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Siddharthnagar News: जाम से बचने के लिए दो किमी लगाते हैं चक्कर
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शहर से लुंबिनी मार्ग स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर लगा जाम। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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जाम से बचने के लिए दो किमी लगाते हैं चक्कर
हर घंटे थम जाती है शहर की रफ्तार, दो हिस्से में बंट जाता है शहर
जाम से बचने के लिए दो किलोमीटर अतिरिक्त चलकर एकमात्र ओवरब्रिज से होकर शहर में आते हैं लोग
तहसील कर्मी, स्कूली बच्चे और कारोबार लोग होते हैं प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर के मुख्य बाजार में स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम से बचने के लिए वाहन चालक दो किमी का चक्कर लगाते हैं। सिद्धार्थ तिराहे के पास रेलवे क्रासिंग से ट्रेन गुजरने के दौरान हर घंटे शहर दो भाग में बंट जाता है, साथ ही लंबा जाम लग जाता है। लोग शहर के बाहर स्थित भीमापार ओवरब्रिज से होकर वापस शहर में आते हैं। इसर्से इंधन के साथ ही समय की बर्बादी हो रही है, लेकिन निदान का रास्ता निकलता नहीं दिख रहा।
जनपद मुख्यालय के तहसील के पास रेलवे क्रॉसिंग है। पहले छोटी लाइन थी, लेकिन अब यह बड़ी लाइन हो चुकी है। प्रतिदिन इस रूट पर 15 ट्रेनें चलती हैं। इसमें मालगाड़ी भी शामिल है। छोटी लाइन से बड़ी लाइन का विस्तार हो गया है। ट्रेनें बढ़ीं तो आवागमन सुगम हुआ, लेकिन रेलवे क्रॉसिंग पर जाम की समस्या दोगुनी हो चुकी है। लगभग हर घंटे ट्रेन आने से दोनों तरफ एक किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है। जाम समाप्त होने में 15-20 मिनट लग जाते हैं। इस दौरान लोगों को काफी परेशानी होती है।
हालांकि, इस जाम से कोई अछूता नहीं है चाहे वह कर्मचारी हो या स्कूली बच्चे या फिर सरकारी कार्य के लिए आने वाले आम लोग। हर कोई जाम का दर्द सहने को विवश है, लेकिन कोई मरहम लगाने वाला नहीं है। लाइलाज हो चुकी है इस समस्या के निदान के लिए न तो जनप्रतिनिधि आगे आ रहे हैं और न ही प्रशासनिक अलमा ध्यान दे रहा है।
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50 हजार से अधिक लोग होते हैं प्रभावित
रेलवे लाइन के उत्तर दिशा में रोडवेज, रेलवे स्टेशन, कस्टम कार्यालय, एक महाविद्यालय, पांच इंटर कॉलेज के अलावा 10 से अधिक प्राइमरी विद्यालय संचालित हैं। साथ ही, लोटन, बर्डपुर ब्लॉक की बड़ी आबादी आती है, जो क्रासिंग पार करने के बाद ही शहर में प्रवेश कर पाती है। इसके अलावा कपड़े की दुकानें और अन्य बाजार हैं। इसमें लगभग 50 हजार लोगों प्रतिदिन आना-जाना होता है, जो जाम के शिकार होते हैं।
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हर घंटे बिना चले धुंए में उड़ जाता है ईंधन
शहर में हर घंटे लगने वाले जाम से बड़ी आर्थिक क्षति होती है। 15-20 मिनट खड़े होने पर बाइक को छोड़ दें तो अन्य वाहन चालू हालत में रहते हैं। ऐसे में बिना चले हजारों रुपये का ईंधन धुंए में उड़ जाता है। इस पर्यावरण प्रदूषण बढ़ जाता है।
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ओवरब्रिज बनाने की नहीं हुई पहल
नगर के कारोबारी अशोक श्रीवास्तव और संजय कुमार अग्रहरि ने कहा कि जनपद की स्थापना से पहले ही रेलवे सेवा शुरू हुई थी। तब न तो इतनी दुकानें थीं और न ही घनी आबादी थी। आज आसपास बड़ी आबादी बस गई है। शहर का दायरा बढ़ गया है, लेकिन लाइलाइज हो चुके जाम से निजात दिलाने के लिए एक ओवरब्रिज की पहल नहीं हुई। इस पर जनप्रतिनिधियों को ध्यान देने की जरूरत है।
