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Siddharthnagar News: केस दर्ज हुए साढ़े तीन माह गुजरा, नहीं मिला न्याय
Sun, 18 Feb 2024 01:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 18 Feb 2024 01:20 AM IST
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सिद्धार्थनगर। अवैध रूप से संचालित अस्पताल में मरीजों का आर्थिक शोषण करके उनकी जान ले ली जा रही है। 31 अक्तूबर को विकास भवन के सामने अफसरों के नाक के नीचे पहले बच्चे और फिर गलत इलाज के कारण प्रसूता की मौत का है। पीड़ित की शिकायत टीम ने छापा मारा। अवैध रूप से संचालित अस्पताल को सील किया। प्रसूता और नवजात के मौत के मामले में अस्पताल संचालित पर नामजद और अज्ञात डॉक्टर पर केस दर्ज हुआ। केस दर्ज हुए साढ़े तीन माह का वक्त गुजर चुका है, लेकिन पीड़ित को न्याय अब तक नहीं मिला है।
गिरफ्तारी की बात तो दूर, पुलिस साढ़े तीन माह में विवेचना तक पूरी नहीं कर पाई है। जबकि पुलिस के हाथ कई ऐसे साक्ष्य लगे थे, जो आरोपियों की कार्रवाई के लिए काफी थे, ऐसा सूत्र पर बाते हैं। विधि विशेषज्ञ का कहना है कि यह पुलिस की बड़ी लारवाही है। घटना की स्थिति को देखते हुए आरोपी गिरफ्तारी और कम से कम समय में विवेचना पूरी करके न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करना चाहिए, जिससे जल्द सुनवाई शुरू हो सके।
यह थी घटना
27 अक्तूबर को जोगिया कोतवाली क्षेत्र के कपिया मिश्र गांव निवासी कुसुम का शहर के परसा शाह आलम में अफसरों के नाक के नीचे अवैध रूप से संचालित होने वाले लाइफ हास्पिटल में ऑपरेशन करने से पहले बच्चे की मौत हो गई। इसके दो बाद गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कुसुम ने दम तोड़ दिया। अस्पताल सील करके जांच शुरू हुई, लेकिन दो जाने चली गईं। तीन घंटे चले तनातनी के बीच अस्पताल सील किया था। मृतका के ससुर की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल संचालिका और अज्ञात पर लापरवाही पूर्वक इलाज से जान जाने सहित अन्य धारा में केस दर्ज किया था। इस मामले की विवेचना चल रही है। जो अभी तक पूरी नहीं हुई है।
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स्वास्थ्य विभाग को मिले थे कई कागजात
तत्कालीन सीएमओ की ओर से गठित स्वास्थ्य टीम के हाथ अस्पताल से कई डायरी और कागजात मिले थे। इसमें कई लोगों के नाम और लेनदेन का हिसाब था। मामले की जांच कर रही पुलिस का स्वास्थ्य विभाग ने जांच में सहयोग किया। सूत्रों के मुताबिक कई इनपुट स्वास्थ्य विभाग ने दिए थे। जिससे पुलिस बहुत कुछ कर सकती थी, लेकिन जांच जहां का तहां है। पूछे जाने पर एक जवाब विवेचना चल रही है।
यह घटनाएं भी हो चुकी हैं डुमरियागंज के खीरा मंडी स्थित जीवन हॉस्पिटल में इलाज के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से वर्ष जनवरी 2023 में मां और बच्चे की मौत की मौत हो गई थी। इस मामले में केस दर्ज हुआ था, लेकिन पुलिस गिरफ्तारी करने के बजाए पुलिस आरोपी को अभयदान देकर घूमा रही थी। जब स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार छापेमारी शुरू की और लोग पकड़े जाने लगे। पुलिस पर दबाव बढ़ा तो आरोपित फर्जी चिकित्सक धीरज चौधरी को 23 सितंबर 2023 को जेल भेजा गया था, जो अभी भी जेल में बंद है।
फर्जी अस्पताल पर हुई कार्रवाई डुमरियागंज क्षेत्र के बेंवा चौराहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निकट चिकित्सकों के फर्जी पंपलेट और लेटर पैड का दुरुपयोग करके दो मरीज माफिया अस्पताल चला रहे थे। लोग कई बार शिकायत करते रहे, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा था। जब मामले की ऊपर तक शिकायत हुई तो स्वास्थ्य विभाग जागा और जांच किया तो फर्जीवाड़ा मिला। केस दर्ज करके पुलिस ने 14 दिसंबर को दो आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। दोनों जेल में बंद हैं, पुलिस मामले की जांच कर रही है।
