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Siddharthnagar News: कंडम गाड़ियों में सफर खतरनाक, जरा भी चूक जानलेवा
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शहर में चल रही पुराने माडल की जिप। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर समय सीमा पूरी कर चुकी गाड़ियों से यात्रा कर रहे हैं, तो सतर्क होकर चलने की जरूरत है। क्योंकि नए वाहनों की तरह से इनमें सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। इनमें हादसे होने पर जान जाने खतरा अधिक है। महराजगंज में शनिवार की रात घने कोहरे के बीच कार के पेड़ से टकराने से भीषण हादसा हुआ। इसमें कार सवार तीन दोस्तों की मौत हो गई।
हादसे की असली वजह जांच में सामने आएगी, लेकिन जो मौके के हालात बयां कर रहे थे, उसे जिस गाड़ी से हादसा हुआ वह काफी पुरानी थी। इसमें सुरक्षा के जो मानक हैं, वह पूरे नहीं हैं। कभी ब्रेक काम नहीं करता तो कभी गियर ही नहीं लगता है। साथ- साथ नए वाहनों की तरह से हादसे के बाद सुरक्षा के लिए एयर बैग भी नहीं लगा है।
ऐसे में अगर इन वाहनों से हादसे होते हैं तो जान जाने का खतरा अधिक है। जैसा पूर्व की घटनाओं में देखा गया। मोटर मेकेनिक की राय है कि पुराने वाहनों में कुछ न कुछ खामियां जरूर रहती हैं। ऐसे में चलने से पहने गियर, ब्रेक और लाइट जरूर देख लें।
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साथ ही सड़क पर चलने पर नए वाहनों की तरह से स्पीड न भरें, कई बार स्पीड भरने के चक्कर में पुराने वाहन के ब्रेक और गियर फंस जाते हैं। इसकी वजह से वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। कई दुर्घटनाग्रस्त वाहनों के बनाते समय इस बात की जानकारी मिली है।
नियम तो बना, कागजाें तक सीमित : शासन ने सुरक्षा के लिहाज से वाहनों की उम्र सीमा तय की है। क्योंकि एक वाहन की तय उम्र है कि वह कितने समय तक सही तरह से चल सकेगा। एक मानक तय किया गया कि एक वाहन की उम्र 15 वर्ष तक है।
इसके बाद इसका पंजीकरण नहीं हो सकता है। यानी यह कबाड़ की श्रेणी में आ जाएगी। इसके पीछे वाहनों के कमजोर होने के कारण होने वाले हादसे, वाहनों से निकलने वाली आवाज और धुएं से ध्वनि व वायु प्रदूषण आदि कई वजह थी।
पंजीकरण तो रोकने का नियम प्रभावी हो गया है, लेकिन ऐसे वाहन रोड पर न चलें इस पर रोक के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। जबकि, नियम के अनुसार अगर 15 वर्ष की आयु पूरी हो गई है, तो वाहन को चलाते हुए पाए जाने पर सीज कर देने का नियम हैं। अभी तक अधिक उम्र के वाहन के संचालन में कार्रवाई का कोई रिकार्ड संबंधित विभाग के पास नहीं है। नजीता बड़े पैमाने पर वाहन दौड़ लगा रहे हैं।
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सिद्धार्थनगर। अगर समय सीमा पूरी कर चुकी गाड़ियों से यात्रा कर रहे हैं, तो सतर्क होकर चलने की जरूरत है। क्योंकि नए वाहनों की तरह से इनमें सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। इनमें हादसे होने पर जान जाने खतरा अधिक है। महराजगंज में शनिवार की रात घने कोहरे के बीच कार के पेड़ से टकराने से भीषण हादसा हुआ। इसमें कार सवार तीन दोस्तों की मौत हो गई।
हादसे की असली वजह जांच में सामने आएगी, लेकिन जो मौके के हालात बयां कर रहे थे, उसे जिस गाड़ी से हादसा हुआ वह काफी पुरानी थी। इसमें सुरक्षा के जो मानक हैं, वह पूरे नहीं हैं। कभी ब्रेक काम नहीं करता तो कभी गियर ही नहीं लगता है। साथ- साथ नए वाहनों की तरह से हादसे के बाद सुरक्षा के लिए एयर बैग भी नहीं लगा है।
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ऐसे में अगर इन वाहनों से हादसे होते हैं तो जान जाने का खतरा अधिक है। जैसा पूर्व की घटनाओं में देखा गया। मोटर मेकेनिक की राय है कि पुराने वाहनों में कुछ न कुछ खामियां जरूर रहती हैं। ऐसे में चलने से पहने गियर, ब्रेक और लाइट जरूर देख लें।
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साथ ही सड़क पर चलने पर नए वाहनों की तरह से स्पीड न भरें, कई बार स्पीड भरने के चक्कर में पुराने वाहन के ब्रेक और गियर फंस जाते हैं। इसकी वजह से वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। कई दुर्घटनाग्रस्त वाहनों के बनाते समय इस बात की जानकारी मिली है।
नियम तो बना, कागजाें तक सीमित : शासन ने सुरक्षा के लिहाज से वाहनों की उम्र सीमा तय की है। क्योंकि एक वाहन की तय उम्र है कि वह कितने समय तक सही तरह से चल सकेगा। एक मानक तय किया गया कि एक वाहन की उम्र 15 वर्ष तक है।
इसके बाद इसका पंजीकरण नहीं हो सकता है। यानी यह कबाड़ की श्रेणी में आ जाएगी। इसके पीछे वाहनों के कमजोर होने के कारण होने वाले हादसे, वाहनों से निकलने वाली आवाज और धुएं से ध्वनि व वायु प्रदूषण आदि कई वजह थी।
पंजीकरण तो रोकने का नियम प्रभावी हो गया है, लेकिन ऐसे वाहन रोड पर न चलें इस पर रोक के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। जबकि, नियम के अनुसार अगर 15 वर्ष की आयु पूरी हो गई है, तो वाहन को चलाते हुए पाए जाने पर सीज कर देने का नियम हैं। अभी तक अधिक उम्र के वाहन के संचालन में कार्रवाई का कोई रिकार्ड संबंधित विभाग के पास नहीं है। नजीता बड़े पैमाने पर वाहन दौड़ लगा रहे हैं।