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Siddharthnagar News: आज जीत-हार की माथापच्ची से मिलेगी निजात

Sat, 13 May 2023 01:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 13 May 2023 01:19 AM IST
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Today you will get relief from the dilemma of victory and defeat
सिद्धार्थनगर। जिले में निकाय चुनाव के लिए हुए मतदान के बाद सभी उम्मीदवारों के किस्मत का फैसला आज होगा। मतदान की समाप्ति के बाद से शहर में जीत-हार को लेकर कयासबाजियों का दौर जारी है। हालांकि शनिवार को मतगणना के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी, लेकिन उससे पहले हर कोई अपने-अपने हिसाब से गुणा-गणित लगाने में जुटा है।
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59513 मतदाताओं वाले नगर पालिका क्षेत्र में इस बार 34133 वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अध्यक्ष पद पर रिकार्ड 14 लोग चुनावी मैदान में उतरे और जीत हासिल करने के लिए जोर आजमाइश करते नजर आए। चुनाव प्रचार के दौरान एक-एक वोट के लिए मची खींचतान के चलते राजनीतिक दलों के परंपरागत वोट बैंक का समीकरण बिखर गया और प्रत्याशियों में जातीय समीकरण को सेट करने की होड़ दिखी। राजनीतिक दलों में भितरघात नजर आया, टिकट न मिलने की नाराजगी दिखी। किसी ने पर्दे के पीछे से राजनीतिक चाल चली तो कुछ लोग बगावत करके भी सामने आए। भाजपा ने जिलाध्यक्ष गोविंद माधव को टिकट दिया तो निवर्तमान अध्यक्ष श्याम बिहारी और संजू सिंह ने बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में इतनी दमदारी से चुनाव लड़ा कि सबके वोटों का गणित बिगड़ गया। जबकि एक अन्य भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने बसपा का दामन थाम कर चुनावी मैदान में पूरा दम लगा दिया। सपा की बात करें तो पार्टी प्रत्याशी राम सेवक लोधी को भी भितरघात का सामना करना पड़ा। टिकट न मिलने से नाराज अन्य नेताओं ने विरोध तो नहीं किया लेकिन चुनावी अभियान से दूरी बनाए रखी। बताया जा रहा है कि इन नेताओं ने अंदरखाने से पार्टी प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाने की चालें जरूर चलीं। इन सारे महारथियों के बीच आजाद समाज पार्टी ने मुस्लिम चेहरे गुलाम नबी पर दांव लगा कर मुस्लिम और दलित वोटरों को साधने की कोशिश की। एक मात्र मुस्लिम प्रत्याशी होने के नाते इन्हें भी लड़ाई में माना जा रहा है। इतनी सारी जटिलताओं के बीच उलझे नगर पालिका चुनाव में मतदान के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही कि, ऊंट किस करवट बैठेगा। जानकारों के अनुसार इन छह उम्मीदवारों के बीच कांटे की लड़ाई है और जीत का सेहरा इनमें से किसी के भी सिर बंध सकता है। इन सारी अटकलों के बीच चर्चा है कि नगर पालिका क्षेत्र के लगभग एक तिहाई ब्राह्मण मतदाताओं का रुख ही निर्णायक साबित होगा।
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