गिरफ्तारी से पहले ले लिया स्टे
18 जुलाई को इटवा क्षेत्र में संचालित अस्पताल में इटवा थाना क्षेत्र के कुनगाई गांव निवासी सत्यप्रकाश दुबे ने पत्नी सुषमा को भर्ती कराया था। आपरेशन किया गया और बच्चा हुआ। महिला को छोड़कर डॉ. शबनम यहिया चली गई। अधिक ब्लड गिरने से प्रसूता की मौत हो गई। बच्चे ने भी दम तोड़ दिया था। इस मामले में सत्यप्रकाश की तहरीर पर पुलिस ने लापरवाही पूर्वक इलाज से मौत के मामले में केस दर्ज किया। पुलिस गिरफ्तारी करती तबतक डॉ. आगे बढ़ गई और न्यायालय का शरण ले लिया। पुलिस ने विवेचना पूरी के चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दिया है। लेकिन रोक के कारण गिरफ्तारी नहीं कर पा रही है। इस संबंध में एसओ संतोष कुमार तिवारी ने बताया कि मामले में माननीय न्यायालय से गिरफ्तारी पर रोक थी। इसी रोक के दौरान लगभग दो माह पूर्व मामले में डॉ. शबनम यहिया के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय को भेज दी गई है।
जिले में पंजीकृत हैं इतने हास्पिटल और जांच सेंटर
आकड़ों पर गौर करें तो जिले में 94 हास्पिटल व क्लीनिक पंजीकृत हैं। जबकि 80 अल्ट्रासाउंड केंद्र पंजीकृत हैं। इसके इतर देखें तो जिले के लगभग हर चौराहे पर अस्पताल और क्लीनिक और जांच सेंटर संचालित हो रहे हैं। यानी आकड़ों के बाहर वाले सब अवैध रूप से चल रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य महकमा और प्रशासन को नजर नहीं आ रहे हैं। अगर पंजीकृत इतने ही हैं और कैसे संचालित हो रहे हैं यह विभाग पर बड़ा सवाल है। ऐसा लोगों का कहना है। जांच टीम जांच करने जाती है तो उलटा कागजात मांगती है। अगर सूची में नहीं हैं तो उन पर तत्काल कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कराना चाहिए जो नहीं हो रहा है। इसलिए अवैध रूप से अस्पताल और जांच केंद्र दिनों दिन बढ़ रहा और मरीजों का आर्थिक शोषण करने के साथ ही उनकी जान भी ले रहे हैं।
प्रसूता की हो गई मौत
लोटन कोतवाली क्षेत्र के स्थानीय कस्बे में संचालित होने वाले अस्पताल में गलत ऑपरेशन कर देने से उसका थाना क्षेत्र के सिसहनिया निवासी चांदनी ने दम तोड़ दिया था। मौत के बाद हंगामा हुआ तो स्वास्थ्य महकमें को पता चला कि अस्पताल अवैध रूप से चल रहा था। इसके बाद केस दर्ज करने के साथ ही अस्पताल को सील किया गया। इस मामले की जांच अभी चल रही है।
पेट में छोड़ा था कपड़ा, महिला ने तोड़ा था दम छह अगस्त को उसका थाना क्षेत्र के उसका बाजार में संचालित होने वाले नवजीवन अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान मदीना (26) के पित्त की थैली का ऑपरेशन करने के दौरान सूती कपड़ा छोड़ दिया गया। पेट में दर्द था शोहरतगढ़ के एक निजी अस्पताल में ले गए। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इसमें उसका बाजार अस्पताल के संचालक पर कार्रवाई हुई थी।
बोले विधि के जानकारी
पहले तो अवैध रूप से अस्पताल का संचालित करना अपराध है। दूसरा सबसे बड़ा अपराध यह जानते हुए कि जान जा सकती है। इसके बाद भी बिना जानकारी के इलाज करना जुर्म है। उसमें नवजात और प्रसूता की मौत होना और गंभीर है। इस मामले में केस दर्ज करके तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए। साथ ही साथ कम से कम समय में विवेचना पूरी करके न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर देना चाहिए। जिससे मामले की सुनवाई जल्द से जल्द शुरू हो सके। गिरफ्तारी न होना और विवेचना का पूरा न होना पुलिस की बड़ी लापरवाही दर्शाता है।