वर्तमान में वाहनों के ओवरलोड के कारण शहर में जाम की समस्या बढ़ गई है। शहर के सिद्धार्थ तिराहे के पास रेलवे ओवरब्रिज बनाने के संबंध में रेल मंत्री एवं विभागीय अधिकारियों से मिलकर समस्या का निदान कराएंगे। -बृजलाल, राज्यसभा सदस्य, भाजपा
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हर घंटे थम जाती है शहर की रफ्तार, दो हिस्से में बंट जाता है शहर
जाम से बचने के लिए दो किलोमीटर अतिरिक्त चलकर एकमात्र ओवरब्रिज से होकर शहर में आते हैं लोग
तहसील कर्मी, स्कूली बच्चे और कारोबार लोग होते हैं प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर के मुख्य बाजार में स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम से बचने के लिए वाहन चालक दो किमी का चक्कर लगाते हैं। सिद्धार्थ तिराहे के पास रेलवे क्रासिंग से ट्रेन गुजरने के दौरान हर घंटे शहर दो भाग में बंट जाता है, साथ ही लंबा जाम लग जाता है। लोग शहर के बाहर स्थित भीमापार ओवरब्रिज से होकर वापस शहर में आते हैं। इसर्से इंधन के साथ ही समय की बर्बादी हो रही है, लेकिन निदान का रास्ता निकलता नहीं दिख रहा।
जनपद मुख्यालय के तहसील के पास रेलवे क्रॉसिंग है। पहले छोटी लाइन थी, लेकिन अब यह बड़ी लाइन हो चुकी है। प्रतिदिन इस रूट पर 15 ट्रेनें चलती हैं। इसमें मालगाड़ी भी शामिल है। छोटी लाइन से बड़ी लाइन का विस्तार हो गया है। ट्रेनें बढ़ीं तो आवागमन सुगम हुआ, लेकिन रेलवे क्रॉसिंग पर जाम की समस्या दोगुनी हो चुकी है। लगभग हर घंटे ट्रेन आने से दोनों तरफ एक किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है। जाम समाप्त होने में 15-20 मिनट लग जाते हैं। इस दौरान लोगों को काफी परेशानी होती है।
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हालांकि, इस जाम से कोई अछूता नहीं है चाहे वह कर्मचारी हो या स्कूली बच्चे या फिर सरकारी कार्य के लिए आने वाले आम लोग। हर कोई जाम का दर्द सहने को विवश है, लेकिन कोई मरहम लगाने वाला नहीं है। लाइलाज हो चुकी है इस समस्या के निदान के लिए न तो जनप्रतिनिधि आगे आ रहे हैं और न ही प्रशासनिक अलमा ध्यान दे रहा है।
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50 हजार से अधिक लोग होते हैं प्रभावित
रेलवे लाइन के उत्तर दिशा में रोडवेज, रेलवे स्टेशन, कस्टम कार्यालय, एक महाविद्यालय, पांच इंटर कॉलेज के अलावा 10 से अधिक प्राइमरी विद्यालय संचालित हैं। साथ ही, लोटन, बर्डपुर ब्लॉक की बड़ी आबादी आती है, जो क्रासिंग पार करने के बाद ही शहर में प्रवेश कर पाती है। इसके अलावा कपड़े की दुकानें और अन्य बाजार हैं। इसमें लगभग 50 हजार लोगों प्रतिदिन आना-जाना होता है, जो जाम के शिकार होते हैं।
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हर घंटे बिना चले धुंए में उड़ जाता है ईंधन
शहर में हर घंटे लगने वाले जाम से बड़ी आर्थिक क्षति होती है। 15-20 मिनट खड़े होने पर बाइक को छोड़ दें तो अन्य वाहन चालू हालत में रहते हैं। ऐसे में बिना चले हजारों रुपये का ईंधन धुंए में उड़ जाता है। इस पर्यावरण प्रदूषण बढ़ जाता है।
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ओवरब्रिज बनाने की नहीं हुई पहल
नगर के कारोबारी अशोक श्रीवास्तव और संजय कुमार अग्रहरि ने कहा कि जनपद की स्थापना से पहले ही रेलवे सेवा शुरू हुई थी। तब न तो इतनी दुकानें थीं और न ही घनी आबादी थी। आज आसपास बड़ी आबादी बस गई है। शहर का दायरा बढ़ गया है, लेकिन लाइलाइज हो चुके जाम से निजात दिलाने के लिए एक ओवरब्रिज की पहल नहीं हुई। इस पर जनप्रतिनिधियों को ध्यान देने की जरूरत है।
वर्तमान में वाहनों के ओवरलोड के कारण शहर में जाम की समस्या बढ़ गई है। शहर के सिद्धार्थ तिराहे के पास रेलवे ओवरब्रिज बनाने के संबंध में रेल मंत्री एवं विभागीय अधिकारियों से मिलकर समस्या का निदान कराएंगे। -बृजलाल, राज्यसभा सदस्य, भाजपा