार बेटियों और परिवार के लिए खास करने का विचार उमड़ने लगा। समूह की कार्यप्रणाली को समझा और बचत कर समूह मेें उसे एकत्र करने लग गईं। बात कैंटीन चलाने की चली, लेकिन धन के इंतजाम पर आकर रुक गई। समूह से मिली मदद तो सफलता कदम चूम ली। कैंटीन चलने से अब निश्चय ही परिवार में खुशहाली है। बच्चियों की पढ़ाई भी पहले से बेहतर हो रही है।
.................
पति का भी मिल रहा भरपूर साथ
कैंटीन संचालन की दिशा में सुनीता के कदम बढ़े तो उनके पति अनुराग अग्रहरि भी हर पल साथ देने को तैयार हो गए। पहले ठेले पर चाट, गोलगप्पे बेचते थे। अब बदले परिवेश में वह पत्नी का साथ देकर परिवार की खुशहाली में भी अहम योगदान दे रहे हैं। उनका कहना है कि महिला होकर कदम बढ़ाया तो पुरुष होकर साथ देना स्वाभाविक है।
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समूह की मदद से अब बदल रहे सुनीता के दिन
विकास भवन परिसर में कैंटीन शुरू करने के बाद बदली तकदीर
सुनीता की प्रेरणा से अन्य महिलाएं भी गरीबी को दे रहीं मात
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। सदर विकास खंड के परसा शाहआलम की सुनीता अग्रहरि खुद के पांवों पर खड़ा करके सफलता की ऊंचाइयों को छू रही हैं। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से तरक्की की इबारत लिख रही हैं। साथ ही आसपास की अपनी संगी महिलाओं को भी समूह की मदद से आगे बढ़ा रही हैं।
गरीबी से जूझ रही जिला मुख्यालय से सटे परसा शाहआलम निवासी सुनीता अग्रहरि ने आसपास की महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह का गठन किया। पहले घर पर ही रहकर सिलाई, कढ़ाई, कटाई के कार्य में जुटी रहीं। कोरोना संक्रमण काल में लॉकडाउन की घोषणा होने के चार दिन पहले 20 मार्च 2020 को उन्हें कैंटीन खोलने का अवसर मिला। विकास भवन परिसर में सीडीओ पुलकित गर्ग, उपायुक्त स्वत: रोजगार शेषमणि सिंह की विशेष रुचि से प्रेरणा कैंटीन का संचालन शुरू किया। लॉकडाउन में विकास भवन और कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालयों में नियमों का पालन करते हुए जलपान पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इस कार्य में उनके पति अनुराग अग्रहरि भी कदम-कदम पर साथ दे रहे हैं। सुनीता बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उनके मन में चार बेटियों और परिवार के लिए खास करने का विचार उमड़ने लगा। समूह की कार्यप्रणाली को समझा और बचत कर समूह मेें उसे एकत्र करने लग गईं। बात कैंटीन चलाने की चली, लेकिन धन के इंतजाम पर आकर रुक गई। समूह से मिली मदद तो सफलता कदम चूम ली। कैंटीन चलने से अब निश्चय ही परिवार में खुशहाली है। बच्चियों की पढ़ाई भी पहले से बेहतर हो रही है।
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पति का भी मिल रहा भरपूर साथ
कैंटीन संचालन की दिशा में सुनीता के कदम बढ़े तो उनके पति अनुराग अग्रहरि भी हर पल साथ देने को तैयार हो गए। पहले ठेले पर चाट, गोलगप्पे बेचते थे। अब बदले परिवेश में वह पत्नी का साथ देकर परिवार की खुशहाली में भी अहम योगदान दे रहे हैं। उनका कहना है कि महिला होकर कदम बढ़ाया तो पुरुष होकर साथ देना स्वाभाविक है।
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