-संजय कुमार श्रीवास्तव, अधिवक्ता अपराध, जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर
अभी एक दिन पहले ही आए हैं। अस्पताल से जुड़े मामले की जांच के बारे में पता करवाते हैं कि जांच कहां तक पहुंची है। जांच पूरी करवाकर कार्रवाई की जाएगी।
-सुजीत कुमार राय, सीओ सदर
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गिरफ्तारी की बात तो दूर, पुलिस साढ़े तीन माह में विवेचना तक पूरी नहीं कर पाई है। जबकि पुलिस के हाथ कई ऐसे साक्ष्य लगे थे, जो आरोपियों की कार्रवाई के लिए काफी थे, ऐसा सूत्र पर बाते हैं। विधि विशेषज्ञ का कहना है कि यह पुलिस की बड़ी लारवाही है। घटना की स्थिति को देखते हुए आरोपी गिरफ्तारी और कम से कम समय में विवेचना पूरी करके न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करना चाहिए, जिससे जल्द सुनवाई शुरू हो सके।
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यह थी घटना
27 अक्तूबर को जोगिया कोतवाली क्षेत्र के कपिया मिश्र गांव निवासी कुसुम का शहर के परसा शाह आलम में अफसरों के नाक के नीचे अवैध रूप से संचालित होने वाले लाइफ हास्पिटल में ऑपरेशन करने से पहले बच्चे की मौत हो गई। इसके दो बाद गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कुसुम ने दम तोड़ दिया। अस्पताल सील करके जांच शुरू हुई, लेकिन दो जाने चली गईं। तीन घंटे चले तनातनी के बीच अस्पताल सील किया था। मृतका के ससुर की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल संचालिका और अज्ञात पर लापरवाही पूर्वक इलाज से जान जाने सहित अन्य धारा में केस दर्ज किया था। इस मामले की विवेचना चल रही है। जो अभी तक पूरी नहीं हुई है।
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स्वास्थ्य विभाग को मिले थे कई कागजात
तत्कालीन सीएमओ की ओर से गठित स्वास्थ्य टीम के हाथ अस्पताल से कई डायरी और कागजात मिले थे। इसमें कई लोगों के नाम और लेनदेन का हिसाब था। मामले की जांच कर रही पुलिस का स्वास्थ्य विभाग ने जांच में सहयोग किया। सूत्रों के मुताबिक कई इनपुट स्वास्थ्य विभाग ने दिए थे। जिससे पुलिस बहुत कुछ कर सकती थी, लेकिन जांच जहां का तहां है। पूछे जाने पर एक जवाब विवेचना चल रही है।
यह घटनाएं भी हो चुकी हैं डुमरियागंज के खीरा मंडी स्थित जीवन हॉस्पिटल में इलाज के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से वर्ष जनवरी 2023 में मां और बच्चे की मौत की मौत हो गई थी। इस मामले में केस दर्ज हुआ था, लेकिन पुलिस गिरफ्तारी करने के बजाए पुलिस आरोपी को अभयदान देकर घूमा रही थी। जब स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार छापेमारी शुरू की और लोग पकड़े जाने लगे। पुलिस पर दबाव बढ़ा तो आरोपित फर्जी चिकित्सक धीरज चौधरी को 23 सितंबर 2023 को जेल भेजा गया था, जो अभी भी जेल में बंद है।
फर्जी अस्पताल पर हुई कार्रवाई डुमरियागंज क्षेत्र के बेंवा चौराहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निकट चिकित्सकों के फर्जी पंपलेट और लेटर पैड का दुरुपयोग करके दो मरीज माफिया अस्पताल चला रहे थे। लोग कई बार शिकायत करते रहे, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा था। जब मामले की ऊपर तक शिकायत हुई तो स्वास्थ्य विभाग जागा और जांच किया तो फर्जीवाड़ा मिला। केस दर्ज करके पुलिस ने 14 दिसंबर को दो आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। दोनों जेल में बंद हैं, पुलिस मामले की जांच कर रही है।
गिरफ्तारी से पहले ले लिया स्टे
18 जुलाई को इटवा क्षेत्र में संचालित अस्पताल में इटवा थाना क्षेत्र के कुनगाई गांव निवासी सत्यप्रकाश दुबे ने पत्नी सुषमा को भर्ती कराया था। आपरेशन किया गया और बच्चा हुआ। महिला को छोड़कर डॉ. शबनम यहिया चली गई। अधिक ब्लड गिरने से प्रसूता की मौत हो गई। बच्चे ने भी दम तोड़ दिया था। इस मामले में सत्यप्रकाश की तहरीर पर पुलिस ने लापरवाही पूर्वक इलाज से मौत के मामले में केस दर्ज किया। पुलिस गिरफ्तारी करती तबतक डॉ. आगे बढ़ गई और न्यायालय का शरण ले लिया। पुलिस ने विवेचना पूरी के चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दिया है। लेकिन रोक के कारण गिरफ्तारी नहीं कर पा रही है। इस संबंध में एसओ संतोष कुमार तिवारी ने बताया कि मामले में माननीय न्यायालय से गिरफ्तारी पर रोक थी। इसी रोक के दौरान लगभग दो माह पूर्व मामले में डॉ. शबनम यहिया के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय को भेज दी गई है।
जिले में पंजीकृत हैं इतने हास्पिटल और जांच सेंटर
आकड़ों पर गौर करें तो जिले में 94 हास्पिटल व क्लीनिक पंजीकृत हैं। जबकि 80 अल्ट्रासाउंड केंद्र पंजीकृत हैं। इसके इतर देखें तो जिले के लगभग हर चौराहे पर अस्पताल और क्लीनिक और जांच सेंटर संचालित हो रहे हैं। यानी आकड़ों के बाहर वाले सब अवैध रूप से चल रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य महकमा और प्रशासन को नजर नहीं आ रहे हैं। अगर पंजीकृत इतने ही हैं और कैसे संचालित हो रहे हैं यह विभाग पर बड़ा सवाल है। ऐसा लोगों का कहना है। जांच टीम जांच करने जाती है तो उलटा कागजात मांगती है। अगर सूची में नहीं हैं तो उन पर तत्काल कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कराना चाहिए जो नहीं हो रहा है। इसलिए अवैध रूप से अस्पताल और जांच केंद्र दिनों दिन बढ़ रहा और मरीजों का आर्थिक शोषण करने के साथ ही उनकी जान भी ले रहे हैं।
प्रसूता की हो गई मौत
लोटन कोतवाली क्षेत्र के स्थानीय कस्बे में संचालित होने वाले अस्पताल में गलत ऑपरेशन कर देने से उसका थाना क्षेत्र के सिसहनिया निवासी चांदनी ने दम तोड़ दिया था। मौत के बाद हंगामा हुआ तो स्वास्थ्य महकमें को पता चला कि अस्पताल अवैध रूप से चल रहा था। इसके बाद केस दर्ज करने के साथ ही अस्पताल को सील किया गया। इस मामले की जांच अभी चल रही है।
पेट में छोड़ा था कपड़ा, महिला ने तोड़ा था दम छह अगस्त को उसका थाना क्षेत्र के उसका बाजार में संचालित होने वाले नवजीवन अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान मदीना (26) के पित्त की थैली का ऑपरेशन करने के दौरान सूती कपड़ा छोड़ दिया गया। पेट में दर्द था शोहरतगढ़ के एक निजी अस्पताल में ले गए। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इसमें उसका बाजार अस्पताल के संचालक पर कार्रवाई हुई थी।
बोले विधि के जानकारी
पहले तो अवैध रूप से अस्पताल का संचालित करना अपराध है। दूसरा सबसे बड़ा अपराध यह जानते हुए कि जान जा सकती है। इसके बाद भी बिना जानकारी के इलाज करना जुर्म है। उसमें नवजात और प्रसूता की मौत होना और गंभीर है। इस मामले में केस दर्ज करके तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए। साथ ही साथ कम से कम समय में विवेचना पूरी करके न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर देना चाहिए। जिससे मामले की सुनवाई जल्द से जल्द शुरू हो सके। गिरफ्तारी न होना और विवेचना का पूरा न होना पुलिस की बड़ी लापरवाही दर्शाता है।
-संजय कुमार श्रीवास्तव, अधिवक्ता अपराध, जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर
अभी एक दिन पहले ही आए हैं। अस्पताल से जुड़े मामले की जांच के बारे में पता करवाते हैं कि जांच कहां तक पहुंची है। जांच पूरी करवाकर कार्रवाई की जाएगी।
-सुजीत कुमार राय, सीओ सदर